सीबीएसई: आंसर शीट की कॉपी लेने पर अब रीइवैल्यूएशन से नहीं रोक सकेगा बोर्ड? सीआईसी ने फीस को लेकर भी की सिफारिश
CBSE Board Exams: सीआईसी ने सीबीएसई को आरटीआई के तहत उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां तय नियमों के अनुसार शुल्क लेकर देने का निर्देश दिया है। आयोग ने उत्तर पुस्तिका लेने के बाद पुनर्मूल्यांकन पर रोक लगाने वाले प्रावधान में बदलाव की भी सिफारिश की।
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CBSE Board Exams: सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के विद्यार्थियों के लिए केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। आयोग ने कहा है कि आरटीआई अधिनियम के तहत उत्तर पुस्तिका की प्रति मांगने वाले विद्यार्थियों से आरटीआई नियम, 2012 में तय शुल्क के अनुसार ही फोटोकॉपी का शुल्क लिया जाना चाहिए। साथ ही, आयोग ने सीबीएसई के उस प्रावधान पर भी आपत्ति जताई है, जिसके तहत आरटीआई के जरिए उत्तर पुस्तिका लेने के बाद विद्यार्थी पुनर्मूल्यांकन की मांग नहीं कर सकता।
मामला कहां से शुरू हुआ?
- यह मामला सीबीएसई कक्षा 10वीं के एक विद्यार्थी की आरटीआई याचिका से जुड़ा है।
- विद्यार्थी ने महंगी पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के कारण आरटीआई अधिनियम के तहत अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां मांगी थीं।
विद्यार्थी ने कक्षा 10 गणित मानक के सेट-3 के प्रश्नपत्र की कठिनाई, अंक निर्धारण में अपनाई गई मॉडरेशन नीति और अपनी उत्तर पुस्तिका में काटे गए अंकों को लेकर भी सवाल उठाए थे।
उत्तर पुस्तिका और पुनर्मूल्यांकन में कितना खर्च था?
- विद्यार्थी के अनुसार, पांच विषयों की उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां लेने के लिए 2,500 रुपये और पुन: सत्यापन के लिए भी 2,500 रुपये का शुल्क था।
- इसके अलावा प्रत्येक प्रश्न के लिए 100 रुपये देने पड़ते थे। इस तरह पूरी प्रक्रिया का खर्च करीब 10,000 रुपये तक पहुंच सकता था।
- इसी वजह से विद्यार्थी ने आरटीआई के तहत उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था।
सीबीएसई ने उत्तर पुस्तिका की प्रति कैसे दी?
सीबीएसई के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) ने 2 जुलाई 2025 को विद्यार्थी को बताया कि निर्धारित शुल्क मिलने के बाद मांगी गई उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां ईमेल के जरिए भेज दी गई थीं।
इसके बाद विद्यार्थी ने प्रथम अपील दायर की। उसने उत्तर पुस्तिका के कुछ खाली पन्नों, गणित में मॉडरेशन नीति और अपनी उत्तर पुस्तिका के मूल्यांकन से जुड़े सवाल उठाए।
प्रथम अपीलीय प्राधिकारी ने कहा कि ये मुद्दे मूल आरटीआई आवेदन में पूछी गई जानकारी से अलग हैं और इनके लिए अलग स्पष्टीकरण तथा विश्लेषण की जरूरत है।
सीबीएसई के किस नियम पर सीआईसी ने जताई आपत्ति?
सुनवाई के दौरान सीबीएसई के सीपीआईओ ने 19 मई 2025 के बोर्ड के परिपत्र का हवाला दिया। इसमें कहा गया था कि विद्यार्थी आरटीआई अधिनियम के तहत उत्तर पुस्तिका की प्रति प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन इसी अधिनियम के तहत उत्तर पुस्तिका के सत्यापन या पुनर्मूल्यांकन का अनुरोध नहीं किया जा सकता।
सीआईसी ने इस प्रावधान पर आपत्ति जताई। आयोग ने कहा कि सिर्फ इसलिए किसी विद्यार्थी को पुनर्मूल्यांकन से रोकना कि उसने आरटीआई के जरिए अपनी उत्तर पुस्तिका हासिल की है, आरटीआई अधिनियम और उसके नियमों की भावना के अनुरूप नहीं है।
आरटीआई की फीस पर सीआईसी ने क्या कहा?
- सीआईसी ने स्पष्ट किया कि आरटीआई के तहत मांगी गई उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां उपलब्ध कराने के लिए आरटीआई नियम, 2012 में निर्धारित फोटोकॉपी शुल्क ही लिया जाना चाहिए।
- आयोग ने कहा कि सीबीएसई आरटीआई अधिनियम के अनुरूप अधिकारों पर दूसरे नियमों या प्रावधानों के जरिए ऐसी फीस या शर्तें लागू नहीं कर सकता, जो आरटीआई कानून से असंगत हों।
- इसके लिए आयोग ने आरटीआई अधिनियम की धारा 22 का भी उल्लेख किया। यह धारा आरटीआई अधिनियम को अन्य कानूनों या प्रावधानों से असंगति होने की स्थिति में प्रभावी बनाती है।
सुप्रीम कोर्ट के किस फैसले का दिया हवाला?
सीआईसी ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के 11 अप्रैल 2019 के आईसीएसआई बनाम पारस जैन मामले के फैसले का भी उल्लेख किया। इस फैसले में कहा गया था कि किसी संस्थान के दिशा-निर्देशों के तहत उपलब्ध विकल्प और आरटीआई कानून के तहत उपलब्ध अधिकार एक-दूसरे के विकल्प नहीं हैं।
यानी किसी विद्यार्थी को किसी संस्थान के नियमों के तहत उपलब्ध उपाय अपनाने से केवल इसलिए वंचित नहीं किया जा सकता कि उसने आरटीआई का भी सहारा लिया है।
सीबीएसई को अब क्या बदलाव करना होगा?
- सीआईसी ने सीबीएसई को आरटीआई के तहत मांगी गई उत्तर पुस्तिकाएं निर्धारित फोटोकॉपी शुल्क पर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
- साथ ही आयोग ने सीबीएसई को 19 मई 2025 के परिपत्र में संशोधन करने की सिफारिश की है।
- आयोग ने कहा कि परिपत्र को आरटीआई अधिनियम के अनुरूप बनाया जाना चाहिए।
- सीआईसी ने सीपीआईओ को भविष्य में ऐसे मामलों में उचित सावधानी बरतने की सलाह भी दी है।
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