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'लुटेरा' में देवआनंद, दिलीप कुमार और 'देवदास' भी
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Fri, 05 Jul 2013 05:46 PM IST
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इस शुक्रवार को रिलीज हुई 'लुटेरा' फिल्म 50 के दशक का बैकड्रॉप लिए हुए है। दशक 50 का दिखे इसलिए फिल्म निर्देशक विक्रमादित्य मोटवानी ने कई सारे संयोग भिड़ाए हैं। उन्होंने उस दौर की फिल्मों का जिक्र करने के साथ समकालीन लोकप्रिय साहित्य पर भी चर्चा की है।
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इस फिल्म में बाबा नागार्जुन की चर्चित कविता 'काली कुतिया' का पाठ किया गया है। फिल्म के नायक रणवीर सिंह और नायिका सोनाक्षी सिन्हा मिलकर इस कविता का पाठ करते हैं। साथ ही नागार्जुन के बारे में भी कुछ बातें की जाती हैं।
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पूरी फिल्म में कई जगह रेडियो में बजते हुए गाने दिखाए और सुनाए जाते हैं। यह ख्याल रखा गया है कि रेडियो उसी दौर के दिखें। फिल्म में दिखाए गए ज्यादातर रेडियो मर्फी कंपनी के थे। बजने वाले गाने हिंदी फिल्मों के साथ बंगाल के लोकगीत भी थे।
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इस फिल्म में उस दौर की कई फिल्मों का जिक्र आया है। खासतौर पर दिलीप कुमार की 'देवदास' का और देवआनंद की 'बाजी' का।
हालांकि इस बात पर आपत्ति भी हो सकती है कि इस फिल्म में जहां पर दिलीप कुमार की 'देवदास' को चलते हुए दिखाया गया है वह सन 1954 बताया जाता है जबकि यह फिल्म 1955 में रिलीज होती है।
फिल्म का एक कलाकार देवआनंद की हिल-डुलकर फाइट करने और बाल की स्टाईल न बिगड़ने की मिमिक्री भी करता है। डायलॉग है कि देवआनंद ने सात-गुंडों को हिल-डुलकर निपटा दिया लेकिन उनके बाल की डिजाइन नहीं बिगड़ी।
इस फिल्म में देवआनंद का जिक्र तब भी आया है जब उन्हें एक एक्शन हीरो की तरह ट्रीट किया गया है। फिल्म एक जगह रणवीर सिंह देवआनंद बनकर पुलिस को चकमा देने की बात करते हैं। नायिका कहती है कि पर तुम देवआनंद नहीं हो।