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रिहायशी कालोनी के पास एसटीपी के निर्माण पर एम्स से जवाब तलब

Wed, 10 Feb 2021 12:42 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 10 Feb 2021 12:42 AM IST
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high court issues notice to aiims on the construction of stp
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने गौतम नगर स्थित आवासीय कॉलोनी के पास सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण के खिलाफ दायर याचिका पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में एसटीपी के निर्माण पर रोक लगाने का आग्रह करते हुए तर्क रखा गया है कि यह क्षेत्रीय निवासियों के स्वास्थ्य के लिए खतरा होगा और बदबू पैदा करेगा।
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न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने एम्स को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न याचिका स्वीकार कर ली जाए। अदालत ने मामले की सुनवाई 27 अप्रैल तय की है। याची गौतम नगर रेजीडेंट एसोसिएशन ने अदालत को बताया कि एसटीपी कालोनी से मात्र 30 फुट की दूरी पर है।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि निर्माण कार्य काफी समय से चल रहा है और आप इतनी देरी से अदालत में क्यों आए। याची के अधिवक्ता अजय शर्मा ने अदालत को बताया कि पहले निर्माण कार्य बेसमेंट में चल रहा था और लोगों को इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि हाल ही में जानकारी मिलने पर उन्होंने संबंधित अथोरिटी को ज्ञापन देकर आपत्ति जताई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
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उन्होंने कहा कि एसटीपी नवनिर्मित राज कुमारी अमृत कौर ओपीडी के पास बनाया जा रहा है और यह गौतम नगर और एम्स को विभाजित करने वाली सड़क से सटा हुआ है। आवासीय क्षेत्र के पास एसटीपी की स्थापना क्षेत्र में रहने वाले निवासियों के स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक है। इससे श्वसन और त्वचा रोगों के लिए संभावनाओं की वृद्धि होगी।
इतना ही नहीं इसे क्षेत्रीय निवासियों में चिड़चिड़ापन और मूडी होने का खतरा होने के अलावा गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल का खतरा अधिक होता है। अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र से उत्पन्न रोगजनक वायुजनित सूक्ष्मजीवों के प्रसार का भी खतरा है। रिहायशी इलाके में एसटीपी की स्थापना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदान मौलिक अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है।

ऐेसे में कालोनी में रहने वाले करीब 20 हजार लोगों के भविष्य को देखते हुए निर्माण पर रोक लगाई जाए। वहीं एम्स की ओर से पेश अधिवक्ता सत्य राजन स्वामी ने याचिका पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह समय से पहले दायर की गई है। उन्हें एसोसिएशन का ज्ञापन मिला है और उसका जवाब तैयार कर लिया गया है, संबंधित अथोरिटी की मंजूरी के बाद यह याची को भेजा जाएगा।
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