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अंबेडकर अस्पताल में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 03 Oct 2013 01:35 AM IST
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नई दिल्ली स्थित लोक नायक अस्पताल में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल के बाद अब बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं।
इसकी वजह भी लोक नायक अस्पताल वाली ही है। इस बीच मरीजों के लिए परेशानी ही परेशानी है।
डॉक्टर के साथ दुर्व्यवहार करने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम इनकी मांगें है।
बुधवार को गांधी जयंती की वजह से ओपीडी सेवा तो बंद थी, लेकिन आपातकालीन विभाग में इलाज के लिए भी मरीजों को इंतजार करना पड़ा।
आरोपियों की गिरफ्तारी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने के बाद ही हड़ताल से लौटने की जिद पर रेजिडेंट डॉक्टर अड़े हैं।
पुलिस ने सरकारी काम में बाधा पहुंचाने सहित कुछ अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मंगलवार रात अंबेडकर अस्पताल के मेडिसिन विभाग में भर्ती डेंगू संभावित शाहाबाद दौलतपुर गांव की रहने वाली जुगरा (36) की मौत हो गई।
महिला के पति राम बाबू ने आरोप लगाया कि चिकित्सकों की लापरवाही की वजह से उनकी मौत हुई है।
इससे नाराज परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात एक रेजिडेंट डॉक्टर के साथ दुर्व्यवहार किया और मारपीट भी की।
इस घटना से आहत दो सौ से अधिक रेजिडेंट डॉक्टरों ने मंगलवार देर रात एक बजे से ही काम काज ठप कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, मरीज जुगरा में प्लेटलेट्स काफी कम थीं।
अस्पताल में प्लेटलेट्स थी नहीं। लिहाजा प्लेटलेट्स के लिए रेड क्रॉस किसी को भेजा गया था। लेकिन खून में आने में वक्त लगा, इसके बावजूद डॉक्टरों ने महिला को बचाने की पूरी कोशिश की, पर बचा नहीं सके।
डेंगू मरीजों की परेशानी बढ़ी
रोहिणी सेक्टर छह स्थित बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर अस्पताल में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से पीडियाट्रिक्स, मेडिसिन, स्त्री और प्रसूति रोग विभाग में भर्ती मरीजों का ज्यादा बुरा हाल है।
इन विभागों में बिस्तर से कहीं ज्यादा मरीज भर्ती हैं। मेडिसिन विभाग में ही डेंगू मरीज भर्ती होते हैं।
इस वर्ष सबसे अधिक डेंगू मरीजों की पुष्टि और डेंगू से संभावित मौत भी इसी अस्पताल में हुई है।
आपातकालीन विभाग पर भी पड़ा असर
गांधी जयंती पर राष्ट्रीय अवकाश होने की वजह से बुधवार को ओपीडी सेवा तो बंद थी लेकिन आपातकालीन विभाग में इलाज कराने आने वाले मरीजों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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कुछ वरिष्ठ चिकित्सकों को आपातकालीन विभाग में ड्यूटी लगाई गई थी, लेकिन ज्यादातर मरीजों को मंगोलपुरी स्थित संजय गांधी मेमोरियल और पीतमपुरा स्थित भगवान महावीर अस्पताल भेज दिया गया।
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इसकी वजह भी लोक नायक अस्पताल वाली ही है। इस बीच मरीजों के लिए परेशानी ही परेशानी है।
डॉक्टर के साथ दुर्व्यवहार करने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम इनकी मांगें है।
बुधवार को गांधी जयंती की वजह से ओपीडी सेवा तो बंद थी, लेकिन आपातकालीन विभाग में इलाज के लिए भी मरीजों को इंतजार करना पड़ा।
आरोपियों की गिरफ्तारी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने के बाद ही हड़ताल से लौटने की जिद पर रेजिडेंट डॉक्टर अड़े हैं।
पुलिस ने सरकारी काम में बाधा पहुंचाने सहित कुछ अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मंगलवार रात अंबेडकर अस्पताल के मेडिसिन विभाग में भर्ती डेंगू संभावित शाहाबाद दौलतपुर गांव की रहने वाली जुगरा (36) की मौत हो गई।
महिला के पति राम बाबू ने आरोप लगाया कि चिकित्सकों की लापरवाही की वजह से उनकी मौत हुई है।
इससे नाराज परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात एक रेजिडेंट डॉक्टर के साथ दुर्व्यवहार किया और मारपीट भी की।
इस घटना से आहत दो सौ से अधिक रेजिडेंट डॉक्टरों ने मंगलवार देर रात एक बजे से ही काम काज ठप कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, मरीज जुगरा में प्लेटलेट्स काफी कम थीं।
अस्पताल में प्लेटलेट्स थी नहीं। लिहाजा प्लेटलेट्स के लिए रेड क्रॉस किसी को भेजा गया था। लेकिन खून में आने में वक्त लगा, इसके बावजूद डॉक्टरों ने महिला को बचाने की पूरी कोशिश की, पर बचा नहीं सके।
डेंगू मरीजों की परेशानी बढ़ी
रोहिणी सेक्टर छह स्थित बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर अस्पताल में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से पीडियाट्रिक्स, मेडिसिन, स्त्री और प्रसूति रोग विभाग में भर्ती मरीजों का ज्यादा बुरा हाल है।
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इन विभागों में बिस्तर से कहीं ज्यादा मरीज भर्ती हैं। मेडिसिन विभाग में ही डेंगू मरीज भर्ती होते हैं।
इस वर्ष सबसे अधिक डेंगू मरीजों की पुष्टि और डेंगू से संभावित मौत भी इसी अस्पताल में हुई है।
आपातकालीन विभाग पर भी पड़ा असर
गांधी जयंती पर राष्ट्रीय अवकाश होने की वजह से बुधवार को ओपीडी सेवा तो बंद थी लेकिन आपातकालीन विभाग में इलाज कराने आने वाले मरीजों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
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कुछ वरिष्ठ चिकित्सकों को आपातकालीन विभाग में ड्यूटी लगाई गई थी, लेकिन ज्यादातर मरीजों को मंगोलपुरी स्थित संजय गांधी मेमोरियल और पीतमपुरा स्थित भगवान महावीर अस्पताल भेज दिया गया।