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दिल्ली हादसे पर एक्शन: छात्र सुरक्षा पर एलजी का अल्टीमेटम, एसीपी-एसएचओ करेंगे छात्रों से सीधा संवाद

Wed, 09 Sep 2026 03:37 PM IST
अनुज कुमार आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Wed, 09 Sep 2026 03:37 PM IST
सार

दिल्ली एलजी ने छात्रों की सुरक्षा के लिए सख्त आदेश जारी किए हैं। दिल्ली पुलिस को 20 सितंबर तक कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने की अंतिम चेतावनी दी गई है।

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LG Issues Ultimatum on Student Safety in Delhi and Police to Hold Interactive Sessions with Students
दिल्ली में छात्रों की सुरक्षा पर एलजी का अल्टीमेटम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने राजधानी के पीजी, हॉस्टल और किराए के मकानों में रहने वाले लाखों छात्रों की सुरक्षा को लेकर एक बेहद सख्त और विस्तृत आदेश जारी किया है। एलजी के सीधे निर्देश पर हरकत में आई दिल्ली पुलिस ने अपने सभी एसीपी और थानों के एसएचओ को आदेश दिया है कि वे तुरंत छात्र बाहुल्य इलाकों में जाकर उनसे सीधा संवाद स्थापित करें। 

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इस पूरी कवायद में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रशासन ने इसे केवल एक औपचारिक अभियान नहीं रहने दिया है, बल्कि पुलिस के आला अधिकारियों को आगामी 20 सितंबर तक हर हाल में इस पर एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करने का सख्त अल्टीमेटम दे दिया है, जिससे महकमे में हड़कंप मचा है।

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टाइमलाइन की बंदिश और जवाबदेही तय
दिल्ली पुलिस द्वारा जारी ताजा आदेश में इस बार केवल निर्देश नहीं दिए गए हैं, बल्कि अधिकारियों की सीधे तौर पर जवाबदेही तय कर दी गई है। आदेश के मुताबिक, आगामी 11 दिनों के भीतर यानी 20 सितंबर तक जमीनी स्तर पर क्या कार्रवाई की गई, कितने छात्रों से संपर्क किया गया और उनकी समस्याओं का क्या निवारण हुआ, इसकी विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी। एलजी सचिवालय इस पूरी रिपोर्ट की खुद समीक्षा करेगा। प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि इस निश्चित समय सीमा के कारण पुलिस को अपने पारंपरिक ढर्रे से निकलकर तुरंत फील्ड में उतरना होगा।

एसएचओ और एसीपी की सीधी फील्डिंग
इस आदेश का सबसे बड़ा असर दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू), जेएनयू, जामिया और मुखर्जी नगर जैसे उन इलाकों में दिखेगा जहां भारी संख्या में छात्र और विशेष रूप से देश भर से आई छात्राएं पीजी या किराए के कमरों में रहती हैं। आदेश में साफ कहा गया है कि इन संबंधित क्षेत्रों के एसएचओ और एसीपी खुद छात्र आवासों, यूनिवर्सिटी परिसरों और पीजी का दौरा करेंगे। वे छात्रों के बीच जाकर एक स्ट्रक्चर्ड (व्यवस्थित) बातचीत करेंगे, ताकि पुलिस और छात्र समुदाय के बीच सीधे संवाद का एक मजबूत पुल तैयार किया जा सके।

महिला सुरक्षा और स्थानीय अपराधों पर ऑन-स्पॉट एक्शन
इस पुलिस आउटरीच का मुख्य फोकस छात्राओं की सुरक्षा और उनसे जुड़ी समस्याओं का तत्काल निवारण करना है। पुलिस अधिकारी बातचीत के दौरान विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा, छेड़छाड़ या उत्पीड़न की घटनाओं, स्थानीय स्तर पर होने वाले छोटे-मोटे अपराधों और मकान मालिकों या स्थानीय लोगों द्वारा छात्रों को परेशान किए जाने जैसे गंभीर मुद्दों का आकलन करेंगे। जिन मामलों में तत्काल कानूनी या सुरक्षात्मक कार्रवाई की जरूरत होगी, वहां स्थानीय पुलिस तुरंत सुधारात्मक और प्रिवेंटिव कदम उठाएगी, ताकि छात्रों में सुरक्षा का अहसास बढ़े।

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अन्य नागरिक एजेंसियों के साथ तालमेल का जिम्मा
छात्रों की कई समस्याएं ऐसी होती हैं जो सीधे तौर पर पुलिस के क्षेत्राधिकार में नहीं आतीं, जैसे स्ट्रीट लाइट का न होना, सड़कों पर अंधेरा या ड्रेनेज और सफाई से जुड़ी दिक्कतें। इस आदेश में पुलिस को यह विशेष अधिकार और जिम्मेदारी दी गई है कि वे केवल यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकते कि यह काम उनका नहीं है। अगर छात्रों की सुरक्षा को प्रभावित करने वाला कोई मुद्दा एमसीडी, डीडीडी या किसी अन्य सिविक एजेंसी से जुड़ा है, तो स्थानीय पुलिस अधिकारी खुद उन विभागों से तालमेल स्थापित कर समस्या का समाधान करवाएंगे।

सोशल मीडिया पर दिखेगा काम, दिखावे पर पाबंदी
उपराज्यपाल ने इस बात पर भी विशेष जोर दिया है कि इस पूरे सुरक्षा अभियान और पुलिस आउटरीच को दिल्ली पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अन्य संचार माध्यमों पर उचित रूप से प्रचारित किया जाए। हालांकि, इसके साथ ही एक कड़ा निर्देश यह भी जोड़ा गया है कि सोशल मीडिया पर किया जाने वाला यह प्रचार पूरी तरह से धरातल पर किए गए वास्तविक काम (सब्सटेंटिव फील्ड एंगेजमेंट) और उसके बाद की गई सार्थक कार्रवाई (फॉलो-अप) पर ही आधारित होना चाहिए। किसी भी प्रकार की कागजी बाजीगरी या सिर्फ फोटो खिंचवाने वाले दिखावे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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