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कैंप ऑफिस का खर्च लेने में आयुक्त फंसे

Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
New Delhi
New Delhi Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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नई दिल्ली। कैंप ऑफिस का खर्च लेने के मामले में दक्षिण नगर निगम के आयुक्त मनीष गुप्ता फंस गए हैं। डीएमसी एक्ट में कैंप ऑफिस के लिए खर्च लेने का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन आयुक्त ने दिल्ली सरकार के नियमों के तहत ऑफिस के लिए खर्च लेना आरंभ कर दिया। स्थाई समिति के अध्यक्ष राजेश गहलोट ने ऑडिट विभाग को जांच करने का आदेश दिया है। दक्षिण नगर निगम की स्थाई समिति की बैठक में विपक्ष के नेता फरहाद सूरी ने आयुक्त मनीष गुप्ता द्वारा कैंप ऑफिस के लिए फंड लेने का मामला उजागर किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने आईएएस और दानिक्स अधिकारियों के लिए कैंप ऑफिस का प्रतिवर्ष सवा लाख रुपये खर्च लेेने का प्रावधान किया था, लेकिन डीएमसी एक्ट की धारा 89 में इस तरह के भत्ते देने की कोई व्यवस्था नहीं है। उन्हें नगर निगम में नियुक्ति के दौरान उसके एक्ट के तहत ही भत्ते लेने का अधिकार है। ऐसे में आयुक्तगैर कानूनी तौर पर कैंप ऑफिस का खर्च ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि नगर निगम के आयुक्त रहे केएस मेहरा भी कैंप ऑफिस का खर्च नहीं लेते थे। उन्होंने उस समय अतिरिक्त आयुक्त रहे मनीष गुप्ता और जनक दिगल को भी कैंप ऑफिस का खर्च लेने की स्वीकृति नहीं दी थी, लेकिन ये दोनों अधिकारी बाद में दिल्ली सरकार से सांठगांठ कर खर्च लेने लगे। उन्होंने सवाल किया कि अगर कैंप ऑफिस का खर्च लेने का प्रावधान है तो फिर उत्तरी नगर निगम और पूर्वी नगर निगम के आयुक्त ये खर्च क्यों नहीं ले रहे। उन्होंने समिति अध्यक्ष से मांग की कि वे मनीष गुप्ता से खर्च की रिकवरी करने की पहल करें। इसके अलावा सीवीओ और सीवीसी से जांच कराई जाए। इसी बीच समिति अध्यक्ष राजेश गहलोट ने मनीष गुप्ता के सुझाव को मानते हुए ऑडिट विभाग को जांच करने के आदेश दे दिए। हालांकि उनके इस फैसले का फरहाद सूरी ने कड़ा विरोध किया।
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कंप्लीशन सर्टिफिकेट देने में हो रहा नुकसान
दक्षिण नगर निगम के ही नह्रीं, अन्य दोनों नगर निगम के अधिकारी मकानों का कंप्लीशन सर्टिफिकेट देने के दौरान काफी कम राशि ले रहे हैं। संबंधित विभाग के अधिकारी सर्कल रेट के बजाए वर्षों पहले तय दरों के अनुसार ही फीस ले रहे हैं। स्थाई समिति की बैठक में विपक्ष के नेता फरहाद सूरी ने इसका खुलासा किया। उन्होंने बताया कि गत वर्ष के दौरान नगर निगम को 64 लाख रुपये का नुकसान हुआ। मामले को गंभीरता से लेते हुए समिति के अध्यक्ष राजेश गहलोट ने अधिकारियों को इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट जारी करने के निर्देश दिए।
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