दिल्ली में ऑक्सीजन संकट: केंद्र के तर्कों से हाईकोर्ट नाराज, अदालत ने कहा- जज आईवरी टावर पर नहीं रहते
केंद्र ने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी से मौत की घटनाओं को लेकर यह तर्क दिया था कि सरकारी अधिकारियों और उनके परिवारों के कोरोना उपचार के लिए सुविधाओं के विशेष आरक्षण के कारण राज्य के संसाधनों का उपयोग नहीं किया गया।
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कोरोना संकट के दौरान में ऑक्सीजन की आपूर्ति में हीलाहवाली को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बार फिर केंद्र सरकार के खिलाफ तल्ख टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि जज आईवरी टावर पर नहीं रहते। उन्होंने भी दूसरी लहर के दौरान दिल्ली एनसीआर की बदहाली देखी है।
बता दें कि केंद्र ने कोरोना के दौरान दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी से मौत की घटनाओं को लेकर यह तर्क दिया था कि सरकारी अधिकारियों और उनके परिवारों के कोरोना उपचार के लिए सुविधाओं के विशेष आरक्षण के कारण राज्य के संसाधनों का उपयोग नहीं किया गया। बुधवार को उच्च न्यायालय ने इस तर्क पर कड़ी असहमति जताते हुए उक्त टिप्पणी की।
वहीं, इस मुद्दे को लेकर उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने यहां तक कहा है कि केंद्र सरकार अब झूठे तर्क देने लगी है। जनता को इनकी लापरवाही और धोखाधड़ी का पता न चल जाए इस डर से केंद्र सरकार जांच से भाग रही है।
उन्होंने साझा किया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार 6 मई को जिस नेशनल टास्कफोर्स का गठन किया उसके लिए 12 टर्म ऑफ रेफरेंस निर्धारित किए गए थे। इनमें से किसी भी बिंदु में ये नहीं लिखा कि ये टास्कफ़ोर्स ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों की जांच करेगी लेकिन स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने झूठ बोलते हुए तर्क दिया है ये टास्क फोर्स और सब ग्रुप ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों की जांच करेगी।
ऑक्सीजन की कमी से मौत पर केंद्र सरकार दे रही झूठे तर्क: उपमुख्यमंत्री
कोरोना महामारी की दूसरी लहर में जिन परिवारों ने अपनों को खो दिया उन्हें अब तक इंसाफ नहीं मिला लेकिन सियासी पार्टियों के बीच यह एक मुद्दा बन चुका है। केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच घूम रहा यह मुद्दा बुधवार को तब और गरमाया जब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया का पत्र दिल्ली सरकार को मिला।
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बताया कि उस पत्र में केंद्रीय मंत्री ने दिल्ली सरकार की जांच से इनकार कर दिया और तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित टास्क फोर्स और सब ग्रुप इस मामले की जांच कर रहे हैं। इसी को लेकर उपमुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार और स्वास्थ्य मंत्री को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि ना तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित टास्क फोर्स और ना ही ऑक्सीजन ऑडिट के लिए राज्यों में गठित सब ग्रुप ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों की जांच कर रही है। इन्हें ऑक्सीजन के आवंटन, आपूर्ति और दवाओं की उपलब्धता के बारे में सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मनीष सिसोदिया ने यहां तक कहा है कि केंद्र सरकार अब झूठे तर्क देने लगी है। जनता को इनकी लापरवाही और धोखाधड़ी का पता न चल जाए इस डर से केंद्र सरकार जांच से भाग रही है।
उन्होंने साझा किया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार 6 मई को जिस नेशनल टास्कफोर्स का गठन किया उसके लिए 12 टर्म ऑफ रेफरेंस निर्धारित किए गए थे। इनमें से किसी भी बिंदु में ये नहीं लिखा कि ये टास्कफ़ोर्स ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों की जांच करेगी लेकिन स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने झूठ बोलते हुए तर्क दिया है ये टास्क फोर्स और सब ग्रुप ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों की जांच करेगी।
अगर टास्क फोर्स कर रही जांच तो क्यों मांगा ब्यौरा?
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार टास्क फोर्स का हवाला दे रही है। अगर यह फोर्स ऑक्सीजन की कमी से मरने वालों की जांच कर रही है तो फिर सभी राज्यों से स्वास्थ्य मंत्रालय ने ब्यौरा क्यों मांगा था। क्यों स्वास्थ्य मंत्रालय ने संसद में सभी सांसदों को जानकारी दी थी कि राज्यों से 13 अगस्त तक इस संदर्भ में जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कहा है।