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इंटरनेट-फोन नहीं बनेंगे कोरोना टीका में बाधा, शिविर के जरिए मिलेगा लाभ

Wed, 20 Jan 2021 06:32 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Wed, 20 Jan 2021 06:32 PM IST
सार

- दिल्ली के जीटीबी अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. अरुण शर्मा ने की अमर उजाला से बातचीत

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भारत में कोरोना टीकाकरण - फोटो : PTI

विस्तार

कोरोना टीकाकरण को लेकर स्वास्थ्य कर्मचारियों में काफी पिछड़ापन देखने को मिल रहा है। खासतौर पर राजधानी के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मचारी टीकाकरण से कतरा रहे हैं लेकिन पूर्वी दिल्ली स्थित जीटीबी अस्पताल के डॉ. अरुण शर्मा का कहना है कि स्वास्थ्य कर्मचारियों को सिस्टम पर भरोसा रखना चाहिए।

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कोरोना वायरस के संक्रमण की चैन को तोड़ने के लिए यह बहुत जरूरी है। अमर उजाला से बातचीत में सामुदायिक चिकित्सा विभाग के डॉ. अरुण शर्मा ने बताया कि यह पूरा कार्यक्रम डिजिटल आधारित है। कोविन एप पर पंजीयन के बाद ही टीकाकरण में शामिल हो सकते हैं।
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ऐसे में सवाल उठता है कि जिन लोगों के पास फोन या इंटरनेट नहीं है उन्हें कैसे शामिल किया जा सकता है? इसके लिए सरकार ने बकायदा एक योजना बनाई है। आने वाले दिनों में शिविर के जरिए सरकार इन लोगों तक पहुंचेगी।  इससे लोगों को भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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डॉ. शर्मा ने बताया कि किसी भी तरह के वायरस में लगातार बदलाव होते रहते हैं। कोरोना वायरस में भी ऐसे बदलाव की जानकारी मिल रही है। भारत में इस समय दो टीका सामने आ चुके हैं और यह कहा जा सकता है कि नए म्यूटेशन वाले वायरस में भी यह दोनों टीका कारगर होंगे। हालांकि यह कई कारकों पर भी निर्भर करता है जैसे कि म्यूटेशन किस प्रकार का है? किस तकनीक के आधार पर टीका का निर्माण किया गया है, इत्यादि। 

यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस के अधीन जीटीबी के वरिष्ठ डॉ. अरुण शर्मा का यहां तक कहना है कि टीका लेने के बाद भी हमें मास्क पहनकर रखना है। देश में जब तक बड़ी तादाद में लोग कोरोना का टीका नहीं लगवाते हैं तब तक हमें कोविड सतर्कता नियमों का पालन जरूर करना पड़ेगा। टीका की डोज लेने और उसके 14 दिन बाद शरीर में प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने तक बेहद सावधानी की जरूरत है। अगर ऐसा नहीं होता है तो दूसरों के लिए भी संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

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आमाशय पर असर पड़ने का सबूत नहीं

एक सवाल पर डॉ. अरुण शर्मा ने कहा कि अभी तक इस बात के वैज्ञानिक सबूत नहीं मिले हैं कि कोरोना से किसी इंसान के शरीर में आमाश्य पर कोई असर पड़ता है। हालांकि इतना जरूर है कि खराब या कमजोर पाचन क्रिया से बुजुर्गों में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने यहां तक कहा है कि लोगों को इस वक्त समझदारी की जरूरत है। टीका शरीर में वायरस के खिलाफ रक्षा कवच तैयार करता है। आमतौर पर इसे बनाने में सालों लग जाते हैं लेकिन हमारी किस्मत अच्छी है कि यह समय पर मिल गया। अब इसे लेकर तरह तरह की बातें करना गलत होगा।

70 फीसदी आबादी को टीका लगना जरूरी
एक सवाल पर डॉ. अरुण शर्मा ने बताया कि हर्ड इम्यूनिटी को लेकर अब तक सही आंकड़ें सामने नहीं आए हैं लेकिन माना जा सकता है कि अगर 60 से 70 फीसदी आबादी को टीका लग जाए तो हर्ड इम्यूनिटी बन सकती है और वह कोरोना वायरस के खिलाफ काम करेगी। हालांकि भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश के लिए 70 फीसदी लक्ष्य को हासिल करना छोटी चुनौती नहीं है। कुछ लोगों का सोचना है कि कोरोना टीका लेने के बाद दूसरे टीका लेने में बाधा आ सकती है। जबकि ऐसा नहीं है। कोरोना का टीका लेने से अन्य किसी टीका में बाधा या अड़चान आने के अब तक कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। इसलिए लोग (खासतौर पर स्वास्थ्य कर्मचारी) को आगे आना चाहिए और समझदारी का परिचय देना चाहिए।

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