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राम माधव ने विभाजन को किया याद: बोले- निर्णय की कमी के चलते हुआ यह परिणाम, बंटवारा केवल क्षेत्रों का नहीं, मन का भी हुआ था

Sat, 25 Sep 2021 05:24 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Sat, 25 Sep 2021 05:24 PM IST
सार

राम माधव ने कहा कि इनके बीच पुलों का निर्माण करने के तरीके खोजने और उन तत्वों को हतोत्साहित करने की आवश्यकता है, जो अलगाववाद में विश्वास करते हैं। 

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Ram Madhav remembered the partition Said this result was due to lack of decision partition was not only of regions but of mind too
राम माधव - फोटो : ANI

विस्तार

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन द्वारा शनिवार को आयोजित 'बंटवारे के दर्द का दिन' कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नेता राम माधव ने कहा कि विभाजन देश और क्षेत्र का नहीं, बल्कि मन का भी हुआ था। 

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उन्होंने कहा कि उन्हें अलगाववादी विचारों में विश्वास के तत्वों को एकीकृत और हतोत्साहित करने का एक तरीका खोजने की जरूरत है। 'अखंड भारत' के विचार को विभाजन के भय से उत्पन्न मानसिक बाधाओं को दूर करने के प्रयास के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि केवल भौतिक सीमाओं के सामंजस्य के रूप में।
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जेएनयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में पिछले दिनों 14 अगस्त को 'बंटवारे के दर्द का दिन' के रूप में मनाने का फैसला लिया है। इसी के तहत अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया गया। इसी में राम माधव संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना एक ऐसे नेता थे, जिन्हें स्वतंत्रता संग्राम के दौरान एक 'राक्षस' के रूप में विकसित होने की अनुमति दी गई थी। उन्हीं की जिद्द ने भारत को दो टुकड़ों में बांट दिया।
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विभाजन एक 'विनाशकारी घटना'
माधव ने विभजन को एक विनाशकारी और प्रलयकारी घटना करार दिया। यह गलत फैसलों के चलते घटी। उन्होंने कहा कि भारत का विभाजन उस दौरान अन्य कई देशों में हुए विभाजन जैसा नहीं था। वह केवल सीमाओं का  बंटवारा नहीं था। वह झूठे सिद्धांत पर किया गया था कि हिंदू और मुसलमान अलग राष्ट्र हैं। जबकि वे भिन्न पद्धतियों को मानते हुए भी एक साथ रहे रहे थे।


विभाजन से महत्वपूर्ण सबक भी मिले
माधव ने कहा कि विभाजन ने हमें एक महत्वपूर्ण सबक भी सिखाया। इसलिए हमें अतीत की गलतियों से सीखना चाहिए और विभाजित लोगों के बीच 'सेतु का निर्माण' करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत का विभाजन न केवल क्षेत्र का विभाजन था, बल्कि मन का विभाजन भी था। हमें मानसिक बंटवारे की दीवारों को ढहाना होगा। एक अखंड भारतीय समाज बनाना होगा, ताकि भारत को भविष्य में कभी विभाजन की एक अन्य त्रासदी को नहीं झेलना पड़े। इसलिए बंटवारे की भयावह कहानी के कारण मन में जो रुकावटें आ रही हैं, उन्हें दूर किया जाना जरूरी है।

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