Hygiene: स्कूलों में स्वच्छता संबंधी उत्पादों की कमी, मासिक धर्म के दौरान लड़कियां नहीं आती स्कूल - रिपोर्ट
Menstrual Hygiene: हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि स्कूल में साबुन, पानी और स्वच्छता की कमी के कारण लड़कियां मासिक धर्म के दौरान वहां के शौचालयों का उपयोग करने से "डरती" हैं। यह डर स्कूलों में उनकी अनुपस्थिति का कारण बनता है।
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Menstrual Hygiene: सोमवार को भारत में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन पर एक रिपोर्ड जारी की गई। इस रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल में साबुन, पानी और स्वच्छता की कमी के कारण लड़कियां मासिक धर्म के दौरान वहां के शौचालयों का उपयोग करने से "डरती" हैं। यह रिपोर्ट सुलभ इंटरनेशनल एनजीओ द्वारा जारी की गई है। रिपोर्ट कहती है कि लड़कियों का यह डर मासिक धर्म चक्र के दौरान स्कूलों में उनकी अनुपस्थिति का कारण बनता है।
स्कूल से रूकना एक 'मजबूर विकल्प'
रिपोर्ट में कहा गया है कि "निष्कर्षों से यह पता चला है कि घर से स्कूल की दूरी लड़कियों के लिए स्कूल छोड़ने में उतनी बड़ी बाधा नहीं है, जितनी मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन सुविधाओं की कमी है। मासिक धर्म चक्र के दौरान स्कूल से रूककर घर पर रहना एक ''मजबूर विकल्प'' है। ।
रिपोर्ट में कहा गया है, "अगर स्कूली लड़कियों को पैड जैसी नियमित मासिक धर्म स्वच्छता सामग्री नहीं मिलती है, तो उन्हें घर पर रहना सुरक्षित लगता है। यह एक मजबूर विकल्प है जब युवा लड़कियां स्कूलों में स्वच्छता और मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन सुविधाओं की निराशाजनक अनुपस्थिति के कारण अपने मासिक धर्म का प्रबंधन करने के लिए अपने घर की सुरक्षा, गोपनीयता और सुरक्षा का चयन करती हैं।"
सर्वेक्षण से पता चलता है कि लड़कियां "पानी, साबुन, स्वच्छता की कमी के साथ-साथ दरवाजे, नल और यहां तक कि कूड़ेदान गायब होने के कारण मासिक धर्म के दौरान स्कूल के शौचालयों का इस्तेमाल करने से डरती हैं।"
सुलभ इंटरनेशनल की रिपोर्ट में कहा गया है, "यह पीरियड्स के दौरान स्कूलों से अनुपस्थिति को उकसाता है, जिसका अर्थ है कि स्कूल वर्ष में 60 दिनों तक, मासिक धर्म वाली लड़की या तो कक्षाओं में भाग लेने में असमर्थ होती है या आधे-अधूरे मन से जाती है और असहज महसूस करती है।"
यह स्टडी असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, महाराष्ट्र, ओडिशा और तमिलनाडु के 14 जिलों में की गई थी, जिसमें विभिन्न जातीय समूहों को कवर करने वाले 22 ब्लॉकों और 84 गांवों की 4,839 महिलाएं और लड़कियां शामिल थीं।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि कार्यस्थलों में सामुदायिक शौचालयों के साथ-साथ धुलाई क्षेत्र, स्नान कक्ष और बहते पानी वाले शौचालय, स्कूलों में लड़कियों के लिए नल कनेक्शन के माध्यम से बहते पानी और उचित भंडारण टैंक के साथ अलग शौचालय उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
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