नेता में क्वालिटी व विजन होना आवश्यक

New Delhi Updated Thu, 15 Nov 2012 12:00 PM IST
नई दिल्ली। चाचा नेहरू बच्चों में जितने प्रिय और पसंदीदा थे, उतने ही आम लोगों में भी अच्छे नेता के रूप में प्रसिद्ध थे। जवाहर लाल नेहरू में वे सभी गुण थे, जोकि एक नेता में होने आवश्यक हैं। नेहरू में नेतृत्व की विशेषता और दूरदर्शिता थी। उसी की बदौलत वे एक बड़े नेता के रूप में आज भी याद किए जाते हैं। यह कहना है पूर्व राष्ट्रपति डा. एपीजे अब्दुल कलाम का जो बुधवार को बाल दिवस के मौके पर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे।
जेएनयू में बाल दिवस पर आयोजित नेहरू मेमोरियल लेक्चर में डॉ. कलाम ‘राष्ट्रीय विकास की गतिशीलता’ विषय पर अपने विचार रख रहे थे। यह कार्यक्रम कनवेंशन सेंटर में आयोजित किया गया।
पूर्व राष्ट्रपति का कहना था कि असफलता और सफलता तो साथ ही चलती हैं, लेकिन एक नेता के रूप में असफलता के आगे सफलता को कैसे बढ़ाना है, इसकी जानकारी होनी चाहिए। इसके अलावा काम में पारदर्शिता भी आवश्यक है। देश के विकास में केंद्र और राज्यों का सहयोग जरूरी है। दोनों की ही अपनी ताकत होती है, जिसके मिलने से देश आगे बढ़ता है। जनसंख्या बढ़ने के साथ नेता और अधिकारियों को इस ओर भी ध्यान देना चाहिए कि उनकी बेहतरी के लिए किस प्रकार की योजनाएं बनाई जाएं। कृषि, उद्योग, शिक्षा व तकनीकी शिक्षा और रोजगार पर अधिक से अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। डॉ. कलाम ने खचाखच भरे हॉल में छात्रों से आह्वान करते हुए कहा कि उन्हें अपने जीवन में चाचा नेहरू की शिक्षाओं को ढालते हुए उनके बताए मार्ग पर चलना चाहिए। इससे पहले कुलपति प्रो. एस के सोपोरी ने डॉ. कलाम का अभिवादन करते हुए चाचा नेहरू के जीवन पर प्रकाश डाला।

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एक हॉल में लेक्चरर तो दूसरे पर देखा लाइव
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के लाल दुर्ग में जहां दिन में खामोशी पसरी रहती है, वहीं आज नजारा कुछ जुदा था। हर कोई कनवेंशन सेंटर की और बढ़ा जा रहा था। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की एक झलक देखने को। छात्रों को रोकने के लिए चप्पे-चप्पे पर जेएनयू के सिक्योरिटी गार्ड मौजूद थे। जब देखने की हसरत का जोश बढ़ा तो प्रबंधन ने आनन-फानन में एक बड़ी स्क्रीन का इंतजाम दूसरे हॉल में करके सबकी उम्मीदों को पूरा कर दिया। कनवेंशन हाल के ओडी नंबर एक में जेएनयू के दिग्गज डॉ. कलाम को देखने और सुनने को दोपहर दो बजे ही जुटने शुरू हो गए थे, लेकिन चार बजे तक सात सौ सीटर हाल में डेढ़ हजार से अधिक बुद्धिजीवी जमा हो चुके थे। हाल के बाहर कान लगाकर भी सुनने वालों की कमी नहीं थी। वहीं ओडी नंबर दो में लगभग एक हजार से अधिक छात्र सांस रोके डा. कलाम की शिक्षाओं को जीवन में उतारने का प्रण ले रहे थे। जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष लेनिन भी शामिल थे।

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