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एक साल केजरीवालः तीन स्टेप से बेदम हुआ कोरोना, होम आईसोलेशन, रिकॉर्ड जांच और स्वास्थ्य सेवा बढ़ाकर पाया काबू
Tue, 16 Feb 2021 08:21 AM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Tue, 16 Feb 2021 08:21 AM IST
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अरविंद केजरीवाल
- फोटो : ANI
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कोरोना की तीन लहर देख चुकी दिल्ली में अब संक्रमण दम तोड़ रहा है। 98 फीसदी से ज्यादा लोग कोरोना से स्वस्थ हो चुके हैं। साथ ही मौत के आंकड़ों में भी लगातार कमी आ रही है। दिल्ली सरकार की ओर से उठाए गए व्यापक कदमों और जन सहभागिता से कोरोना को काबू करने में सफलता मिली है।
दिल्ली सरकार ने इस महामारी का मुकाबला करने के कई कदम उठाए। रोजाना औसतन 70 हजार से ज्यादा जांच की गई।घर-घर जांच अभियान चलाकर संक्रमितों की पहचान हुई। लोकनायक जीटीबी और राजीव गांधी जैसे बड़े अस्पतालों को कोविड विशेष बनाया गया। अस्पतालों में पांच हजार आईसीयू बेड बढ़ाए गए। एंबुलेंस की संख्या तीन गुना की गई। अस्पतालों के नियमित निरीक्षण के लिए समिति बनाई गई।
निजी अस्पतालों में 80 फीसदी बेड कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित किए गए। नतीजन, कोरोना वायरस अब पूरी तरह काबू मे हैं। औसतन 1000 टेस्ट करने पर महज 3 संक्रमित मिल रहे हैं। मृत्युदर भी 1.6 फीसदी बनी हुई है। दिल्ली के 100 से ज्यादा अस्पताल कोरोना मुक्त हो चुके हैं। लगभग सभी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं भी सामान्य हो गई है।
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संक्रमण पर काबू पाने में ये तीन मॉडल रहे प्रमुख
1.होम आईसोलेशन
देश में सबसे पहले दिल्ली में ही होम आईसोलेशन की सुविधा दी गई। हल्के लक्षण वाले सभी मरीजों का उनके घर पर ही इलाज किया गया। मरीजों को आक्सीप्लस मीटर दिए गए। डॉक्टरों की टीम ने समय-समय पर घर जाकर मरीज का स्वास्थ्य भी जांचा। सरकार के इस मॉडल से अस्पतालों में मरीजों की संख्या ज्यादा नहीं बढ़ी। इससे संक्रमण के गंभीर लक्षण वाले मरीजों को बेहतर इलाज मिला।
2.रिकॉर्ड जांच
दिल्ली में अप्रैल माह में प्रतिदिन औसतन 3 हजार टेस्ट किए जा रहे थे। जून में यह संख्या 15 हजार हुई। अगस्त में 30 हजार और सितंबर अक्तूबर में यह आंकड़ा 60 हजार पार कर गया था। इस दौरान दिसंबर के अलावा अधिकतर सभी महीनों में जांच की संख्या बढ़ने पर संक्रमित भी बढ़ रहे थे। आलम यह था कि नवंबर में संक्रमण दर 15 फीसदी हो गई थी। इसके बावजूद में सरकार ने कड़े फैसले लिए और अब एक माह से रोजाना औसतन 65 हजार टेस्ट किए जा रहे हैं। इसके बावजूद भी संक्रमितों की संख्या कम होती जा रही है। अब 1000 जांच होने पर महज 3 संक्रमित मिल रहे हैं। बीते एक माह से संक्रमण दर 1 फीसदी से भी कम बनी हुई है।
3.अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाई
सरकार ने अस्पतालों में 3 हजार से ज्यादा आईसीयू और करीब एक हजार वेंटिलेटर बेड बढ़ाए गए। एंबुलेंस की संख्या भी बढ़ाकर तीन गुना की गई। अस्पतालों के निरीक्षण के लिए विशेष समिति का गठन किया गया। समिति ने अस्पतालों में मरीजों की देखरेख के विषय में सभी जानकारी ली और इसकी रिपोर्ट सरकार को दी। इससे सभी जरूरी सुविधाओं को दुरूस्त किया गया।
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दिल्ली सरकार ने इस महामारी का मुकाबला करने के कई कदम उठाए। रोजाना औसतन 70 हजार से ज्यादा जांच की गई।घर-घर जांच अभियान चलाकर संक्रमितों की पहचान हुई। लोकनायक जीटीबी और राजीव गांधी जैसे बड़े अस्पतालों को कोविड विशेष बनाया गया। अस्पतालों में पांच हजार आईसीयू बेड बढ़ाए गए। एंबुलेंस की संख्या तीन गुना की गई। अस्पतालों के नियमित निरीक्षण के लिए समिति बनाई गई।
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निजी अस्पतालों में 80 फीसदी बेड कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित किए गए। नतीजन, कोरोना वायरस अब पूरी तरह काबू मे हैं। औसतन 1000 टेस्ट करने पर महज 3 संक्रमित मिल रहे हैं। मृत्युदर भी 1.6 फीसदी बनी हुई है। दिल्ली के 100 से ज्यादा अस्पताल कोरोना मुक्त हो चुके हैं। लगभग सभी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं भी सामान्य हो गई है।
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संक्रमण पर काबू पाने में ये तीन मॉडल रहे प्रमुख
1.होम आईसोलेशन
देश में सबसे पहले दिल्ली में ही होम आईसोलेशन की सुविधा दी गई। हल्के लक्षण वाले सभी मरीजों का उनके घर पर ही इलाज किया गया। मरीजों को आक्सीप्लस मीटर दिए गए। डॉक्टरों की टीम ने समय-समय पर घर जाकर मरीज का स्वास्थ्य भी जांचा। सरकार के इस मॉडल से अस्पतालों में मरीजों की संख्या ज्यादा नहीं बढ़ी। इससे संक्रमण के गंभीर लक्षण वाले मरीजों को बेहतर इलाज मिला।
2.रिकॉर्ड जांच
दिल्ली में अप्रैल माह में प्रतिदिन औसतन 3 हजार टेस्ट किए जा रहे थे। जून में यह संख्या 15 हजार हुई। अगस्त में 30 हजार और सितंबर अक्तूबर में यह आंकड़ा 60 हजार पार कर गया था। इस दौरान दिसंबर के अलावा अधिकतर सभी महीनों में जांच की संख्या बढ़ने पर संक्रमित भी बढ़ रहे थे। आलम यह था कि नवंबर में संक्रमण दर 15 फीसदी हो गई थी। इसके बावजूद में सरकार ने कड़े फैसले लिए और अब एक माह से रोजाना औसतन 65 हजार टेस्ट किए जा रहे हैं। इसके बावजूद भी संक्रमितों की संख्या कम होती जा रही है। अब 1000 जांच होने पर महज 3 संक्रमित मिल रहे हैं। बीते एक माह से संक्रमण दर 1 फीसदी से भी कम बनी हुई है।
3.अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाई
सरकार ने अस्पतालों में 3 हजार से ज्यादा आईसीयू और करीब एक हजार वेंटिलेटर बेड बढ़ाए गए। एंबुलेंस की संख्या भी बढ़ाकर तीन गुना की गई। अस्पतालों के निरीक्षण के लिए विशेष समिति का गठन किया गया। समिति ने अस्पतालों में मरीजों की देखरेख के विषय में सभी जानकारी ली और इसकी रिपोर्ट सरकार को दी। इससे सभी जरूरी सुविधाओं को दुरूस्त किया गया।