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यहीं सीखा रघुपति राघव राजा राम
New Delhi
Updated Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
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नई दिल्ली। मैंने गांधीजी का पसंदीदा भजन रघुपति राघव राजा राम यहीं सीखा था। नोबेल पुरस्कार से सम्मानित म्यांमार की लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू की ने लेडी श्रीराम कॉलेज में बिताए अपने दिनों को कुछ इसी तरह से याद किया।
कॉलेज पहुंचीं सू की ने कहा कि मुझे मालूम था कि मैं इस सभागार में जरूर आऊंगी। उन्होंने कहा कि कुछ हद तक खुद को मैं भारत की नागरिक महसूस करती हूं। गौरतलब है कि सू की ने 1964 में लेडी श्रीराम कॉलेज से राजनीति में स्नातक की डिग्री ली थी। कॉलेज ने उन्हें सम्मानित करने का कार्यक्रम रखा था। इस मौके पर मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री शशि थरूर भी मौजूद थे।
वक्तव्य के दौरान उनकी कई बातों पर सभागार कई बार तालियों से गूंजा। 1987 के बाद भारत आईं सू की ने कहा कि काफी समय से यहां आने की इच्छा रही है। कॉलेज आना कुछ-कुछ घर वापसी जैसा ही है। उन्होंने कहा कि म्यांमार को लोकतंत्र की ओर आगे बढ़ाने के लिए भारत की मदद की जरूरत है।
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छात्रों को मंत्र देते हुए सू की ने कहा कि सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए क्योंकि सिद्धांतहीन राजनीति बहुत खतरनाक होती है। उधर, कॉलेज के बाहर एएम एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स के साथ कुछ संस्थाओं ने संयुक्त रूप से उनका विरोध किया। बर्मा में रोहिनगंयास की बेरहमी से हत्या के विरोध में उन्हें तख्ती दिखाई गई। पुलिस ने विरोध कर रहे लोगों को हिरासत में लेकर बाद में छोड़ दिया।
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कॉलेज पहुंचीं सू की ने कहा कि मुझे मालूम था कि मैं इस सभागार में जरूर आऊंगी। उन्होंने कहा कि कुछ हद तक खुद को मैं भारत की नागरिक महसूस करती हूं। गौरतलब है कि सू की ने 1964 में लेडी श्रीराम कॉलेज से राजनीति में स्नातक की डिग्री ली थी। कॉलेज ने उन्हें सम्मानित करने का कार्यक्रम रखा था। इस मौके पर मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री शशि थरूर भी मौजूद थे।
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वक्तव्य के दौरान उनकी कई बातों पर सभागार कई बार तालियों से गूंजा। 1987 के बाद भारत आईं सू की ने कहा कि काफी समय से यहां आने की इच्छा रही है। कॉलेज आना कुछ-कुछ घर वापसी जैसा ही है। उन्होंने कहा कि म्यांमार को लोकतंत्र की ओर आगे बढ़ाने के लिए भारत की मदद की जरूरत है।
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छात्रों को मंत्र देते हुए सू की ने कहा कि सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए क्योंकि सिद्धांतहीन राजनीति बहुत खतरनाक होती है। उधर, कॉलेज के बाहर एएम एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स के साथ कुछ संस्थाओं ने संयुक्त रूप से उनका विरोध किया। बर्मा में रोहिनगंयास की बेरहमी से हत्या के विरोध में उन्हें तख्ती दिखाई गई। पुलिस ने विरोध कर रहे लोगों को हिरासत में लेकर बाद में छोड़ दिया।