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Delhi News: फेफड़ों से पैंक्रियाज तक पहुंच रहा प्रदूषण

Thu, 05 Nov 2026 07:17 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 05 Nov 2026 07:17 PM IST
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Pollution is reaching from the lungs to the pancreas.
बिगाड़ रहा शुगर कंट्रोल, डायबिटीज के साथ हाई बीपी का भी खतरा
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अब तक वायु प्रदूषण को सांस और फेफड़ों की बीमारियों से जोड़कर देखा जाता रहा है, लेकिन इसका असर शरीर के अंदरूनी अंगों तक भी पहुंच रहा है। हवा में मौजूद पीएम 2.5 के बेहद बारीक कण सांस के जरिये फेफड़ों में पहुंचते हैं और रक्तप्रवाह में मिलकर अग्न्याशय (पैंक्रियाज) तक असर डाल सकते हैं। इससे शरीर में इंसुलिन बनने और उसके काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। नतीजतन ब्लड शुगर बढ़ने और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा पैदा हो सकता है।

एक निजी अस्पताल के एंडोक्रिनोलॉजी और डायबेटोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अमरीश मित्तल ने बताया कि वायु प्रदूषण टाइप-2 डायबिटीज का एक स्थापित पर्यावरणीय कारण है। भारत में हुए अध्ययनों के अनुसार, पीएम 2.5 के संपर्क में आने से ब्लड शुगर बढ़ सकता है। लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से डायबिटीज का खतरा 22 फीसदी तक बढ़ सकता है।
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ऐसे शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं प्रदूषण के कण
डॉ. मित्तल के अनुसार, पीएम 2.5 में नाइट्रेट्स, सल्फेट्स, भारी धातुएं और कार्बन जैसे तत्व मौजूद होते हैं। इनके बेहद छोटे कण सांस के साथ फेफड़ों में पहुंचकर रक्तप्रवाह में शामिल हो सकते हैं। इसके बाद ये शरीर में सूजन पैदा करने और रक्त वाहिकाओं की दीवारों को नुकसान पहुंचाने का काम कर सकते हैं।
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इंसुलिन का स्राव हो सकता है प्रभावित
पैंक्रियाज शरीर में इंसुलिन बनाने वाला महत्वपूर्ण अंग है। इंसुलिन खून में मौजूद शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है। प्रदूषण के संपर्क में आने से पैंक्रियाज में सूजन हो सकती है और इंसुलिन का स्राव प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो सकती हैं। इस स्थिति को इंसुलिन रेजिस्टेंस कहते हैं। इससे ब्लड शुगर को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।


हाई बीपी और रक्त वाहिकाओं पर भी असर
मेडिसिन डॉक्टर के अनुसार, प्रदूषण के बारीक कण रक्त वाहिकाओं की दीवारों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे हाई ब्लड प्रेशर और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है यानी प्रदूषण का असर केवल सांस लेने की प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ सकता है।
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