फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Education ›   Delhi School Students Face Road Risks, Two-Thirds Cross Major Roads Alone: Study

रिपोर्ट: दिल्ली के बच्चे स्कूल जाते समय कितने सुरक्षित? इतने छात्र अकेले पार करते हैं सड़क, अध्ययन में खुलासा

Mon, 07 Sep 2026 03:56 PM IST
आकाश कुमार पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: आकाश कुमार Updated Mon, 07 Sep 2026 03:56 PM IST
सार

Delhi: दिल्ली के 4,789 स्कूली किशोरों पर हुए अध्ययन में सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर तस्वीर सामने आई है। करीब दो-तिहाई छात्र स्कूल जाते समय अकेले मुख्य सड़क पार करते हैं, जबकि लगभग 60 प्रतिशत को सड़क सुरक्षा संकेतों की सही जानकारी नहीं है।
 

विज्ञापन
Delhi School Students Face Road Risks, Two-Thirds Cross Major Roads Alone: Study
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

Delhi: दिल्ली में स्कूल जाने वाले किशोरों के लिए रोज का सफर सड़क सुरक्षा के लिहाज से चिंता बढ़ाने वाला है। एक नए अध्ययन में सामने आया है कि करीब दो-तिहाई स्कूली छात्र स्कूल जाते समय अकेले मुख्य सड़क पार करते हैं। वहीं, पैदल चलना स्कूल आने-जाने का सबसे आम तरीका है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि बड़ी संख्या में छात्रों को सड़क सुरक्षा संकेतों की पर्याप्त जानकारी नहीं है।

विज्ञापन


यह अध्ययन जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के सहयोग से किया है। इसमें दिल्ली के उन चार सरकारी स्कूलों के 4,789 छात्रों को शामिल किया गया, जो अधिक सड़क दुर्घटनाओं वाले इलाकों यानी ‘ब्लैक स्पॉट’ के आसपास स्थित हैं। अध्ययन के निष्कर्ष शोध पत्रिका ‘इंजरी प्रिवेंशन’ में प्रकाशित हुए हैं।

विज्ञापन

कितने छात्र अकेले पार करते हैं मुख्य सड़क?

  • अध्ययन के मुताबिक, करीब दो-तिहाई (65%) छात्र स्कूल जाते समय मुख्य सड़कों को अकेले पार करते हैं।
  • घर लौटते समय भी बड़ी संख्या में किशोर बिना किसी वयस्क की निगरानी के व्यस्त सड़कों और राजमार्गों से गुजरते हैं।


जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ की चोट रोकथाम संबंधी शोधकर्ता प्रतिष्ठा सिंह ने बताया कि स्कूल से घर जाने के लिए 80 प्रतिशत लड़के और 49 प्रतिशत लड़कियां पैदल चलती हैं। कई छात्र व्यस्त सड़कों से अकेले गुजरते हैं। साइकिल से आने-जाने वाले छात्रों में भी कई ऐसे थे, जो अधिक यातायात वाली सड़कों पर अकेले यात्रा करते हैं।

सड़क हादसे और तेज रफ्तार वाहन सबसे बड़ी चिंता

अध्ययन में छात्रों से उनके रोजाना स्कूल आने-जाने के दौरान महसूस होने वाले खतरों के बारे में भी पूछा गया। सड़क हादसे और तेज रफ्तार वाहन उनकी प्रमुख चिंताओं में शामिल रहे।

इसके अलावा छात्रों ने लूटपाट और व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। लड़कों में लूटपाट का डर अधिक देखने को मिला, जबकि लड़कियों ने लैंगिक उत्पीड़न और छेड़छाड़ को लेकर ज्यादा चिंता जताई।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, इन अलग-अलग चिंताओं से पता चलता है कि लड़के और लड़कियां स्कूल आने-जाने के दौरान सड़क और व्यक्तिगत सुरक्षा के जोखिमों को अलग-अलग तरीके से अनुभव करते हैं।

विज्ञापन

कितने छात्रों को सड़क संकेतों की सही जानकारी नहीं?

