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दिल्ली दंगा: शरजील इमाम ने खड़ा किया था दिल्ली का सबसे बड़ा धरना
Thu, 24 Sep 2020 03:47 AM IST
नोएडा ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 24 Sep 2020 03:47 AM IST
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Sharjeel Imam
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सीएए व एनआरसी के विरोध में सबसे लंबा चलने वाला धरना शाहीनबाग में जेएनयू छात्र शरजील इमाम ने खड़ा किया था और यहीं दिल्ली दंगों की साजिश भी रची गई। शरजील के अलावा जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद, जामिया व आईआईटी के छात्रों ने भी बड़ी भूमिका निभाई थी। दूसरी तरफ जेएनयू के अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप की भी साजिश रचने में बड़ी भूमिका थी।
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यह दावा दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में दाखिल आरोप पत्र में किया है। स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार शरजील के बयान को साजिश संबंधी आरोप पत्र में रखा गया है। इसके अनुसार पांच दिसंबर को जेएनयू में अल्पसंख्यक संगठन के बैनर तले 300 से अधिक छात्र मिले। छह दिसंबर को ओखला, निजामुद्दीन, पुरानी दिल्ली में कैब से हजारों पर्चे बांटे। इसे कई कस्बों व शहरों में भी बांटा गया।
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वहीं उसने सात दिसंबर को जंतर-मंतर पर चक्का जाम की बात की। इसके बाद बीएपीएसए के नेताओं जितेन्द्र सूना और निरबाल रे को एएमयू में बुलाकर चक्का जाम करने और सहायता देने के लिए उनसे बात की। 13 दिसंबर को ओखला में तीन स्थानों पर धरना शुरू करने की बात की। एक स्थल सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। जामिया में विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ। मगर लोग कम थे। इससे निराशा हाथ लगी।
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इसके बाद जामिया में आसिफ मुजताबा और उसके समूह से बात की। आसिफ ने सुझाव दिया कि शाहीनबाग में वह रहता है। फिर वहां चक्का जाम की सहमति बनी। अगले दिन जुहर नमाज के बाद लोग शाहीनबाग में जमा होने शुरू हो गए। शरजील ने अन्य लोगों के साथ वहां बैरिकेडिंग शुरू कर दी।
13 दिसंबर को ही लोग विधायक अमानतुल्ला के साथ फुटओवर ब्रिज के नीचे धरने पर बैठ गए थे। शरजील व अन्य लोग इसमें शामिल हो गए।
अमानतुल्ला ने 14 दिसंबर को अगले शुक्रवार को अमित शाम के निवास की ओर जाने की घोषणा की थी। इस पर शरजील ने माइक ले लिया और बहस होने लगी। शरजील चक्का जाम करना चाहता था। स्थानीय लोगों ने उसकी मदद की।
रात के समय पुलिस ने घटनास्थल को खाली करने को कहा। लोग एक साइड की सड़क खोलने के लिए तैयार थे। शरजील इसके खिलाफ था। तभी एक बुजुर्ग तिरंगा लेकर मौके पर आया और पत्थर मारो की बात कहने लगा। इसके बाद पथराव शुरू हो गया। अगले दिन शाहीनबाग की दोनों सड़कों को ब्लाक कर दिया गया। तब तक एएमयू के लोग भी धरनास्थल पर पहुंच गए थे।