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Satish Kaushik: सतीश कौशिक का दिल्ली से रहा गहरा नाता, चांदनी चौक की चाट और मंडी हाउस की चाय का लेते थे लुत्फ

Thu, 09 Mar 2023 08:08 PM IST
Digvijay Singh शुजात आलम, अमर उजाला, दिल्ली
शुजात आलम, अमर उजाला, दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Thu, 09 Mar 2023 08:08 PM IST
सार

सतीश कौशिक के करीबी अजय शर्मा ने बताया कि बुधवार को पता चला कि भाई साहब को दिल का दौरा पड़ा है। कुछ ही देर बाद उनके दुनिया छोड़कर चले जाने की खबर मिली तो गहरा धक्का लगा। भाई साहब हमेशा बहुत याद आएंगे।

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Satish Kaushik had a deep connection with Delhi
सतीश कौशिक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अभिनेता-निर्देशक सतीश कौशिक ने 66 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। हमेशा सभी को हंसाने वाले कौशिक का दिल्ली से गहरा नाता रहा है। विकासपुरी और करोल बाग में रहकर उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला लिया। बाद में वे काम की तलाश में मुंबई चले गए। वहां जाकर भी वे कभी दिल्ली को नहीं भूले। चाहे चांदनी चौक की चाट हो या मंडी हाउस की चाय, जब भी वे दिल्ली आते तो कोशिश रहती कि मंडी हाउस या चांदनी चौक जरूर जाएं। 

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सतीश कौशिक के करीबी अजय शर्मा ने बताया कि बुधवार को पता चला कि भाई साहब को दिल का दौरा पड़ा है। कुछ ही देर बाद उनके दुनिया छोड़कर चले जाने की खबर मिली तो गहरा धक्का लगा। भाई साहब हमेशा बहुत याद आएंगे।

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मयूर विहार निवासी अजय शर्मा ने बताया कि भाई साहब का जन्म हरियाणा के महेंद्रगढ़ स्थित गांव धनौड़ा, तहसील कनीना में हुआ था। मेरा जन्म भी इसी गांव में हुआ है। बड़े होने की वजह से मैं सतीश को भाई साहब कहकर पुकारता था। भाई साहब की शुरुआती पढ़ाई गांव में ही हुई, बाद में पिता के साथ गुरुग्राम में आ गए। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए गुरुग्राम से कुछ समय के लिए विकासपुरी में रहे। बाद में वह करोल बाग शिफ्ट हो गए। 

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किरोड़ीमल कॉलेज से वे चाट खाने के लिए दोस्तों के साथ अक्सर चांदनी चौक जाते थे। स्नातक के बाद नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला लेने के बाद उनकी बैठक मंडी हाउस पर चाय-समोसे की दुकान पर लगती थी। भाई साहब 1978 में काम की तलाश में मुंबई चले गए, लेकिन उनका दिल यहीं रहा। जब भी वे दिल्ली आते तो अक्सर मुझे कॉल कर मंडी हाउस बुला लेते थे। गाड़ी में बैठे-बैठे ही चाय पीते, बाद में किसी को भी चाय के पैसे नहीं देने देते थे।


गांव के विकास के लिए प्रशासन को लिखते थे पत्र
इतनी व्यस्तता होने के बाद भी सतीश गांव के लिए समय जरूर निकलते थे। गांव के विकास के लिए वह प्रशासन को चिट्ठियां लिखते रहते थे। गांव में खेलों को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने अपने गांव में प्रशासन की मदद से एक स्टेडियम भी बनवाया था। अजय ने बताया कि अक्सर गरीब लड़कियों की शादियां करवाने में भी सतीश बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। भाई साहब को गांव में ठाकुर जी के मंदिर से भी बहुत लगाव था। गांव जाने पर वे मंदिर में दर्शन के लिए जरूर जाते थे।

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