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उपराज्यपाल के अधिकार बढ़ाने संबंधी संशोधन को चुनौती याचिका पर जवाब तलब

Tue, 25 May 2021 12:46 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 25 May 2021 12:46 AM IST
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high court seeks response from center on the petition challenging the GNCTD amendment act
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने राजधानी में उपराज्यपाल को असीमित अधिकार प्रदान करने संबंधी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) कानून, 2021 को चुनौती याचिका पर केंद्र व दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में 27 अप्रैल, 2021 को अधिसूचित उक्त संशोधन को असंवैधानिक और अनुच्छेद 14 और 21 के सिद्धांतों का उल्लंघन करने वाला घोषित करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने दोनों पक्षों को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न याचिका स्वीकार कर ली जाए। अदालत ने यह निर्देश नीरज शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया है। याचिका में कहा गया है कि यह संशोधन उच्चतम न्यायालय के फैसले के फैसले के खिलाफ है।
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सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा था कि दिल्ली की चुनी हुई सरकार अपने अधिकार क्षेत्र में सभी निर्णय ले सकती है और एलजी की सहमति प्राप्त किए बिना उन पर अमल कर सकती है।
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याचिकाकर्ता ने कहा फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया है कि एलजी और सरकार के बीच किसी मामले पर मतभेद के मामले में दोनों को इसे सुलझाने के लिए सभी प्रयास करने चाहिए और यदि ऐसा नहीं होता तो इस मामले को किसी फैसले के लिए राष्ट्रपति के पास भेजना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर खंडपीठ ने दो अन्य याचिकाओं पर पहले ही केंद्र व उपराज्यपाल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
याचिका में कहा गया है कि दिल्ली में अधिकारों के मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय की सांविधानिक पीठ ने अनुच्छेद 239 एए की व्याख्या करते हुए कहा कि अनुच्छेद 239 एए का खंड (4) उन मामलों के संबंध में दिल्ली सरकार को स्पष्ट रूप से शक्तियां देता है जिनके लिए विधान सभा को कानून बनाने का अधिकार है। ऐसे में संशोधन अधिनियम इस फैसले का उल्लंघन करता है।

याची ने कहा कोई भी कार्यकारी कार्रवाई करने से पहले उपराज्यपाल की अनिवार्य पूर्व राय मांगने वाला संशोधन अधिनियम अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। इसके अलावा सरकार को परिभाषित करके उपराज्यपाल से मतलब लोकतंत्र के सिद्धांतों, जो शासन करने के लिए लोगों की इच्छा की बात करते हैं, का उल्लंघन किया जा रहा है। लोकतंत्र संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है और इसे किसी भी कीमत पर संशोधित नहीं किया जा सकता।
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