{"_id":"137-27401","slug":"New-Delhi-27401-137","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुतुब फेस्टिवल में हरिहरन के संगीत ने मन मोहा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुतुब फेस्टिवल में हरिहरन के संगीत ने मन मोहा
New Delhi
Updated Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
नई दिल्ली। कुतुब फेस्टिवल के दूसरे दिन फ्यूजन संगीत ने श्रोताओं का दिल जीत लिया। संगीतज्ञ हरिहरन ने अपनी सुरीली आवाज से श्रोताओं को संगीत से सराबोर कर दिया।
कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग (दिल्ली सरकार) और पंजाबी अकादमी की ओर से आयोजित फेस्टिवल में हरिहरन ने सुरीली आवाज से संगीत की जो अनुगूंज पैदा की, वह श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर गई। पंजाबी अकादमी के सचिव रवैल सिंह ने कहा कि श्रोताओं की बढ़ती भीड़ इस बात का सबूत है कि लोगों में संगीत की दीवानागी कम नहीं है।
हरिहरन तमिल, हिंदी, मलयालम, कन्नड़, मराठी, भोजपुरी और तेलुगु फिल्मों के लिए गाते रहे हैं। उनकी प्रस्तुति में यूं ही चला चल, तू ही रे, कभी मैं कहूं, चंदा रे चंदा रे, बाहों के दरम्यां गीत शामिल रहे। उन्होंने कहा कि दिल्ली के लोग हमेशा पसंद रहे हैं क्योंकि उनमें संगीत का प्रेम देखते ही बनता है। शनिवार को गायिका श्रेया घोषाल अपनी आवाज का जादू बिखेरेंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग (दिल्ली सरकार) और पंजाबी अकादमी की ओर से आयोजित फेस्टिवल में हरिहरन ने सुरीली आवाज से संगीत की जो अनुगूंज पैदा की, वह श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर गई। पंजाबी अकादमी के सचिव रवैल सिंह ने कहा कि श्रोताओं की बढ़ती भीड़ इस बात का सबूत है कि लोगों में संगीत की दीवानागी कम नहीं है।
विज्ञापन
हरिहरन तमिल, हिंदी, मलयालम, कन्नड़, मराठी, भोजपुरी और तेलुगु फिल्मों के लिए गाते रहे हैं। उनकी प्रस्तुति में यूं ही चला चल, तू ही रे, कभी मैं कहूं, चंदा रे चंदा रे, बाहों के दरम्यां गीत शामिल रहे। उन्होंने कहा कि दिल्ली के लोग हमेशा पसंद रहे हैं क्योंकि उनमें संगीत का प्रेम देखते ही बनता है। शनिवार को गायिका श्रेया घोषाल अपनी आवाज का जादू बिखेरेंगी।
विज्ञापन