क्या है भारत-पाक के बीच हुआ करतारपुर समझौता, जानें इसकी शर्तें
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भारत और पाकिस्तान के बीच करतारपुर कॉरिडोर को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर किया गया है। इसके तहत भारतीय श्रद्धालु पाकिस्तान स्थित दरबार साहेब के दर्शन करने जा सकते हैं।
भारतीय और पाकिस्तानी अधिकारियों ने जीरो पॉइंट पर मिलकर ये समझौता किया है। यह कॉरिडोर 10 नवंबर से खुल जाएगा। भारत के कई और प्रस्तावों पर 'पाकिस्तान ने सैद्धांतिक रूप से सहमति' दे दी है। ये कॉरिडोर पंजाब स्थित डेरा साहेब नानक को करतारपुर स्थित दरबार साहेब से जोड़ेगा। दोनों देशों के लोगों को इस यात्रा के लिए वीजा की जरूरत नहीं होगी।
इस समझौते में क्या है
- कोई भी भारतीय किसी भी धर्म या मजहब को मानने वाला हो, उसे इस यात्रा के लिए वीजा की जरूरत नहीं होगी।
- यात्रियों के लिए पासपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन (ईटीए) की जरूरत होगी।
- पूर्व घोषित दिनों के अलावा ये कॉरिडोर पूरे साल खुला रहेगा।
- भारतीय विदेश मंत्रालय यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की सूची 10 दिन पहले पाकिस्तान को देगा।
- हर श्रद्धालु को 20 डॉलर यानि करीब 1400 रुपये देने होंगे।
- एक दिन में पांच हजार लोग इस कॉरिडोर के जरिए दर्शन के लिए जा सकेंगे।
- तत्काल अस्थाई पुल का इस्तेमाल किया जा रहा है। आने वाले वक्त में एक स्थाई पुल बनाया जाएगा।
- श्रद्धालुओं को इस यात्रा के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा। ये पोर्टल गुरुवार से शुरु हो चुका है। आवेदकों को मेल और मैसेज के जरिए चार दिन पहले उनके आवेदन के कंफर्मेशन की जानकारी दी जाएगी।
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क्यों अहम है ये जगह?
- करतारपुर साहिब पाकिस्तान में आता है, लेकिन इसकी भारत से दूरी महज साढ़े चार किलोमीटर है।
- अब तक कुछ श्रद्धालु दूरबीन से करतारपुर साहिब के दर्शन करते रहे हैं। ये काम बीएसएफ की निगरानी में होता है।
- श्रद्धालु यहां आकर दूरबीन से सीमा पार मौजूद करतापुर साहिब के दर्शन करते हैं।
- मान्यताओं के मुताबिक, सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक 1522 में करतारपुर आए थे। उन्होंने अपनी जिंदगी के आखिरी 18 साल यहीं गुजारे थे।
- माना जाता है कि करतारपुर में जिस जगह गुरु नानक देव की मृत्यु हुई थी, वहां पर गुरुद्वारा बनाया गया था।
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