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दिल्ली: घर में बच्चों के मेंटर बनेंगे अभिभावक, नर्सरी से पांचवीं तक के छात्रों के माता-पिता के लिए दिशा-निर्देश जारी

Thu, 16 Sep 2021 11:57 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Thu, 16 Sep 2021 11:57 PM IST
सार

सर्वोदय विद्यालय के स्कूल प्रमुख इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि क्लास टीचर सप्ताह में तीन बार अभिभावकों व छात्रों से बात करें। इस दौरान वह बच्चों का हाल-चाल पूछें और अभिभावकों का वर्कशीट व गतिविधियों को समझने में मदद करें।

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Parents will become mentor of children at home guidelines issued for parents of students from nursery to fifth
स्कूली छात्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना महामारी के कारण लंबे समय से स्कूल बंद होने के कारण सरकारी स्कूलों में नर्सरी से पांचवीं तक के बच्चों की पढ़ाई वर्कशीट से हो रही है। इन वर्कशीट का अभिभावकों को बेहतर प्रयोग कर बच्चों को सीखने में मदद करनी होगी। वह बच्चों को बोलने एवं अपना अनुभव साझा करने, जिज्ञासा को प्रोत्साहित करने के लिए प्रेरित करेंगे। इस तरह से वह घर में ही बच्चों के मेंटर बनेंगे। शिक्षा निदेशालय ने नर्सरी से पांचवीं तक के अभिभावकों व शिक्षकों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

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सर्वोदय विद्यालय के स्कूल प्रमुख इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि क्लास टीचर सप्ताह में तीन बार अभिभावकों व छात्रों से बात करें। इस दौरान वह बच्चों का हाल-चाल पूछें और अभिभावकों का वर्कशीट व गतिविधियों को समझने में मदद करें। निदेशालय ने अभिभावकों को दिशा-निर्देशों में कहा है कि वह वर्कशीट में कार्य करने, समझने, चित्र बनाने, गतिविधि करने में बच्चे की सहायता करें। अभिभावकों को घर में बच्चों को सीखने के अवसर देने होंगे और उनके लिए सीखने की प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश करें। बच्चा स्कूल में बहुत सी सामग्रियों से खेलता और सीखता है लेकिन इस कठिन समय में अन्य कई तरीकों से बच्चे की सीखने में मदद कर सकते हैं।
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कोरोना काल में बच्चों की सीखने की क्षमता प्रभावित न हो इसके लिए अभिभावकों को अपने अनुभव बच्चों के साथ साझा करने होंग और उन्हें उनके अनुभव सुनाने का मौका देना होगा। बच्चों के प्रश्नों के उत्तर दें और उनकी जिज्ञासा को प्रोत्साहित करें।
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अन्य दिशा-निर्देश
. बच्चों को घर में सहायता करने के अवसर प्रदान करें इससे आत्मनिर्भरता और जिम्मेदारी की भावना आएगी
. नर्सरी व केजी में पढने वाले बच्चों के अभिभावकों को बच्चों को लिखित कार्य क्रेयॉनस से करवाएं। क्रेयॉनर्स से ही अक्षरों की बनावट का अभ्यास करवाएं।
. बच्चों को अक्षरों, शब्दों की पहली आवाज का भरपूर अभ्यास करवाएं
. नंबर सिखाने के लिए पैसिंल, रबर, रंग, किताबें, खिलौने, कटोरिया गिनवाएं। पेसिंल की सहायता से कम-ज्यादा और घर की वस्तुओं से छोटा-बड़े का अभ्यास करवाएं

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