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विश्व पुस्तक मेले में दूसरे दिन एक लाख से ज्यादा लोग पहुंचे
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प्रगति मैदान में चल रहे 28वें विश्व पुस्तक मेले के दूसरे दिन लेखक एवं साहित्य मंच पर बॉलीवुड के मश?
- फोटो : Ashram
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नई दिल्ली। प्रगति मैदान में लगे विश्व पुस्तक मेले में दूसरे दिन रविवार को छुट्टी का दिन होने के कारण एक लाख से ज्यादा लोग पहुंचे। हिंदी प्रकाशनों के बुक स्टॉल्स पर सबसे ज्यादा भीड़ देखने को मिली। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास में हिंदी विभाग के संपादक पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि हिंदी और देश की दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं की पुस्तकों और प्रकाशकों के लिए यह बेहद सुखद खबर है। उन्होंने कहा कि हिंदी पुस्तकों के पाठक नागार्जुन और मुंशी प्रेमचंद से लेकर नए लेखकों की पुस्तकें पसंद कर रहे हैं।
शनिवार को पहले दिन ही यहां पर अच्छी खासी भीड़ पहुंच गई थी, जिससे मेला आयोजकों को इस बात का अंदाजा लग गया था कि रविवार को भीड़ और बढ़ेगी। रविवार को लोग ट्रॉली बैग लेकर पुस्तकें खरीदने पहुंचे। लोगों ने बताया कि पुस्तकेें जीवनभर इंसान का साथ देती हैं। इनके बिना जीवन अंधकार लगने लगता है। दूसरी तरफ बाल मंडप में भी भीड़ रही, यहां तो स्कूल जैसा माहौल रहा। छोटे बच्चों को नि:शुल्क काउंसलिंग दी जा रही है।
साबरमती आश्रम जैसी दिखती है थीम मंडप
पुस्तक मेले की थीम मंडप साबरमती आश्रम जैसी दिखती है। बस उसे आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करके शानदार रूप प्रदान कर दिया गया है। यहां गांधी जी का चरखा, चश्मा, घड़ी, कलम, लाठी, बुक स्टैंड और भागवत गीता भी रखी गई है। इसके अलावा थीम मंडप में देेश के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े चलचित्रों को पुस्तक प्रेमियों के बीच प्रस्तुत किया जा रहा है।
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मेले में बेहद खास
-पुस्तक मेले के बाल मंडप में टाटा ट्रस्ट की ओर से दुनियाभर की सर्वश्रेष्ठ बाल पुस्तकों की सूची प्रदर्शित की गई है, जिसे बच्चों के माता-पिता को नि:शुल्क प्रदान किया जा रहा है।
-बाल पुस्तक मेले में डिजनी थीम पर बच्चों के लिए गैजेट्स और डिजिटल बुक्स उपलब्ध हैं। यहां कई निजी प्रकाशकों की बेहतरीन पुस्तकें इस बार आई हैं।
-बॉलीवुड अभिनेता प्रेम चोपड़ा की आत्मकथा का लोकार्पण हुआ। इस दौरान प्रेम चोपड़ा मौजूद रहे। यह पुस्तक प्रेम चोपड़ा की बेटी रकिता नंदा ने लिखी है, जिसे यश पब्लिकेशन ने प्रकाशित किया है।
-प्रभात प्रकाशन के स्टॉल पर 300 से ज्यादा महापुरुषों की जीवनी उपलब्ध हैं। बकुल बख्शी की लिखी पुस्तक ‘चाणक्य’ और आशुतोष राणा की ‘मौन मुस्कान’ बेहद पसंद की जा रही है।
-राजकमल के बुक स्टॉल पर रैमॉन मैग्सेसे अवॉर्ड-2019 से सम्मानित रवीश कुमार की पुस्तक ‘बोलना ही है’ का लोकार्पण किया गया।
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शनिवार को पहले दिन ही यहां पर अच्छी खासी भीड़ पहुंच गई थी, जिससे मेला आयोजकों को इस बात का अंदाजा लग गया था कि रविवार को भीड़ और बढ़ेगी। रविवार को लोग ट्रॉली बैग लेकर पुस्तकें खरीदने पहुंचे। लोगों ने बताया कि पुस्तकेें जीवनभर इंसान का साथ देती हैं। इनके बिना जीवन अंधकार लगने लगता है। दूसरी तरफ बाल मंडप में भी भीड़ रही, यहां तो स्कूल जैसा माहौल रहा। छोटे बच्चों को नि:शुल्क काउंसलिंग दी जा रही है।
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साबरमती आश्रम जैसी दिखती है थीम मंडप
पुस्तक मेले की थीम मंडप साबरमती आश्रम जैसी दिखती है। बस उसे आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करके शानदार रूप प्रदान कर दिया गया है। यहां गांधी जी का चरखा, चश्मा, घड़ी, कलम, लाठी, बुक स्टैंड और भागवत गीता भी रखी गई है। इसके अलावा थीम मंडप में देेश के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े चलचित्रों को पुस्तक प्रेमियों के बीच प्रस्तुत किया जा रहा है।
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मेले में बेहद खास
-पुस्तक मेले के बाल मंडप में टाटा ट्रस्ट की ओर से दुनियाभर की सर्वश्रेष्ठ बाल पुस्तकों की सूची प्रदर्शित की गई है, जिसे बच्चों के माता-पिता को नि:शुल्क प्रदान किया जा रहा है।
-बाल पुस्तक मेले में डिजनी थीम पर बच्चों के लिए गैजेट्स और डिजिटल बुक्स उपलब्ध हैं। यहां कई निजी प्रकाशकों की बेहतरीन पुस्तकें इस बार आई हैं।
-बॉलीवुड अभिनेता प्रेम चोपड़ा की आत्मकथा का लोकार्पण हुआ। इस दौरान प्रेम चोपड़ा मौजूद रहे। यह पुस्तक प्रेम चोपड़ा की बेटी रकिता नंदा ने लिखी है, जिसे यश पब्लिकेशन ने प्रकाशित किया है।
-प्रभात प्रकाशन के स्टॉल पर 300 से ज्यादा महापुरुषों की जीवनी उपलब्ध हैं। बकुल बख्शी की लिखी पुस्तक ‘चाणक्य’ और आशुतोष राणा की ‘मौन मुस्कान’ बेहद पसंद की जा रही है।
-राजकमल के बुक स्टॉल पर रैमॉन मैग्सेसे अवॉर्ड-2019 से सम्मानित रवीश कुमार की पुस्तक ‘बोलना ही है’ का लोकार्पण किया गया।