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Hindi News ›   Delhi ›   High Court said Illegal intercept messages cannot be allowed as evidence

हाईकोर्ट ने कहा : अवैध इंटरसेप्ट संदेशों को नहीं दी जा सकती सबूत के रूप में अनुमति

Wed, 19 Jan 2022 05:34 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 19 Jan 2022 05:34 AM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि इससे बढ़ेगी मनमानी, यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन।

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High Court said Illegal intercept messages cannot be allowed as evidence
delhi high court - फोटो : ANI

विस्तार

उच्च न्यायालय ने माना है कि अवैध रूप से इंटरसेप्ट किए गए संदेशों और ऑडियो वार्तालापों को सबूत के रूप में अनुमति देने से        मनमानी बढ़ जाएगी और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के  उल्लंघन को बढ़ावा मिलेगा। अदालत ने भ्रष्टाचार के मामले में एक आरोपी के खिलाफ तय अभियोग आदेश को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की है।

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न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह ने कहा कि टेलीग्राफ अधिनियम की धारा 5 (2) के अनुसार किसी भी सार्वजनिक आपात स्थिति या सार्वजनिक सुरक्षा के हित में कानून के अनुसार अवरोधन का आदेश जारी किया जा सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने पीयूसीएल के मामले में इसे स्पष्ट किया हुआ है।
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अदालत ने जतिंदर पाल सिंह नाम के आरोपी के खिलाफ विशेष सीबीआई न्यायाधीश के 10 साल पुराने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी के तहत अभियोग तय करने संबंधी फैसले को खारिज कर दिया।
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 कोर्ट ने कहा है कि टेलीग्राफ एक्ट के तहत बनाए गए नियमों के नियम 419ए के तहत गृह सचिव द्वारा टेलीफोन पर बातचीत को इंटरसेप्ट करने की अनुमति देने के निर्देश को आदेश पारित होने के सात दिनों के भीतर समीक्षा समिति को अग्रेषित किया जाना है। इस मामले में रिकॉर्ड में कोई सामग्री नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि गृह सचिव के आदेश की कोई समीक्षा की गई।

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