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फायदा नहीं, नुकसान दे रही हैं सैनिटाइजेशन यूनिट, दुष्प्रभावों के बारे में बताते हैं डॉक्टर

Wed, 15 Apr 2020 07:07 AM IST
नोएडा ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: नोएडा ब्यूरो Updated Wed, 15 Apr 2020 07:07 AM IST
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Sanitization units proving harmful in delhi
एम्स में आपातकालीन विभाग के बाहर बंद की गई यूनिट... - फोटो : अमर उजाला

कोरोना वायरस से बचाव का दावा करते हुए दिल्ली में 10 से ज्यादा जगहों पर सैनिटाइजेशन यूनिट लगाई गई हैं। बीते कुछ ही दिन में ये अस्पतालों से लेकर बाजार तक में दिखने लगीं। वैज्ञानिक तौर पर ये कितनी कारगर हैं, इसके बारे में कोई नहीं जानता। इसके अब तक मिले दुष्प्रभावों के बारे में जरूर एम्स के डॉक्टर अपने अनुभव साझा कर रहे हैं।

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एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि कुछ दिन पहले जब सैनिटाइजेशन यूनिट लगाई गई तो उनके मन में भी सवाल था कि आखिर यह कितनी कारगर होगी? वे अभी इस बारे में कोई अध्ययन कर भी नहीं पाए हैं, लेकिन दिन में दो से तीन बार यूनिट से होकर गुजरे थे। दो से तीन दिन में उनका 10 से 12 बार यूनिट से आना-जाना हुआ। सबसे पहले उनकी हथेलियों में लाल चकत्ते पड़ने शुरू हो गए। इसके बाद उनकी आंखों में भी खुजली की शिकायत हुई।
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ठीक इसी तरह एम्स के ही एक अन्य डॉक्टर ने बताया कि बार-बार आना-जाना तो लगा ही रहता है। तीन दिन बाद उन्हें भी त्वचा में काफी खुजली होने लगी थी। इस तरह की शिकायत मिलने के बाद एम्स ने सैनिटाइजेशन यूनिट को तत्काल बंद कर दिया। डॉक्टरों की मानें तो सैनिटाइजेशन यूनिट से कोरोना वायरस के संदिग्ध या संक्रमित मरीज को किसी भी तरह का लाभ मिला हो, ऐसा कोई अध्ययन अब तक सामने नहीं आया है।
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इससे पहले, विश्व स्वास्थ्य संगठन भी सैनिटाइजेशन यूनिट पर एक एडवाइजरी जारी कर चुका है। इसमें कहा गया है कि यह यूनिट लोगों में कोरोना वायरस से सुरक्षा की झूठी भावना पैदा करता है। लोगों को लगता है कि हाथ अच्छे से साफ करने, सामाजिक दूरी आदि उपायों का यह विकल्प है। इंसान पर शराब, क्लोरीन या लिसोल का छिड़काव न केवल हानिकारक है, बल्कि अप्रभावी भी है। इन यूनिट्स का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

दिल्ली एम्स के ही एक डॉक्टर ने बताया कि सैनिटाइजेशन के लिए ब्लीच, सोडियम हाइपोक्लोराइट जैसे रसायन का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके मिश्रण का एक पैमाना होता है। इसमें रसायनों का इस्तेमाल 0.5 फीसदी के हिसाब से होता है, लेकिन फिलहाल दिल्ली सहित जिन राज्यों में यूनिट लगी हैं, उनमें से कई में 1 फीसदी तक रसायनों के मिश्रण का इस्तेमाल किया जा रहा है।


दिल्ली सरकार ने नहीं दी थी सलाह
दिल्ली स्वास्थ्य विभाग की महानिदेशक डॉ. नूतन मुंडेजा का कहना है कि सैनिटाइजेशन यूनिट को लेकर शिकायतें मिल रही हैं, लेकिन सरकार ने इन यूनिट्स के बारे में कोई आदेश नहीं निकाला है। एम्स, हिंदूराव या एनडीएमसी ने अपने स्तर पर इन्हें लगाया था। हालांकि ये यूनिट्स केंद्रीय स्तर पर तय मानकों के अनुसार लगी थीं। इसलिए केंद्र के स्तर पर ही यूनिट्स हटाने का फैसला लिया जा सकता है।

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