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इस्लाम धर्म अपनाने वाली महिला के खिलाफ कड़ी कार्रवाई पर अगले आदेश तक रोक

Fri, 13 Aug 2021 11:28 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 13 Aug 2021 11:28 PM IST
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high court restrain any strict action against woman adopt Islam
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने अपनी इच्छा से इस्लाम धर्म अपनाने वाली 28 वर्षीय महिला के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई पर अगले आदेेश तक रोक लगा दी है। अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वह जामिया नगर और शाहीन बाग पुलिस स्टेशनों के बीट स्टाफ और एसएचओ के फोन नंबर महिला को उपलब्ध करवाए ताकि वह जरूरत पड़ने पर सुरक्षा के लिए उनसे संपर्क कर सके।
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याची ने तर्क रखा कि उसने 2018 में इस्लाम धर्म अपनाया था। उसे उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधक दस्ते से गिरफ्तारी की आशंका है। उस पर अवैध धर्मांतरण का आरोप लगाया गया है।
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बायो फिजिक्स में स्नातकोत्तर महिला ने आरोप लगाया कि उसे जामिया नागर थाने में आने के लिए मजबूर किया जा रहा है। ऐसे में थानाध्यक्ष को निर्देश दिया जाए कि उसे परेशान करना बंद किया जाए। वहीं दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि उसके खिलाफ थाने द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। उसे यूपी एटीएस से जांच के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करने का अनुरोध प्राप्त हुआ है। इसके अलावा अदालत के आदेश पर महिला को सुरक्षा प्रदान नहीं की जा रही क्योंकि वह अपना पता नहीं बता रही। महिला ने कहा कि गिरफ्तारी की आशंका से वह पुलिस को अपने निवास स्थान पता नहीं बताना चाहती।
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न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने पुलिस की रिपोर्ट व महिला का तर्क सुनने के बाद मामले की सुनवाई 26 अगस्त तय कर दी। अदालत ने कहा कि महिला का पता पूछने की अपेक्षा पुलिस संबंधित थानाध्यक्ष व बीट स्टाफ का फोन नंबर उसे प्रदान करे ताकि जरूरत पड़ने पर वह अपने वकील के जरिये उनसे संपर्क कर सके।
याची महिला ने अधिवक्ता वजीह शफीक के माध्यम से दायर याचिका में अदालत को बताया कि उसने मुफ्ती काजी जहांगीर आलम और मौलाना उमर गौतम की मदद और मार्गदर्शन से बिना किसी दबाव, धमकी, प्रलोभन के दिल्ली में धर्मांतरण किया। आलम और गौतम दोनों को यूपी एटीएस ने जून में दिल्ली से गिरफ्तार किया था।
महिला ने 19 जून को दायर याचिका में कहा, उसे अपने पिता का फोन आया जिसमें उसे बताया गया कि यूपी एटीएस और कुछ स्वयंभू सजग समूह उसे दिल्ली से फोन करने और उसे वापस हिंदू धर्म में बदलने के लिए दबाव बना रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि 27 जून को फोन पर यूपी एटीएस ने भी बड़े पैमाने पर पूछताछ की थी।

दिल्ली पुलिस की कथित कार्रवाइयों के बारे में महिला ने बताया। उसने कहा कि उसके पड़ोसी को 7 जुलाई को जामिया नगर पुलिस ने कथित तौर पर उठाया था और उसे खुद को पुलिस स्टेशन में पेश होने की बात कहने के लिए कहा गया था। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के बायो फिजिक्स विभाग के कर्मचारियों से भी उनके बारे में पूछताछ की गई थी। याची ने कहा उसे जान का खतरा है।
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