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सिंघु बॉर्डर पर बिजली-पानी व स्वच्छता के संकट से जूझ रहे प्रदर्शनकारी किसान, मदद को आगे आ रहे लोग
Tue, 02 Feb 2021 09:04 PM IST
सुशील कुमार कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुशील कुमार कुमार
Updated Tue, 02 Feb 2021 09:04 PM IST
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सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसान
- फोटो : अमर उजाला
सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। किसान बिजली, पानी और स्वच्छता की समस्या से जूझ रहे हैं। इस दौरान स्थानीय लोग किसानों की नई उम्मीद बनकर आए हैं. कई लोग किसानों की मदद करने के लिए आगे आ रहे हैं।
सरकार ने धरनास्थलों से बिजली और पानी की आपूर्ति बंद कर दी है। जिससे किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आसपास के लोग अपने घरों से बिजली का कनेक्शन दे रहे हैं। इसके अलावा महिला प्रदर्शनकारियों को शौचालय इस्तेमाल करने दे रहे हैं। दिल्ली-हरियाणा राजमार्ग पर प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि इन विकट परिस्थितियों में अच्छे लोग उनकी मदद कर रहे हैं।
27 जनवरी की रात से ही बिजली कटौती का कर रहे सामना
पंजाब के पटियाला जिले के धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि हम 27 जनवरी की रात से ही बिजली कटौती का सामना कर रहे हैं। अगर स्थानीय लोग हमारी मदद नहीं करेंगे तो हमें पूरी रात बिना बिजली के ही बितानी पड़ेगी। वे रोशनी और अन्य चीजों के साथ हमारी मदद कर रहे हैं। इसके लिए वे लोग हमसे कोई शुल्क भी नहीं ले रहे हैं। धर्मेंद्र सिंह ने आगे कहा कि शुरू में हमलोग चिंतित थे कि रात में बदमाश अंधेरे का फायदा उठाकर किसी अप्रिय घटना को अंजाम दे सकते हैं। लेकिन स्थानीय लोगों और स्वयंसेवकों की टीमों ने हमारी मदद की। इसके लिए उन्होंने धन्यवाद दिया।
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'अधिकारों की लड़ाई में लोग हमारे साथ'
पटियाला के ही अवतार सिंह ने कहा कि अधिकारों की लड़ाई में स्थानीय लोग उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि आस-पास के लोग हमारी महिलाओं की हर संभव मदद कर रहे हैं। वे उन्हें अपने वॉशरूम और शौचालय का इस्तेमाल करने दे रहे हैं। वे जानते हैं कि सरकार हमारे आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है, इसलिए पूरे दिल से हमारा समर्थन कर रहे हैं। जबतक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जाती हैं तबतक एक इंच भी यहां से नहीं हटेंगे। वहीं कुछ दिन पहले हुए हमले को लेकर किसानों ने कहा कि स्थानीय लोगों ने नहीं, बल्कि एक राजनीतिक पार्टी द्वारा भेजे गए गुंडों द्वारा किया गया था।
गणतंत्र दिवस के बाद स्थिति गंभीर
एनजीओ जन स्वास्थ्य अभियान द्वारा दिसंबर में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार बिजली की कमी, स्वच्छता, जल जमाव और गर्म कपड़ों की कमी को किसानों की प्राथमिक चिंताओं के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। कई किसानों ने शिकायत की है कि गणतंत्र दिवस की घटना के बाद स्थिति और खराब हो गई है। लोगों और वाहनों की आवाजाही के लिए लगाए गए सुरक्षा उपायों और प्रतिबंधों के चलते उनके पास भोजन, पानी और बिजली जैसी बुनियादी जरूरतों तक पहुंच नहीं है।
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सरकार ने धरनास्थलों से बिजली और पानी की आपूर्ति बंद कर दी है। जिससे किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आसपास के लोग अपने घरों से बिजली का कनेक्शन दे रहे हैं। इसके अलावा महिला प्रदर्शनकारियों को शौचालय इस्तेमाल करने दे रहे हैं। दिल्ली-हरियाणा राजमार्ग पर प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि इन विकट परिस्थितियों में अच्छे लोग उनकी मदद कर रहे हैं।
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27 जनवरी की रात से ही बिजली कटौती का कर रहे सामना
पंजाब के पटियाला जिले के धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि हम 27 जनवरी की रात से ही बिजली कटौती का सामना कर रहे हैं। अगर स्थानीय लोग हमारी मदद नहीं करेंगे तो हमें पूरी रात बिना बिजली के ही बितानी पड़ेगी। वे रोशनी और अन्य चीजों के साथ हमारी मदद कर रहे हैं। इसके लिए वे लोग हमसे कोई शुल्क भी नहीं ले रहे हैं। धर्मेंद्र सिंह ने आगे कहा कि शुरू में हमलोग चिंतित थे कि रात में बदमाश अंधेरे का फायदा उठाकर किसी अप्रिय घटना को अंजाम दे सकते हैं। लेकिन स्थानीय लोगों और स्वयंसेवकों की टीमों ने हमारी मदद की। इसके लिए उन्होंने धन्यवाद दिया।
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'अधिकारों की लड़ाई में लोग हमारे साथ'
पटियाला के ही अवतार सिंह ने कहा कि अधिकारों की लड़ाई में स्थानीय लोग उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि आस-पास के लोग हमारी महिलाओं की हर संभव मदद कर रहे हैं। वे उन्हें अपने वॉशरूम और शौचालय का इस्तेमाल करने दे रहे हैं। वे जानते हैं कि सरकार हमारे आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है, इसलिए पूरे दिल से हमारा समर्थन कर रहे हैं। जबतक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जाती हैं तबतक एक इंच भी यहां से नहीं हटेंगे। वहीं कुछ दिन पहले हुए हमले को लेकर किसानों ने कहा कि स्थानीय लोगों ने नहीं, बल्कि एक राजनीतिक पार्टी द्वारा भेजे गए गुंडों द्वारा किया गया था।
गणतंत्र दिवस के बाद स्थिति गंभीर
एनजीओ जन स्वास्थ्य अभियान द्वारा दिसंबर में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार बिजली की कमी, स्वच्छता, जल जमाव और गर्म कपड़ों की कमी को किसानों की प्राथमिक चिंताओं के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। कई किसानों ने शिकायत की है कि गणतंत्र दिवस की घटना के बाद स्थिति और खराब हो गई है। लोगों और वाहनों की आवाजाही के लिए लगाए गए सुरक्षा उपायों और प्रतिबंधों के चलते उनके पास भोजन, पानी और बिजली जैसी बुनियादी जरूरतों तक पहुंच नहीं है।