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डूसू: डीयू छात्रसंघ चुनाव क्यों है दिल्ली की राजनीति में खास? कई बड़े नेताओं ने यहीं से शुरू किया सियासी सफर

Sun, 06 Sep 2026 01:08 PM IST
शाहीन परवीन रश्मि शर्मा
रश्मि शर्मा Published by: शाहीन परवीन Updated Sun, 06 Sep 2026 01:08 PM IST
सार

डीयू छात्रसंघ चुनाव को दिल्ली की राजनीति की प्रयोगशाला माना जाता है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद समेत कई बड़े नेताओं ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत डूसू से की थी।

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DUSU Elections: Why Is Delhi University Student Politics Important for Delhi's Political Landscape?
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ - फोटो : AI

विस्तार

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव भले ही विश्वविद्यालय परिसर में होते हों, लेकिन इनका असर दिल्ली की राजनीति से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक दिखाई देता रहा है। वर्ष 1954 में शुरू हुए इस चुनावों ने पिछले सात दशकों में अलग-अलग विचारधाराओं के नेताओं को राजनीतिक मंच दिया।

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यहां से निकले कई छात्र नेताओं ने आगे चलकर पार्षद, विधायक, सांसद, केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री तक का सफर तय किया। इस लिहाज से इसू को दिल्ली और राष्ट्रीय राजनीति के लिए नेतृत्व तैयार करने वाली प्रयोगशाला कहना गलत नहीं होगा।
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चुनाव भले ही परिसर में होते हों, पर इनका असर राष्ट्रीय स्तर तक दिखाई देता है इस प्रयोगशाला से निकली सबसे अहम राजनीतिक उपलब्धि दिल्ली की मौजूदा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता हैं। वह ड्सू सचिव रहने के बाद वर्ष 1996-97 में अध्यक्ष बनी थीं। छात्र राजनीति से निकलकर उन्होंने नगर निगम की राजनीति में कदम रखा और तीन बार पार्षद रहीं। 
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वर्ष 2025 में शालीमार बाग से विधायक चुने जाने के बाद मुख्यमंत्री बनीं। डूसू के इतिहास में यह पहला मौका है, जब यहां की छात्र राजनीति से निकला कोई नेता दिल्ली के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचा। दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद भी वर्ष 1988-89 में डूसू अध्यक्ष रहे थे।

अरुण जेटली, अजय माकन और विजय गोयल ने अहम जिम्मेदारियां संभालीं:

डूसू ने ऐसे नेताओं को भी तैयार किया, जिन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वर्ष 1974 में एबीवीपी के टिकट पर अध्यक्ष बने अरुण जेटली आगे चलकर राज्यसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री बने। वर्ष 1986 में इसू अध्यक्ष रहे अजय माकन केंद्र सरकार में मंत्री बने। वर्ष 1978 में अध्यक्ष रहे विजय गोयल तीन बार लोकसभा और एक बार राज्यसभा सदस्य रहे तथा केंद्र में मंत्री की जिम्मेदारी संभाली।

कांग्रेस की राजनीति में भी रही डूसू की मजबूत छाप:

अजय माकन के अलावा सुभाष चोपड़ा, अलका लांबा, नीतू वर्मा और अमृता धवन ने छात्र राजनीति से शुरुआत की। नीतू वर्मा और अमृता धवन बाद में पार्षद बनीं। अनिल चौधरी विधानसभा पहुंचे, जबकि अनिल झा, विजय जौली और अलका लांबा भी इस अध्यक्ष के बाद विधायक बने।

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