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शुभ मंगल...देखने जा रहे हैं तो हो जाएं ‘सावधान’! पहले जान लें ये 10 बातें
amarujala.com- Presented by: संध्या द्विवेदी
Updated Sat, 02 Sep 2017 01:41 PM IST
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shubh mangal saavdhan
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शुभ मंगल... का ट्रेलर देखकर फिल्म देखने का मन बना लिया है तो जरा हो जाएं 'सावधान'! क्योंकि शुभ मंगल सावधान के ट्रेलर को देखकर तो यही लगेगा कि जब प्रोमो इतना झन्नाटेदार है तो पिक्चर तो ‘बम’ होगी। लेकिन पूरी फिल्म में डायलॉग्स की फुलझड़ी छूटने के अलावा बाकी सबकुछ बहका बहका सा नजर आ रहा है। हां, आयुष्मान खुराना की एक्टिंग मजेदार है। लेकिन भूमि पेडनेकर को देखकर यही लगेगा की ये खुद को रिपीट कर रही हैं। भूमि की मां बनी सीमा भार्गव ने एक बार फिर साबित किया की एक्टिंग करने में वो माहिर हैं।
पढ़ें- 'पद्मावती' के लिए रणवीर सिंह को रजा मुराद ने मारे थे 24 थप्पड़
1-फिल्म शुरू होती है सुगंधा यानी भूमि पेडनेकर का महीनों से पीछा करने वाले एक लड़के मुदित शर्मा यानी आय़ुष्मान खुराना के शॉट से। जिस दिन मुदित सुगंधा को प्रपोज करने का मन बनाते हैं उसी दिन बीच में आ जाता है भालू। सुगंधा की तरफ बढ़ते हुए मुदित का पैर पकड़ लेता है ये भालू। चलिए थोड़ा हंसना हंसाना हो गया।
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2- प्यार का इजहार करने में नाकाम मुदित मुदित ऑन लाइन रिश्ता भेजते हैं सुगंधा के घर। और इस रिश्ते का खुलासा होता है सुगंधा की मां की एक एड फिल्म के दौरान। इस सीन में सुगंधा की मां को छोड़ दें तो बाकी क्या कहना और क्या करना चाहते समझ नहीं आता।
3-अब चलते हैं स्टोरी की तरफ। पूरी फिल्म में स्टोरी बहक-बहककर चल रही है। फिल्म देखने के बाद आप खुद से पूछेंगे कि आखिर ये किस मुद्दे पर थी। सेक्स एजुकेशन पर या मर्दानगी के रियल मायने बताने के लिए या फिर ट्र लव समझाने के लिए।
4-जेंट्स प्रॉब्लम को चाय में भीगे टूटते हुए बिस्किट के जरिए समझाना तो चलो खैर ठहाके लगवा देता है लेकिन आयुष्मान के ससुर उन्हें वेटनेरी डॉक्टर के पास क्यों ले जाते हैं, समझ से परे है।
5-एक इंजीनियर होने के बावजूद मुदित शर्मा यानी आयुष्मान उस डॉक्टर से अपना दर्द साझा भी करते हैं। इतना ही नहीं गोली भी मांगते हैं। ये बात गले से बिल्कुल भी नहीं उतरती।
6-जेंट्स प्रॉब्लम के मुद्दे को लेकर शुरू हुई कहानी के बीच में घुस जाता एक और एंगल। ट्र लव विदाउट सेक्स! भूमि कहती हैं हम कुछ अलग करेंगे, घूमेंगे फिरेंगे-मौज करेंगे, सेक्स नहीं करेंगे। वो आयुष्मान को समझाने की कोशिश करती हैं कि मुदित उनके लिए बेहद स्पेशल हैं। अचानक कहानी के बीच में घुसा ट्रू लव कहानी को बहकाकर कहीं और ले जाता है।
7-और तब तो हद ही हो गई जब केले के पेड़ से भूमि की शादी करवाने पर तुले ससुराल वालों को छोड़कर भूमि चली जाती हैं। आयुष्मान एक इमोशनल लेक्चर देते हैं। ‘मर्द वो नहीं होता जिसे दर्द न हो, मर्द वो होता है जो दूसरों को दर्द नहीं देता।’ मतलब कहानी के भीतर एक और एंगल!
8-जिमी शेरगिल का कॉन्डोम के एड के लिए हरिद्वार कहानी का हिस्सा कैसे था? भाई ये तो बिल्कुल भी समझ नहीं आता।
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1-फिल्म शुरू होती है सुगंधा यानी भूमि पेडनेकर का महीनों से पीछा करने वाले एक लड़के मुदित शर्मा यानी आय़ुष्मान खुराना के शॉट से। जिस दिन मुदित सुगंधा को प्रपोज करने का मन बनाते हैं उसी दिन बीच में आ जाता है भालू। सुगंधा की तरफ बढ़ते हुए मुदित का पैर पकड़ लेता है ये भालू। चलिए थोड़ा हंसना हंसाना हो गया।
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2- प्यार का इजहार करने में नाकाम मुदित मुदित ऑन लाइन रिश्ता भेजते हैं सुगंधा के घर। और इस रिश्ते का खुलासा होता है सुगंधा की मां की एक एड फिल्म के दौरान। इस सीन में सुगंधा की मां को छोड़ दें तो बाकी क्या कहना और क्या करना चाहते समझ नहीं आता।
3-अब चलते हैं स्टोरी की तरफ। पूरी फिल्म में स्टोरी बहक-बहककर चल रही है। फिल्म देखने के बाद आप खुद से पूछेंगे कि आखिर ये किस मुद्दे पर थी। सेक्स एजुकेशन पर या मर्दानगी के रियल मायने बताने के लिए या फिर ट्र लव समझाने के लिए।
4-जेंट्स प्रॉब्लम को चाय में भीगे टूटते हुए बिस्किट के जरिए समझाना तो चलो खैर ठहाके लगवा देता है लेकिन आयुष्मान के ससुर उन्हें वेटनेरी डॉक्टर के पास क्यों ले जाते हैं, समझ से परे है।
5-एक इंजीनियर होने के बावजूद मुदित शर्मा यानी आयुष्मान उस डॉक्टर से अपना दर्द साझा भी करते हैं। इतना ही नहीं गोली भी मांगते हैं। ये बात गले से बिल्कुल भी नहीं उतरती।
6-जेंट्स प्रॉब्लम के मुद्दे को लेकर शुरू हुई कहानी के बीच में घुस जाता एक और एंगल। ट्र लव विदाउट सेक्स! भूमि कहती हैं हम कुछ अलग करेंगे, घूमेंगे फिरेंगे-मौज करेंगे, सेक्स नहीं करेंगे। वो आयुष्मान को समझाने की कोशिश करती हैं कि मुदित उनके लिए बेहद स्पेशल हैं। अचानक कहानी के बीच में घुसा ट्रू लव कहानी को बहकाकर कहीं और ले जाता है।
7-और तब तो हद ही हो गई जब केले के पेड़ से भूमि की शादी करवाने पर तुले ससुराल वालों को छोड़कर भूमि चली जाती हैं। आयुष्मान एक इमोशनल लेक्चर देते हैं। ‘मर्द वो नहीं होता जिसे दर्द न हो, मर्द वो होता है जो दूसरों को दर्द नहीं देता।’ मतलब कहानी के भीतर एक और एंगल!
8-जिमी शेरगिल का कॉन्डोम के एड के लिए हरिद्वार कहानी का हिस्सा कैसे था? भाई ये तो बिल्कुल भी समझ नहीं आता।