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रूस-यूक्रेन युद्ध: हाथों से बना तिरंगा बना आन-बान-शान, तब जाकर बची जान, सैनिकों ने छात्रों को रेलवे स्टेशन तक सुरक्षित रास्ता करया मुहैया
Sat, 05 Mar 2022 08:30 PM IST
सुशील कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली
Published by: सुशील कुमार
Updated Sat, 05 Mar 2022 08:30 PM IST
सार
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के रहने वाले आबिद अली ने बताया कि उन्होंने एक साल पहले ही वीएन कराजीन यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस में दाखिला लिया था।
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हाथ में तिरंगा लिए छात्र। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
यूक्रेन से भारतीय छात्रों की वतन वापसी के लिए भारत का सिर्फ मानवीय सहयोग ही नहीं मिल रहा है। बल्कि, देश का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा भी छात्रों का साथ दे रहा है। एमबीबीएस के प्रथम वर्ष के छात्र आबिद अली ने हाथों से बने तिरंगे के साथ हॉस्टल से लेकर ल्वीव रेलवे स्टेशन तक पैदल मार्च किया। इस सफर में उनके साथ अन्य 200 भारतीय छात्र भी मौजूद रहे। तिरंगा हाथ में होने पर यूक्रेनी सैनिकों ने छात्रों को रेलवे स्टेशन तक सुरक्षित रास्ता मुहैया करवाया।
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मूलरूप से उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के रहने वाले आबिद अली ने बताया कि उन्होंने एक साल पहले ही वीएन कराजीन यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस में दाखिला लिया था। रूस की ओर से यूक्रेन में युद्ध छिड़ने पर सभी छात्रों के आगे जान बचाने का संकट था। भारत आने के लिए छात्रों को हॉस्टल से ल्वीव रेलवे स्टेशन तक पहुंचना था। लेकिन, कई बार प्रयास करने के बाद भी जब कैब नहीं मिली तो छात्रों ने पैदल ही सफर करने का निर्णय लिया।
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डेढ़ घंटे के सफर में सीने से लगाकर रखा तिरंगा
आबीद अली ने बताया कि पैदल निकलने के लिए छात्रों ने अपने साथ तिरंगा रखने का फैसला लिया था। दुर्भाग्य था कि सभी के पास तिरंगा मौजूद नहीं था। इस समस्या से निपटने के लिए छात्रों ने कोरे कागज पर तिरंगा बनाना शुरू किया। तिरंगा बनाने के बाद सभी छात्र सड़कों पर एक साथ तिरंगा लेकर निकल गए। डेढ़ घंटे के पैदल सफर में तिरंगा छात्रों के सीने से लगा रहा और मुंह से निकल रहे भारत माता की जय के नारे डर की जंजीर को तोड़ने का काम कर रहे थे।
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वहीं, तिरंगा देखकर यूक्रेनी सैनिकों ने दल को ल्वीव रेलवे स्टेशन तक पहुंचने में मदद की। यहां से ट्रेन के लिए कई बार कोशिश की, लेकिन ट्रेन नहीं मिल सकी। बाद में पोलैंड तक का सफर तय किया, जिसके बाद अब अपने वतन वापस लौट सका हूं।
यूक्रेन से ही पढ़ाई पूरी करने की आशा
आबिद ने बताया कि उनके साथ भारत लौटे छात्रों ने अपनी पढ़ाई को यूक्रेन से ही पूरा करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि बेशक अभी हालात बिगड़े हुए हैं, लेकिन एक बार हालात सामान्य होने पर फिर से यूक्रेन का रूख किया जाएगा और दल के सभी छात्र वहीं से पढ़ाई पूरी करेंगे। उन्होंने कहा कि जिस तिरंगे के साथ वे लौटे हैं, फिर से वे उसी तिरंगे के साथ मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के लिए खारकीव जाएंगे।