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जेएनयू: कांट्रेक्ट कर्मियों को तीन महीने से नहीं मिला वेतन
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नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षक संघ एक बार फिर आमने-सामने हैं। शिक्षक संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर कांट्रेक्ट पर कार्य करने वाले सफाई कर्मियों को तीन महीने से वेतन न देने का आरोप लगाया है। शिक्षक संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इन सफाई कर्मियों को तत्काल प्रभाव से वेतन देने की मांग रखी है।
जेएनयू शिक्षक संघ की महासचिव प्रो. मौसमी बसु ने शुक्रवार को कहा कि 36 कांट्रेक्ट कर्मियों को तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। इन पर परिवार को चलाने के लिए आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ये कर्मी माही-मांडवी हॉस्टल के पास वेतन न मिलने को लेकर अपना विरोध दर्ज करवा रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कैंपस में सफाई के लिए निजी कंपनी को कांट्रेक्ट दे रखा है। यह कर्मी पिछले 12 सालों से विश्वविद्यालय में सेवाएं दे रहे हैं।
प्रो. बासु कहती हैं कि वैश्विक महामारी कोविड-19 में लॉकडाउन के दौरान इन कर्मियों ने साफ-सफाई की है। इन फ्रंटलाइन वर्करों को आज वेतन के लिए विरोध दर्ज करना पड़ रहा है। शिक्षक संघ का कहना है कि जेएनयू में स्वामी विवेकानंद की ऑनलाइन प्रतिमा अनावरण का 90 लाख से अधिक खर्च आया है। कई अन्य कार्यक्रमों में लाखों खर्च किए गए हैं, ऐसे में सफाई कर्मियों को वेतन न देना नाइंसाफी है।
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जेएनयू शिक्षक संघ की महासचिव प्रो. मौसमी बसु ने शुक्रवार को कहा कि 36 कांट्रेक्ट कर्मियों को तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। इन पर परिवार को चलाने के लिए आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ये कर्मी माही-मांडवी हॉस्टल के पास वेतन न मिलने को लेकर अपना विरोध दर्ज करवा रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कैंपस में सफाई के लिए निजी कंपनी को कांट्रेक्ट दे रखा है। यह कर्मी पिछले 12 सालों से विश्वविद्यालय में सेवाएं दे रहे हैं।
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प्रो. बासु कहती हैं कि वैश्विक महामारी कोविड-19 में लॉकडाउन के दौरान इन कर्मियों ने साफ-सफाई की है। इन फ्रंटलाइन वर्करों को आज वेतन के लिए विरोध दर्ज करना पड़ रहा है। शिक्षक संघ का कहना है कि जेएनयू में स्वामी विवेकानंद की ऑनलाइन प्रतिमा अनावरण का 90 लाख से अधिक खर्च आया है। कई अन्य कार्यक्रमों में लाखों खर्च किए गए हैं, ऐसे में सफाई कर्मियों को वेतन न देना नाइंसाफी है।
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