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दिल्ली : राजधानी में लावारिस कुत्तों से आम लोगों को होने वाले खतरे को लेकर हाईकोर्ट गंभीर
Fri, 29 Apr 2022 06:27 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 29 Apr 2022 06:27 AM IST
सार
नई दिल्ली पालिका परिषद, दिल्ली छावनी बोर्ड और अन्य संबंधित स्थानीय प्राधिकरणों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
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कुत्ता...
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उच्च न्यायालय ने राजधानी में लावारिस कुत्तों से आम लोगों को खतरे को गंभीरता से लिया है। अदालत ने नई दिल्ली पालिका परिषद, दिल्ली छावनी बोर्ड और अन्य संबंधित स्थानीय प्राधिकरणों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने एसडीएमसी को भी कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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उच्च न्यायालय ने नवंबर 2018 में दक्षिणी दिल्ली नगर निगम क्षेत्र में लावारिस कुत्तों द्वारा पैदा किए गए खतरे संबंधी याचिका का विस्तार करते हुए इसे पूरी दिल्ली में अवारा कुत्तों पर सुनवाई का निर्णय किया है।
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याचिकाकर्ता कांफ्रेंस फॉर ह्यूमन राइट्स (इंडिया) ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और पशु जन्म नियंत्रण (कुत्ते) नियम, 2001 को लागू करने की मांग की है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला की खंडपीठ ने कहा हालांकि याचिकाकर्ता द्वारा उठाई गई शिकायत केवल दक्षिण दिल्ली नगर निगम के क्षेत्र तक सीमित है, हम पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में नियमों के कार्यान्वयन के संबंध में इस मुद्दे की जांच करने के इच्छुक हैं।
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याचिकाकर्ता ने नियमित अंतराल पर कुत्तों की नियमित नसबंदी, टीकाकरण करने के निर्देश देने की मांग की है। अदालत ने इस प्रकार आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए एसडीएमसी के पास उपलब्ध बुनियादी ढांचे और उनके संबंधित क्षेत्रों में लौटने से पहले उनकी नसबंदी के बारे में जानकारी का खुलासा करने की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर को होगी।