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Delhi News: वायुजनित अत्याधिक संक्रामक पैथोजन पर आईआईटी में होगा शोध
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-जैव चिकित्सा और चिकित्सीय निदान सहित दूसरे क्षेत्र के लिए बायोसेफ्टी लेवल 3 लैब हुईं स्थापित
- उपकरण तैयार करने और दवा पर शोध की दिशा में होगा काम
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। वायु जनित अत्याधिक संक्रामक पैथोजन (रोगजनक) पर शोध के लिए आईआईटी दिल्ली में जैव सुरक्षा स्तर (बायोसेफ्टी लेवल)-3 अनुसंधान सुविधा की शुरुआत की गई है। सुविधा के उपलब्ध होने से जैव चिकित्सा और चिकित्सीय निदान शोध क्षेत्र की दिशा में काम, नैदानिक उपकरणों और उपचारों पर अनुसंधान किया जा सकेगा। आईआईटी का दावा है कि देश के किसी शैक्षणिक संस्थान में पहली बार इस तरह की पहल की गई है।
आईआईटी दिल्ली के उप निदेशक (संचालन) प्रो. अरविंद नेमा ने बीएसएल-3 अनुसंधान सुविधा का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा, यह नई अनुसंधान और परीक्षण सुविधा चिकित्सा निदान और चिकित्सा विज्ञान में अनुसंधान और नवाचार को सक्षम बनाएगी। स्वास्थ्य सेवा अनुसंधान के क्षेत्र में शिक्षा जगत और उद्योगों की आवश्यकताओं को पूरा करने के आईआईटी दिल्ली के प्रयासों को पूरी करेगी। जिससे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को अत्याधुनिक अनुसंधान करने के लिए एक ही मंच पर ला सकेंगे। इससे एनसीआर और पूरे देश में चिकित्सा संस्थानों के साथ अनुसंधान सहयोग के कई अवसर खुलेंगे।
इस लैब को आईआईटी दिल्ली के केंद्रीय अनुसंधान सुविधा के तहत माइक्रोमॉडल कॉम्प्लेक्स में स्थापित किया गया है। बायोमेडिकल इंजीनियरिंग केंद्र के प्रो. संदीप के. झा ने कहा, आईआईटी दिल्ली में चिकित्सा निदान पारिस्थितिकी तंत्र को एक नया आयाम प्रदान करने पर गर्व है। देश में ऐसी अन्य बीएसएल3 सुविधाओं के विपरीत यह पहली बार होगा जब कोई उपयोगकर्ता अपने चिकित्सा उपकरण को इकाई के अंदर ले जा सकेगा और श्रेणी-3 रोगजनक प्रबंधन में विशेषज्ञता रखने वाले प्रशिक्षित पेशेवरों की देखरेख में उसका परीक्षण कर सकेगा। इससे हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर इंजीनियर सुविधा के भीतर अपने नैदानिक प्लेटफॉर्म की त्रुटियों को ठीक और बेहतर बना सकेंगे।
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आईआईटी दिल्ली के कुसुमा स्कूल ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेज के प्रोफेसर अशोक के.पटेल ने कहा कि इस प्रकार की सहायक प्रविष्टि देश में पहले उपलब्ध नहीं थी। उपकरण बनाने वालों को अपने उत्पाद परीक्षण के लिए विशेष बीएसएल3 और बीएसएल4 प्रयोगशालाओं में भेजने पड़ते थे। जिससे उपकरणों को जल्दी ठीक करने और उनके प्रदर्शन में सुधार करना कठिन हो जाता था।
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- उपकरण तैयार करने और दवा पर शोध की दिशा में होगा काम
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। वायु जनित अत्याधिक संक्रामक पैथोजन (रोगजनक) पर शोध के लिए आईआईटी दिल्ली में जैव सुरक्षा स्तर (बायोसेफ्टी लेवल)-3 अनुसंधान सुविधा की शुरुआत की गई है। सुविधा के उपलब्ध होने से जैव चिकित्सा और चिकित्सीय निदान शोध क्षेत्र की दिशा में काम, नैदानिक उपकरणों और उपचारों पर अनुसंधान किया जा सकेगा। आईआईटी का दावा है कि देश के किसी शैक्षणिक संस्थान में पहली बार इस तरह की पहल की गई है।
आईआईटी दिल्ली के उप निदेशक (संचालन) प्रो. अरविंद नेमा ने बीएसएल-3 अनुसंधान सुविधा का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा, यह नई अनुसंधान और परीक्षण सुविधा चिकित्सा निदान और चिकित्सा विज्ञान में अनुसंधान और नवाचार को सक्षम बनाएगी। स्वास्थ्य सेवा अनुसंधान के क्षेत्र में शिक्षा जगत और उद्योगों की आवश्यकताओं को पूरा करने के आईआईटी दिल्ली के प्रयासों को पूरी करेगी। जिससे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को अत्याधुनिक अनुसंधान करने के लिए एक ही मंच पर ला सकेंगे। इससे एनसीआर और पूरे देश में चिकित्सा संस्थानों के साथ अनुसंधान सहयोग के कई अवसर खुलेंगे।
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इस लैब को आईआईटी दिल्ली के केंद्रीय अनुसंधान सुविधा के तहत माइक्रोमॉडल कॉम्प्लेक्स में स्थापित किया गया है। बायोमेडिकल इंजीनियरिंग केंद्र के प्रो. संदीप के. झा ने कहा, आईआईटी दिल्ली में चिकित्सा निदान पारिस्थितिकी तंत्र को एक नया आयाम प्रदान करने पर गर्व है। देश में ऐसी अन्य बीएसएल3 सुविधाओं के विपरीत यह पहली बार होगा जब कोई उपयोगकर्ता अपने चिकित्सा उपकरण को इकाई के अंदर ले जा सकेगा और श्रेणी-3 रोगजनक प्रबंधन में विशेषज्ञता रखने वाले प्रशिक्षित पेशेवरों की देखरेख में उसका परीक्षण कर सकेगा। इससे हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर इंजीनियर सुविधा के भीतर अपने नैदानिक प्लेटफॉर्म की त्रुटियों को ठीक और बेहतर बना सकेंगे।
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आईआईटी दिल्ली के कुसुमा स्कूल ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेज के प्रोफेसर अशोक के.पटेल ने कहा कि इस प्रकार की सहायक प्रविष्टि देश में पहले उपलब्ध नहीं थी। उपकरण बनाने वालों को अपने उत्पाद परीक्षण के लिए विशेष बीएसएल3 और बीएसएल4 प्रयोगशालाओं में भेजने पड़ते थे। जिससे उपकरणों को जल्दी ठीक करने और उनके प्रदर्शन में सुधार करना कठिन हो जाता था।