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23 जुलाई तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से केवल अत्यावश्यक मामलों की सुनवाई
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नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने वर्तमान कोविड महामारी की स्थिति व डेल्टा वायरस को देखते हुए 23 जुलाई तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से केवल अत्यावश्यक मामलों की सुनवाई जारी रखने का निर्णय किया है। हाईकोर्ट फुल बैंच ने बैठक में यह निर्णय लिया है। उच्च न्यायालय ने सभी पीठों के साथ-साथ रजिस्ट्रार, संयुक्त रजिस्ट्रार (न्यायिक) को वीडियो कांफ्रेंसिंग से मौजूदा व्यवस्थाओं के अनुसार तत्काल मामलों को उठाते रहने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी आदेश के अनुसार अन्य लंबित, गैर-नियमित मामलों को स्थगित कर दिया गया है। अधिसूचना में स्थगित मामलों की तारीखों की भी जानकारी दी गई है। फुल बैंच ने कहा है कि दिल्ली में कोविड मामलों की संख्या में कमी आने के बावजूद महामारी की अनुमानित तीसरी लहर को देखते हुए अत्यंत एहतियात बरती जानी चाहिए। अदालत ने डेल्टा प्लस वेरियंट की चिंता के खतरे में भी सकारात्मक असर देखा।
हाईकोर्ट ने कोविड महामारी के बीच न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और कोर्ट स्टाफ की जान माल की हानि को देखते हुए प्रतीक्षा और निगरानी की नीति अपनाने और सावधानी से कार्य करने का संकल्प लिया। इस साल की शुरुआत में अदालत ने संक्षेप में 15 मार्च से पूर्ण फिजिकल कामकाज फिर से शुरू किया था।
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हालांकि यह स्पष्ट किया कि वर्चुअल सुनवाई अपवाद के रूप में जारी रहेगी न कि आदर्श। विभिन्न शर्तें भी निर्धारित की गई थीं, जिन्हें एक पक्ष द्वारा वर्चुअल सुनवाई की सफलतापूर्वक मांग करने से पहले पूरा किया जाना था। इसी बीच सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद हाईकोर्ट ने नियमित सुनवाई शुरू करने के एक सप्ताह के भीतर वकीलों/पक्षों को इससे पहले वर्चुअल सुनवाई की मांग करने की अनुमति दी।
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हाईकोर्ट रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी आदेश के अनुसार अन्य लंबित, गैर-नियमित मामलों को स्थगित कर दिया गया है। अधिसूचना में स्थगित मामलों की तारीखों की भी जानकारी दी गई है। फुल बैंच ने कहा है कि दिल्ली में कोविड मामलों की संख्या में कमी आने के बावजूद महामारी की अनुमानित तीसरी लहर को देखते हुए अत्यंत एहतियात बरती जानी चाहिए। अदालत ने डेल्टा प्लस वेरियंट की चिंता के खतरे में भी सकारात्मक असर देखा।
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हाईकोर्ट ने कोविड महामारी के बीच न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और कोर्ट स्टाफ की जान माल की हानि को देखते हुए प्रतीक्षा और निगरानी की नीति अपनाने और सावधानी से कार्य करने का संकल्प लिया। इस साल की शुरुआत में अदालत ने संक्षेप में 15 मार्च से पूर्ण फिजिकल कामकाज फिर से शुरू किया था।
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हालांकि यह स्पष्ट किया कि वर्चुअल सुनवाई अपवाद के रूप में जारी रहेगी न कि आदर्श। विभिन्न शर्तें भी निर्धारित की गई थीं, जिन्हें एक पक्ष द्वारा वर्चुअल सुनवाई की सफलतापूर्वक मांग करने से पहले पूरा किया जाना था। इसी बीच सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद हाईकोर्ट ने नियमित सुनवाई शुरू करने के एक सप्ताह के भीतर वकीलों/पक्षों को इससे पहले वर्चुअल सुनवाई की मांग करने की अनुमति दी।