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International Women's Day : 106 साल की रामबाई हौसलों को दे रहीं उड़ान, अब भी बुलंद हैं भगवानी देवी के इरादे

Wed, 08 Mar 2023 06:01 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 08 Mar 2023 06:01 AM IST
सार

करीब दो साल पहले शुरू हुआ उनका दौड़ लगाने का सफर अब शीर्ष पर पहुंच गया है। वह पचास से अधिक स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। अब वह इस साल होने वाली अगली प्रतियोगिताओं के लिए तैयारी कर रही हैं। 
 

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International Women's Day: 106 year old Rambai giving flight to spirits
रामबाई और भगवानी देवी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हौसले उम्र के मोहताज नहीं होते, बस उन्हें उड़ान देनी पड़ती है। 106 साल की उड़नपरी रामबाई महिलाओं के लिए एक मिसाल हैं। करीब दो साल पहले शुरू हुआ उनका दौड़ लगाने का सफर अब शीर्ष पर पहुंच गया है। वह पचास से अधिक स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। अब वह इस साल होने वाली अगली प्रतियोगिताओं के लिए तैयारी कर रही हैं। 

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दिल्ली महिला आयोग रामबाई के इसी जज्बे को सलाम करने जा रहा है। आयोग महिला दिवस पर आगामी 11 मार्च को उन्हें सम्मानित करने जा रहा है। जिस उम्र में बुजुर्गों को किसी सहारे की जरूरत होती है उस उम्र में रामबाई 100 मीटर तक दौड़ लगाकर सबको हैरान कर देती हैं। द्वारका निवासी शर्मिला जो कि रामबाई की नातिन हैं, बताती हैं कि नानी अगर बीमार होती हैं तो वह मैदान पर जाकर ठीक हो जाती हैं। हम सब हैरान है कि इतनी ऊर्जा वह कहां से लाती हैं। हमें लगता है कि खेतों में काम करना और वहां इतना चलना उनकी इस कामयाबी का राज है। वह सभी पीढि़यों के लिए खासकर महिलाओं के लिए एक मिसाल है कि कुछ करने की कोई उम्र नहीं होती। यह सोच होना जरूरी है कि महिलाएं कुछ भी कर सकती हैं। 
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हाल ही में वह मिदनापुर, कोलकाता व अलवर में हुई एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 100-100 मीटर की दौड़ लगाकर आई हैं। शर्मिला बताती हैं कि मैंने उन्हें बुजुर्गों के लिए होने वाली प्रतियोगिता में दौड़ाने का मन बनाया था। घरवालों ने मुझे कहा कि इस उम्र में दौड़ लगाना ठीक नहीं है, शरीर को नुकसान होगा और हड्डी टूटने का भी खतरा है लेकिन नानी के जज्बे को देखकर मैंने हिम्मत नहीं हारी। 
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100 मीटर दौड़ में बना चुकी है रिकॉर्ड
रामबाई बीते साल गुजरात के वड़ोदरा में आयोजित राष्ट्रीय ओपन मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 100 मीटर की दौड़ 45.40 सेकेंड में पूरी कर एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। इससे पहले यह रिकॉर्ड 2017 में 101 साल की मान कौर के नाम था। वहीं रामबाई ने इसी प्रतियोगिता में 200 मीटर की दौड़ को 1 मिनट 52.17 सेकेंड में पूरा किया था।

बाईपास सर्जरी के बाद भी इरादे बुलंद हैं भगवानी देवी के 

कहते हैं उम्र जज्बे के आड़े नहीं आती। अगर हौसला हो तो बाईपास सर्जरी और सिर के टांके भी दौड़ लगाने से रोक नहीं पाती हैं। यही चरितार्थ कर रही हैं नजफगढ़ के मलिकपुर गांव की 95 वर्ष की भगवानी देवी। महिलाओं के लिए एक मिसाल और सफलता की नई इबारत  लिख चुकी भगवानी देवी अब इस माह पौलेंड में होने वाली इंडोर मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए तैयार हो रही हैं। दादी के इन कीर्तिमानों में उनके द्रोणाचार्य हैं राजीव गांधी खेल पुरस्कार से सम्मानित पोता विकास डागर।
भगवानी देवी की वर्ष 2007 में बाईपास सर्जरी हुई थी। बावजूद उन्होंने दिसंबर 2021 में परिवार से विभिन्न प्रतियोगिता में खेलने की इच्छा जताई। परिवार ने उनकी उम्र को देखकर शुरुआत में तो मना किया लेकिन उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे सब हार गए। 

भगवानी देवी ने 24.74 सेकंड में पूरी की थी 100 मीटर की दौड़
भगवानी देवी के पोते विकास डागर बताते हैं कि फिनलैंड में आयोजित हुई 90-94 वर्ष आयु वर्ग में वर्ल्ड मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 100 मीटर दौड़ में विश्व चैंपियनशिप और नेशनल रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक व गोला फेंक और डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। 100 मीटर की दौड़ उन्होंने 24.74 सेकेंड में पूरी की जो कि राष्ट्रीय रिकॉर्ड है। 

रोज चार किलोमीटर दौड़ती हैं
फरवरी में कोलकाता में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के समय उनके सिर में पांच टांके थे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 14 से 18 फरवरी तक प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और 23 फरवरी को उनके टांके कटे। अब भगवानी देवी का अगला लक्ष्य पौलेंड में होने वाली प्रतियोगिता है। विकास डागर बताते हैं कि बचपन में उनकी दादी को खेलने का मौका नहीं मिला। लेकिन उनके मन में कहीं खेलने का जज्बा था। वह मुझे खेलता देखती तो अचंभित और रोमांचित होती। तब हमें लगा कि वह खेल सकती हैं। विकास बताते हैं कि इस उम्र में उनकी इच्छा शक्ति गजब की है। हम उन्हें खास ट्रेनिंग नहीं देते बस सुबह शाम तीन से चार किलोमीटर दौड़ती हैं।

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