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Assembly Election 2023: कैसे बनते हैं चुनाव आयुक्त, जानिए कौन करता है इनकी नियुक्ति

Mon, 09 Oct 2023 04:05 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Mon, 09 Oct 2023 04:05 PM IST
सार

Election Commission Of India: आज देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों का एलान किया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनावों की तिथियों के बारे में जानकारी दी। आइए जानते हैं चुनाव आयुक्त कैसे बनते हैं।

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Assembly Election 2023 know How and who appoints election commissioners
मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार - फोटो : एएनआई

विस्तार

Election Commission Of India: भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। देश में चुनाव कराने का काम भारतीय निर्वाचन आयोग का होता है। चुनाव की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग के मुखिया यानी मुख्य चुनाव आयुक्त की होती है। लेकिन, क्या आपको पता है कि आयुक्त की नियुक्ति कैसे होती है, नियुक्ति में किन-किन बातों का ध्यान रखा जाता है? यदि नहीं, तो यहां पढ़िए।

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क्या है निर्वाचन आयोग?

भारतीय निर्वाचन आयोग एक स्थायी संवैधानिक और स्वतंत्र निकाय है। आयोग की स्थापना 25 जनवरी, 1950 को की गई थी। शुरुआत में इसमें एक मुख्य  चुनाव आयुक्त का पद हुआ करता था, हालांकि बाद में इसमें दो अन्य चुनाव आयुक्त का पद बढ़ा दिया गया था। आयोग द्वारा कोई भी निर्णय लेने में सभी चुनाव आयुक्तों की बराबर जिम्मेदारी होती है। 

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कैसे होती है चुनाव आयुक्त की नियुक्ति

मुख्य चुनाव आयुक्त  व चुनाव आयुक्त की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति करते हैं। नियुक्ति के लिए यह शक्तियां केवल राष्ट्रपति को ही दी गई हैं, जो कि भारतीय संविधान के 324(2) में उल्लेखित है। चुनाव आयुक्त का कार्यकाल छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होता है। इसमें जो भी पहले हो जाएगी, तब अधिकारी अपने पद से सेवानिवृत्त हो जाएगा। 

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चुनाव आयुक्त को मिलने वाली सुविधाएं

मुख्य चुनाव आयुक्त व चुनाव आयुक्त का पद सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के बराबर होता है। यही वजह है कि इन्हें भी सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश को मिलने वाले लाभ और सुविधाओं के बराबर ही लाभ दिया जाता है। हालांकि, यदि कोई व्यक्ति आयुक्त के फैसले से खुश नहीं है, तो वह इनके फैसले को कोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दे सकते हैं।

हटाना नहीं होता आसान

मुख्य चुनाव आयुक्त एक संवैधानिक पद पर कार्यरत होते हैं। इसके साथ ही ये राजनीति से भी दूर होते हैं। हालांकि, यदि किसी परिस्थिति में आयुक्त को हटाना पड़े, तो केवल संसद महाभिायोग के माध्यम से ही मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव पारित कर सकती है। 

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