  • अध्ययन की एक अहम चिंता सड़क सुरक्षा संकेतों को लेकर सामने आई।
  • सर्वे में शामिल लगभग 60 प्रतिशत छात्रों को आम सड़क सुरक्षा संकेतों की खराब जानकारी थी।


स्कूल और पैदल यात्रियों से जुड़े संकेतों की पहचान में भी छात्रों का प्रदर्शन विशेष रूप से कमजोर रहा। शोधकर्ताओं का मानना है कि केवल कक्षा में दी जाने वाली पारंपरिक सड़क सुरक्षा शिक्षा पर्याप्त नहीं हो सकती।

इसके लिए अनुकरण आधारित अभ्यास, सहपाठी शिक्षा और अलग-अलग परिस्थितियों पर आधारित प्रशिक्षण जैसे तरीके ज्यादा प्रभावी हो सकते हैं। इससे छात्र सड़क पर आने वाली वास्तविक परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझ और याद रख सकेंगे।

हेलमेट और सीट बेल्ट के इस्तेमाल में भी कमी

अध्ययन में सुरक्षा उपकरणों के इस्तेमाल को लेकर भी कमी सामने आई। मोटरसाइकिल पर पीछे बैठकर यात्रा करने वाले छात्रों में 39 प्रतिशत लड़कों और 46 प्रतिशत लड़कियों ने बताया कि वे कभी हेलमेट नहीं पहनते। कार से आने-जाने वाले छात्रों की संख्या अपेक्षाकृत कम थी, लेकिन इस समूह में भी सीट बेल्ट का इस्तेमाल नियमित नहीं पाया गया।

क्या सिर्फ बच्चों को सड़क सुरक्षा सिखाना काफी है?

  • शोधकर्ताओं का कहना है कि सड़क सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी किशोरों पर नहीं डाली जा सकती।
  • अगर बच्चे पैदल या साइकिल से स्कूल जा रहे हैं तो उनके आसपास की सड़कें और रास्ते भी सुरक्षित होने चाहिए।


जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ में चोट रोकथाम विभाग की प्रमुख जगनूर जगनूर ने कहा कि पैदल चलने वालों के लिए बेहतर रास्ते, पर्याप्त रोशनी, यातायात की गति कम करने के उपाय और सुरक्षित सड़क पार करने की व्यवस्था से बच्चों की सुरक्षा बेहतर हो सकती है। इसके साथ प्रभावी नियमों का पालन कराना भी जरूरी है।

स्कूल मार्गों को सुरक्षित बनाने पर जोर

अध्ययन के निष्कर्षों के मुताबिक, स्कूल आने-जाने के रास्तों को सुरक्षित बनाने के लिए केवल बच्चों के व्यवहार में बदलाव पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सुरक्षित बुनियादी ढांचे, यातायात नियमों के प्रभावी पालन और बेहतर सड़क सुरक्षा शिक्षा को साथ लेकर चलना होगा।

शोधकर्ताओं के अनुसार, बच्चों का रोज स्कूल आना-जाना उनकी दिनचर्या का सामान्य हिस्सा है, लेकिन व्यस्त सड़कों के बीच उन्हें कई बार अपनी सुरक्षा से जुड़े फैसले खुद लेने पड़ते हैं। ऐसे में शहरों की योजना बनाते समय बच्चों और अन्य कमजोर सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।

अध्ययन यह भी संकेत देता है कि रोजाना यातायात जोखिमों के संपर्क में रहने से कुछ खतरनाक स्थितियां बच्चों को सामान्य लगने लग सकती हैं। इसलिए सुरक्षित स्कूल मार्ग तैयार करना केवल सड़क सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि बच्चों की रोजमर्रा की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल है।

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें शिक्षा समाचार आदि से संबंधित ब्रेकिंग अपडेट।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed