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Delhi: अनाधिकृत कॉलोनियों में मालिकाना हक मिलना हुआ आसान, सरल हुई दस्तावेजों की प्रक्रिया
Sat, 23 Jul 2022 02:32 PM IST
प्राची प्रियम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Sat, 23 Jul 2022 02:32 PM IST
सार
डीडीए के अनुसार वर्तमान में वसीयत एक अनिवार्य दस्तावेज होने के कारण पीएम-उदय योजना के तहत लगभग दो हजार आवेदन मंजूरी के लिए प्रतीक्षित है, मगर अब ऐसे आवेदनों को वसीयत के न होने की स्थिति में आगे बढ़ाया जा सकेगा।
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विस्तार
आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने पीएम-उदय योजना को सफल बनाने के लिए अनिवार्य दस्तावेजों में से वसीयत को हटाने के प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। मंत्रालय ने योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए जीपीए/एटीएस के स्थान पर रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड प्रस्तुत करने की अनुमति दी है। राजधानी में बसी अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों की सुविधा के लिए यह योजना बनाई गई थी।
डीडीए के अनुसार वर्तमान में वसीयत एक अनिवार्य दस्तावेज होने के कारण पीएम-उदय योजना के तहत लगभग दो हजार आवेदन मंजूरी के लिए प्रतीक्षित है, मगर अब ऐसे आवेदनों को वसीयत के न होने की स्थिति में आगे बढ़ाया जा सकेगा। डीडीए का मानना है कि अब आवेदनों के निपटान में तेजी आएगी और प्रक्रिया को सरलीकृत करने की सुविधा होगी। इसके अलावा आवेदनों की संख्या में वृद्धि होगी।
डीडीए के अनुसार बहुत से ऐसे आवेदन प्राप्त हुए है जिनमें आवेदकों ने पीएम-उदय योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए जीपीए/एटीएस के स्थान पर रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड को उपलब्ध कराया है, मगर गिफ्ट डीड स्वीकार्य दस्तावेज न होने के कारण आवेदनों को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता था।
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अब रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड के साथ आवेदनों पर भी पीएम-उदय योजना के तहत संपत्ति अधिकार के लिए मान्यता दी जा सकेगी। डीडीए के अनुसार पीएमउदय योजना के तहत गत 15 जुलाई तक 1,05,076 आवेदन आए है, जबकि 41,143 आवदेनों का निपटान हुआ है। डीडीए ने अनधिकृत कॉलोनियों के लोगों को मालिकाना अधिकार या हक देने के लिए पीएम उदय योजना को शुरू किया है।
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डीडीए के अनुसार वर्तमान में वसीयत एक अनिवार्य दस्तावेज होने के कारण पीएम-उदय योजना के तहत लगभग दो हजार आवेदन मंजूरी के लिए प्रतीक्षित है, मगर अब ऐसे आवेदनों को वसीयत के न होने की स्थिति में आगे बढ़ाया जा सकेगा। डीडीए का मानना है कि अब आवेदनों के निपटान में तेजी आएगी और प्रक्रिया को सरलीकृत करने की सुविधा होगी। इसके अलावा आवेदनों की संख्या में वृद्धि होगी।
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डीडीए के अनुसार बहुत से ऐसे आवेदन प्राप्त हुए है जिनमें आवेदकों ने पीएम-उदय योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए जीपीए/एटीएस के स्थान पर रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड को उपलब्ध कराया है, मगर गिफ्ट डीड स्वीकार्य दस्तावेज न होने के कारण आवेदनों को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता था।
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अब रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड के साथ आवेदनों पर भी पीएम-उदय योजना के तहत संपत्ति अधिकार के लिए मान्यता दी जा सकेगी। डीडीए के अनुसार पीएमउदय योजना के तहत गत 15 जुलाई तक 1,05,076 आवेदन आए है, जबकि 41,143 आवदेनों का निपटान हुआ है। डीडीए ने अनधिकृत कॉलोनियों के लोगों को मालिकाना अधिकार या हक देने के लिए पीएम उदय योजना को शुरू किया है।