Guthlee Ladoo: 'गुठली लड्डू' से जातिवादी शब्द हटाने की मांग पर HC सख्त, सेंसर बोर्ड को दिया फैसला लेने का आदेश
गुजरात हाई कोर्ट ने फिल्म 'गुठली लड्डू' से वाल्मिकी समाज के लिए आपत्तिजनक शब्दों को हटाने का फैसला लेने के लिए सेंसर बोर्ड को निर्णय लेने का आदेश दिया है।
विस्तार
संजय मिश्रा की फिल्म 'गुठली लड्डू' आज 13 अक्तूबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। वहीं दूसरी तरफ फिल्म विवादों में भी फंसी हुई है। आरोप लगाया गया था कि इस फिल्म में वाल्मिकी समाज के खिलाफ शब्दों और भाषा के असंवैधानिक और असंसदीय इस्तेमाल किया गया है, जिसे हटाने की मांग को लेकर गुजरात हाई कोर्ट में फिल्म के निर्माताओं और सेंसर बोर्ड के खिलाफ एक अर्जी दायर की गई थी। वहीं अब गुजरात उच्च न्यायालय ने गुरुवार को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को निर्देश दिया कि वह शुक्रवार को रिलीज होने वाली हिंदी फिल्म 'गुठली लड्डू' में वाल्मिकी समुदाय के लिए आपत्तिजनक शब्द के इस्तेमाल के बारे में 24 घंटे में फैसला लें।
सेंसर बोर्ड को हाईकोर्ट का निर्देश
फिल्म आज शुक्रवार को रिलीज हो चुकी है। अदालत ने सहायक सॉलिसिटर जनरल देवांग व्यास के अनुरोध पर पेश हुए वकील सिद्धार्थ दवे को अदालत के आदेश से तुरंत सीबीएफसी को अवगत कराने का निर्देश दिया। मामले में फिल्म के निर्माताओं में से एक, यूवी फिल्म्स ने तर्क दिया कि फिल्म को कई फिल्म समारोहों में प्रदर्शित किया गया है। सीबीएफसी ने इस फिल्म को 'यू' सर्टिफिकेट दिया है। 'यू' सर्टिफिकेट वाली मूवीज सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जा सकेंगी, जिसे परिवार भी एक साथ बैठकर देख सकता है।
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हाईकोर्ट ने जारी किया था नोटिस
इससे पहले नौ अक्तूबर को हाई कोर्ट ने फिल्म के निर्माताओं और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) को नोटिस जारी किया था। कोर्ट में याचिका निमेश वाघेला द्वारा अपने वकील विशाल ठक्कर के माध्यम से दायर एक याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें फिल्म से एक शब्द हटाने के साथ-साथ इसके प्रमाणन को वापस लेने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया है कि फिल्म ने उक्त शब्द का उपयोग करके सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के साथ-साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (रोकथाम और अत्याचार) अधिनियम 1989 के प्रावधानों का उल्लंघन किया है, जो वाल्मिकी समुदाय की भावनाओं को आहत करता है।
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वाल्मिकी समाज की भावनाएं आहत करने का आरोप
याचिकाकर्ता ने कहा था कि वह फिल्म के विषय का विरोध नहीं करते हैं, लेकिन आहत करने वाले शब्द के इस्तेमाल के साथ-साथ फिल्म को "यू" प्रमाणन देने के सीबीएफसी के फैसले के खिलाफ हैं। फिल्म के ट्रेलर में मां और बेटे के बीच धर्म परिवर्तन के दौरान इस शब्द का कई बार इस्तेमाल किया गया है। फिल्म 'गुठली लड्डू' में वाल्मिकी समाज के एक बच्चे की पीड़ा का वर्णन किया गया है, लेकिन साथ ही 'भंगी' शब्द का इस्तेमाल अक्सर शांत रहा है और इससे वाल्मिकी समाज के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, इसलिए फिल्म के साथ-साथ ट्रेलर से भी असंसदीय शब्दों को हटाया जाना चाहिए। इन शब्दों के स्थान पर ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए जो किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचाएं।
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