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करंट से मौत मामले में बीएसईएस राजधानी लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया

Thu, 21 Jan 2021 12:02 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 21 Jan 2021 12:02 AM IST
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high court held bses guilty of negligence in a case electrocution
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने बिजली का करंट लगने से 23 वर्षीय युवक की मौत मामले में लापरवाही के लिए बीएसईएस को जिम्मेदार ठहराया है। अदालत ने युवक की मौत पर बीएसईएस राजधानी व रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को संयुक्त रूप से मृतक के माता-पिता को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। घटना वर्ष 2007 कालका जी इलाके की है।
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न्यायमूर्ति जयंत नाथ ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि इलाके में बिजली सप्लाई करने वाली कंपनी करंट से मौत की जिम्मेदार मानी जाएगी। मृतक के इलाके में बीएसईएस बिजली सप्लाई करती है ऐेसे में लापरवाही के लिए वह जिम्मेदार है। अदालत ने बिजली कंपनी के उस तर्क को खारिज कर दिया कि याची ने मुआवजे के लिए 12 वर्ष बाद याचिका दायर की है ऐसे में याचिका विचार योग्य नहीं है।
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अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मृतक इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी से स्नातक कर रहा था। स्नातक करने के बाद वह कम से कम 10 से 15 हजार रुपये प्रति माह आय अर्जित करता। अदालत ने कहा कि पूरे तथ्यों से स्पष्ट है कि बिजली कंपनी के खुले तार छोड़ने के कारण ही करंट लगने से युवक की मौत हुई।
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अदालत ने कहा कि पुलिस की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि 16 मई 2007 को युवक मिंटू कुमार झा साइकिल पर जा रहा था। रात में बारिश होने के कारण खुले बिजली के तारों में करंट आ गया और उसकी चपेट में आने से मिंटू की मौत हुई। ऐसे में मृतक की मां मुआवजा पाने की हकदार है।
अदालत ने कहा कि सभी तथ्य देखने के बाद वे युवक की लापरवाही से मौत के लिए बीएसईएस राजधानी कंपनी को जिम्मेदार ठहराते है। अदालत ने उसे व संबंधित बीमा कंपनी रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश दिया कि वे संयुक्त रूप से तीन माह में10 लाख रुपये का मुआवजा अदा करें।
अदालत ने यह फैसला मृतक की मां मुन्नी देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। बिहार दरभंगा निवासी मुन्नी देवी ने तर्क रखा था कि उनके पति लेबर का काम करते हैं और उनकी आय मात्र चार हजार रुपये प्रति माह है। वहीं उनका बेटा मिंटू पढ़ाई के साथ प्राईवेट काम करता था जिससे घर का गुजारा होता था।

उन्होंने कहा कि मिंटू की मौत के बाद उसका भाई सोनू झा अवसाद में आ गया और उसकी भी 27 अक्टूबर 2010 को मौत हो गई। इस हादसे के कारण उसे दो पुत्रों को खोना पड़ा। ऐसे में उन्हें 30 लाख रुपये मुआवजा दिलवाया जाए।
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