फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Rohini Court orders registration of FIR against Delhi Police officials

बेरहमी पर कोर्ट सख्त: दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश, जानिए क्या है पूरा मामला

Fri, 31 Dec 2021 08:56 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Fri, 31 Dec 2021 08:56 AM IST
सार

दिल्ली की एक अदालत ने बेरहमी से पिटाई करने पर दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। 

विज्ञापन
Rohini Court orders registration of FIR against Delhi Police officials
फाइल फोटो - फोटो : Social Media

विस्तार

अदालत ने हिरासत में एक मामले में आरोपी को प्रताड़ित किया और बेरहमी से पिटाई करने पर दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन


रोहिणी न्यायालय के अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट बबरू भान ने आरोपी पर सुविचारित हमला बताते हुए संबंधित संयुक्त पुलिस आयुक्त को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि मामले की जांच करवाएं ताकि प्रक्रिया में निष्पक्षता बनी रहे।
विज्ञापन


आरोपी व्यक्ति ने पुलिस अधिकारियों पर आरोप लगाए है, वहीं उसकी पत्नी ने भी इसी तरह के आरोपों पर शिकायत दर्ज कराई थी। अदालत ने संबंधित डीसीपी को आईपीसी की धारा 323, 342, 506, 509, 354, 429 और 166ए के तहत दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


अदालत ने कहा पुलिस को बेहद कठिन परिस्थितियों में अपना काम करना पड़ता है और अंडरवर्ल्ड और हिंसक गिरोहों, आतंकवादियों, ड्रग पेडलर्स, चोरों, लुटेरों, डकैतों और स्नैचरों की बढ़ती संख्या के लिए बार-बार जवाबदेह ठहराया जाता है। 

अदालत ने कहा जो भी तर्क हो अगर पुलिस आरोपी को पकड़ने के लिए हिंसा का सहारा लेती है और सबूत इकट्ठा करने के लिए हिरासत में प्रताड़ित करती है, तो यह मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार है क्योंकि कानून कहीं भी जांच के दौरान सबूत एकत्र करने के उद्देश्य से हिरासत में प्रताड़ित करने की अनुमति नहीं देता।

पेश मामले के अनुसार 8 दिसंबर को शाम करीब पांच बजे आरोपी को न्यायिक हिरासत में रिमांड की अर्जी के साथ जांच अधिकारी द्वारा ड्यूटी एमएम के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने देखा कि आरोपी कार्यवाही के दौरान कांप रहा था ऐसे में अदालत ने आरोपी को खुद के कपड़े उतारने के लिए कहा। आरोपी के शरीर पर काले और नीले रंग के कई खरोंच के निशान थे, जिससे पता चलता है कि उस पर क्रूर हमला किया गया है।

अदालत के पूछने पर आरोपी ने बताया कि बेगमपुर थाने में पुलिस अधिकारियों द्वारा उसके साथ क्रूर हिंसा की गई। कथित हिरासत में हुई क्रूर हिंसा को ध्यान में रखते हुए ड्यूटी एमएम ने उच्च पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप की मांग की और संबंधित संयुक्त सीपी और डीसीपी से एक रिपोर्ट मांगी।

डीसीपी की रिपोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को यह निष्कर्ष देकर दोषमुक्त कर दिया कि पुलिस की बर्बरता नहीं है और व्यक्तिगत झगड़े के कारण आरोपी को उसके ही भाई ने घायल किया था।
 

अदालत ने पाया कि आरोपी और उसकी पत्नी द्वारा पुलिस कर्मियों के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह से निराधार नहीं हैं और इसमें कुछ विश्वसनीयता के तत्व है। अदालत ने कहा कि इस प्रकार, यह संभव है कि आरोपी को 8 दिसंबर 21 को रात 11 बजे पकड़ा गया था, लेकिन उसे 9 दिसंबर 21 की सुबह तक पुलिस स्टेशन में हिरासत में लिया गया हो। 

पुलिस का यह आचरण है तो यह भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा डीके बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य के मामले में जारी दिशानिर्देशों का उल्लंघन है। साथ ही गलत तरीके से हिरासत में रखने और आधिकारिक रिकॉर्ड में हेरफेर के आपराधिक अपराध के रूप में भी मामला बनता है।

अदालत ने पुलिस अधिकारियों को मामला दर्ज कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 3 जनवरी 22 को तय की है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed