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दिल्ली गैंगरेपः रात 10 बजे 2 बजे तक की LIVE रिपोर्ट
सीमा शर्मा, दिल्ली
Updated Mon, 16 Dec 2013 12:03 PM IST
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बीते साल 16 दिसंबर को हुई गैंगरेप की वारदात के बाद दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बेहतर करने के बड़े-बड़े दावे किए गए थे। हालांकि साल भर बाद भी स्थिति में बहुत सुधार नहीं दिखता। शायद यही वजह है कि बीते 12 महीनों में महज सौ महिलाओं ने ही दिल्ली की रात्रि बस सेवा पर भरोसा जताया है।
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शनिवार रात 10 बजे से 2 बजे के बीच अमर उजाला संवाददाता सीमा शर्मा और फोटोग्राफर अरुण शर्मा ने राजधानी की सड़कों पर रात्रि बस सेवा और उसमें मौजूद सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया तो असुरक्षित दिल्ली की तस्वीर नजर आई। रात को राजधानी के सत्तर फीसदी से ज्यादा बस स्टॉप अंधेरे में डूबे नजर आए।
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बसों से हेल्पलाइन नंबर नदारद दिखे। रात को केवल लो फ्लोर बसें चलाने के दावे की हवा निकलती दिखी। साथ ही बसों के ड्राइवर, कंडक्टर और होमगार्ड के पास मुश्किल हालात में फंसी किसी की महिला की मदद करने की जानकारी का घोर अभाव दिखा। अभी भी रात को बसों के आने-जाने का कोई समय तय नहीं है। साथ ही रात में बगैर होमगार्ड की तैनाती के बसें दौड़ती नजर आईं। बसों में जो होमगार्ड मौजूद थे वह भी सोते हुए मिले।
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सोते हुए मिले सुरक्षा के लिए तैनात होम गार्ड
- ड्राइवर, कंडक्टर व होमगार्ड को नहीं पता मुश्किल में कैसे करनी है महिला की मदद
- बसों के आने को कोई समय नहीं, यात्रियों को अंधेरे बस स्टॉप पर घंटों करना पड़ता है इंतजार
- बसों में हेल्पलाइन नंबर तक नहीं, 12 महीनों में महज सौ महिलाओं ने रात्रि सेवा पर जताया भरोसा
16 दिसंबर की गैंगरेप की घटना के बाद जनता के गुस्से से घबराकर सरकार ने कई योजनाएं बनाईं थी। जिसमें डीटीसी बसों में सुरक्षा बढ़ाना प्रमुख था। डीटीसी बस न मिलने के चलते ही बिटिया अपने दोस्त के साथ चार्टर्ड बस में बैठी थी। हालांकि योजना बनाए जाने के 11 महीनों के बाद भी हालात बहुत बेहतर नहीं है।
डीटीसी बसों में रात्रि सुरक्षा के लिए तैनात होमगार्ड ज्यादातर बसों से नदारद दिखे। जिन बसों में वे मौजूद थे उसमें वह सोते पाए गए। यही नहीं इन होम गार्ड के पास एक डंडा तक नहीं था। बसों के अंदर आधे-अधूरे हेल्पलाइन नंबर अंकित पाए गए।
रात्रि सेवा में चलने वाली बसों की सुरक्षा का आलम यह है कि आज भी बसों के ड्राइवर , कंडक्टर व होमगार्ड को नहीं पता कि मुश्किल हालात में महिला यात्री की कैसे मदद करनी है। शायद यही वजह है कि रात्रि सेवा की बदलाव व्यवस्था के चलते पिछले 11 महीनों में महज सौ महिलाओं ने ही डीटीसी व सरकार के वादों पर भरोसा जताया है।
रात-11:00 बजे, स्थान - मुनिरका
मुनिरका इलाके में डीटीसी के तीन बस स्टॉप हैं। लेकिन महज एक पर ही पुलिस कर्मियों समेत पीसीआर तैनात थी। दो बस स्टॉप अंधेरे में डूबे थे। रात 10 से 10:45 बजे के बीच एक भी डीटीसी की बस नहीं दिखी। हालांकि पौने 11 बजे एक ही रूट नंबर 764 की द्वारका व मधु विहार जाने वाली तीन बसें एक के पीछे एक चल रही थी। रात्रि सेवा पर चलने वाली रूट नंबर से पहले शून्य वाली बस 12 बजे तक नजर नहीं आई। वैसे बस स्टॉप पर यात्री रात्रि सेवा का इंतजार कर रहे थे।
रात-12:00 बजे, स्थान - महिपालपुर फ्लाईओवर
मुनिरका से महिपालपुर और महिपालपुर फ्लाई ओवर से लेकर दोबारा मुनिरका के बीच आधे घंटे तक महज एक ही रात्रि सेवा नजर आई। पालम के पास रूट नंबर 764 की रात्रि सेवा की बस हाथ देने के बाद भी नहीं रुकी। पूरे रास्ते सभी बस स्टॉप सुनसान नजर आए।
रात-12:45 बजे, स्थान - प्रगति मैदान मेट्रो स्टेशन
मुनिरका से आईआईटी होते हुए एम्स और फिर इंडिया गेट से होते हुए प्रगति मैदान के बीच 55 बस स्टॉप मिले। लेकिन इस रूट पर पौने घंटे के बीच एक भी रात्रि सेवा की बस नजर नहीं आई। हालांकि एम्स के पास यात्री इंतजार करते दिखे। प्रगति मैदान मेट्रो स्टेशन बस स्टॉप पर दो यात्री मिले। दोनों, वहां एक घंटे से बस का इंतजार कर रहे थे।
रात-01:15 बजे, स्थान - नई दिल्ली रेलवे स्टेशन
मुनिरका जाने के लिए रूट नंबर 0604 बस तो खड़ी थी। लेकिन बस स्टॉप की बजाय बाहर सड़क पर अंधेरे में। सड़क पर कोई स्ट्रीट लाइट भी नहीं जल रही थी। बस के अंदर होमगार्ड ओमपाल सिंह आराम से सो रहा था। आवाज लगाने के बावजूद वह नहीं उठा। करीब दस मिनट के बाद जब यात्रियों का शोर हुआ तब जाकर वह उठा और आंखें मलते हुए पूछा, क्या हुआ?
रात-01:30 बजे, स्थान - दिल्ली गेट व एलएनजेपी के पास
सुरक्षा के चलते रात्रि सेवा में लो-फ्लोर बसों को ही सड़कों पर चलाने का आदेश था। जिसके गेट ऑटोमैटिक हों और अंदर रोशनी की पूरी व्यवस्था हो। हालांकि सुल्तानपुरी जा रही रूट नंबर 094 पर स्टेंडर्ड (पुरानी बस) बस दिखी। जिसमें रामलीला ग्राउंड से दिल्ली गेट तक तीन पुरुष चलती बस में चढ़े और उतरे। बस के अंदर पूरी तरह अंधेरा था। खास बात यह कि होम गार्ड तक नदारद था।
ड्राइवर, कंडक्टर व होमगार्ड को पता नहीं कि कैसे करनी है मदद
रात्रि बस सेवा में महिलाओं की सुरक्षा के समय कुछ गाइडलाइन बनाई गई थी। जिसमें चालक, परिचालक व होमगार्ड को बताया जाना था कि मुश्किल में महिला यात्री की मदद कैसे करनी है। डीटीसी ने बड़े जोर- शोर से ट्रेनिंग देने की बात भी की थी। लेकिन रात्रि सेवा की पड़ताल में पता चला कि एक भी चालक, परिचालक व होम गार्ड सुरक्षा की जानकारी नहीं रखते हैं। उन्होंने बताया कि सुरक्षा के लिए ऐतिहातन कदम उठाने की कोई ट्रेनिंग उन्हें नहीं मिली है।
अंधेरे में डूबे दिखे 70 फीसदी बस स्टॉप
रात को राजधानी के 70 फीसदी बस स्टॉप अंधेरे में डूबे नजर आए। महज नई दिल्ली और गैंगरेप वाले स्थल को छोड़कर अन्य स्थानों पर सुरक्षा के इंतजाम नदारद दिखे। हालांकि डीटीसी प्रबंधन बस स्टॉप में रोशनी का इतंजाम के लिए डिम्ट्स के जिम्मेदार होने की बात कह रहा है। वहीं डिम्ट्स इसके पीडब्लयूडी के अधीन आने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहा है।
पिछले एक साल में 70 फीसदी बस स्टॉप में अंधेरा पसरा होने की फाइल महज विभागों की आपसी खींचतान में उलझी हुई है। आउटर दिल्ली, ग्रामीण इलाके, पूर्वी दिल्ली, उत्तरी दिल्ली, मध्य दिल्ली, पुरानी दिल्ली, रोहिणी और द्वारका के इलाकों की सबसे अधिक शिकायतें यात्रियों ने डीटीसी हेल्पलाइन पर भेजी थी, जिसका कभी कोई हल नहीं निकला।
गृहमंत्रालय ने डीटीसी को ये दिशा-निर्देश जारी किए थे
-रात्रि सेवा में लो फ्लोर की बस होगी, जिसमें रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए।
-होम गार्ड पीछे बैठकर यात्रियों की मूवमेंट पर नजर रखेगा, ताकि अप्रिय घटना होने पर पुलिस या हेल्पलाइन पर फटाफट फोन कर मदद मांग।
-यदि कोई अकेली महिला यात्री हुई तो उसे कंडक्टर उसे किसी पीसीआर के पास उतारे, ताकि उसे आगे सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचाया जा सके।
-होम गार्ड को विशेष सुरक्षा किट दी जाएगी, जिसमें मोबाइल फोन, लकड़ी का डंडा व पुलिस व हेल्पलाइन के मोबाइल नंबर शामिल होंगे।
-बस के अंदर बड़े-बड़े हिन्दी व अंग्रेजी में हेल्पलाइन नंबर अंकित होने चाहिए।
-समय-सारिणी के तहत बस का संचालन होगा, ताकि यात्री को रात में अकेले बस स्टॉप पर इंतजार न करना पड़े
-बसों के आने-जाने की सही जानकारी देने के लिए पैसेंजर इंफॉरमेशन सिस्टम को चालू करवाना था, जोकि कॉमनवेल्थ गेम्स से अटका पड़ा था।
-बसों में तीन महीनों के अंदर सीसीटीवी कैमरा लगवाने थे, जोकि आज तक नहीं लग सके।