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पुलिस से ‘जंग’ के लिए सिपाही ने छोड़ी नौकरी
New Delhi
Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
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अलीगढ़। पुलिस किसी की सगी नहीं है, यह कहावत अक्सर सही साबित होती दिखती है। ऐसा ही हुआ दिल्ली पुलिस के एक सिपाही के साथ। जिसे जानलेवा हमले के मुकदमे में पुलिस स्तर से न्याय मिलना तो दूर उल्टा उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया। उसकी दलीलों पर आईजी-डीआईजी ने सीओ और एएसपी स्तर के अधिकारियों से जांच कराई। अधिकारियों ने दलीलें सही पाईं, मगर मुकदमे के विवेचक रहे थानेदारों ने वरिष्ठ अधिकारियों की जांच रिपोर्ट को दरकिनार करते हुए कोई कार्रवाई नहीं की। अब सिपाही पुलिस की इस कार्यशैली से रुष्ट होकर नौकरी से इस्तीफा दे चुका है और न्याय न मिलने पर आत्मदाह करने तक का मन बनाए बैठा है। यह कहानी है टप्पल के गांव गौरोला निवासी दिल्ली पुलिस के सिपाही राजेंद्र सिंह की। 25 साल सेवा कर चुके राजेंद्र ने दो माह पहले नौकरी से इस्तीफा दे दिया। वह इस्तीफे की वजह बताता है कि दिसंबर 2011 में उस पर गांव की रंजिश में हमला हुआ। हमले में वह और पत्नी घायल हुए। उस समय ग्रामीणों की मदद से एक आरोपी से पिस्टल बरामद कर ली, जो बाद में पुलिस को दी गई। मुकदमा भी दर्ज हुआ। विवेचना में आरोपियों को बचाने का प्रयास हुआ तो उसने डीआईजी से गुहार लगाई। इस पर डीआईजी ने सीओ हाथरस जेआर जोशी से जांच कराई। सीओ ने अपनी जांच में पाया कि दो-दो विवेचक नरेंद्र यादव व रनवीर खंगवाल ने आरोपियों को बचाने का साज किया है।
सीओ ने दोनों विवेचकों के खिलाफ प्रारंभिक जांच की संस्तुति की। इस पर डीआईजी ने जांच एटा के पिलुआ एसओ को सौंप दी। मगर वहां भी न्याय मिलने के बजाय आरोपियों को बचाने का प्रयास हुआ। फिर वह आईजी से मिले। आईजी ने एएसपी एटा से जांच कराई तो उन्होंने भी विवेचकों द्वारा विवेचना में आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया। इस पर आईजी के निर्देश पर फरदर जांच के निर्देश एसएसपी अलीगढ़ को दिए गए। एसएसपी के सामने राजेंद्र पहुंचा तो उसने कहा कि एसओ चंडौस से इसकी जांच करा ली जाए। राजेंद्र के अनुसार एसएसपी ने एसओ चंडौस को जांच के निर्देश दिए हैं। मगर उनके कार्यालय से आज तक जांच का आदेश थाने नहीं भेजा गया है, जबकि संबंधित दरोगा उसे टहला रहा है। इसे लेकर शुक्रवार को भी वह एसएसपी से मिलने पहुंचा, मगर कप्तान से मुलाकात नहीं हुई। इसे लेकर राजेंद्र ने कहा है कि उसने पुलिस की कार्यशैली से तंग आकर सिर्फ पुलिस से लड़ने के लिए नौकरी छोड़ी है। अब उसे न्याय न मिला तो वह आत्मदाह से भी पीछे नहीं हटेगा।
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सीओ ने दोनों विवेचकों के खिलाफ प्रारंभिक जांच की संस्तुति की। इस पर डीआईजी ने जांच एटा के पिलुआ एसओ को सौंप दी। मगर वहां भी न्याय मिलने के बजाय आरोपियों को बचाने का प्रयास हुआ। फिर वह आईजी से मिले। आईजी ने एएसपी एटा से जांच कराई तो उन्होंने भी विवेचकों द्वारा विवेचना में आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया। इस पर आईजी के निर्देश पर फरदर जांच के निर्देश एसएसपी अलीगढ़ को दिए गए। एसएसपी के सामने राजेंद्र पहुंचा तो उसने कहा कि एसओ चंडौस से इसकी जांच करा ली जाए। राजेंद्र के अनुसार एसएसपी ने एसओ चंडौस को जांच के निर्देश दिए हैं। मगर उनके कार्यालय से आज तक जांच का आदेश थाने नहीं भेजा गया है, जबकि संबंधित दरोगा उसे टहला रहा है। इसे लेकर शुक्रवार को भी वह एसएसपी से मिलने पहुंचा, मगर कप्तान से मुलाकात नहीं हुई। इसे लेकर राजेंद्र ने कहा है कि उसने पुलिस की कार्यशैली से तंग आकर सिर्फ पुलिस से लड़ने के लिए नौकरी छोड़ी है। अब उसे न्याय न मिला तो वह आत्मदाह से भी पीछे नहीं हटेगा।
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