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भारत में बच्चे को गोद लेने वाले अमेरिकी ईसाई दंपती को सुरक्षा प्रदान

Fri, 19 Mar 2021 12:17 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 19 Mar 2021 12:17 AM IST
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high court directs authorities not to take coercive action against couple who adopted orphan
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने वर्ष 2014 में भारत में बच्चे को गोद लेने वाले अमेरिका स्थित एक भारतीय ईसाई दंपति को सुरक्षा प्रदान की है। याची ने अपने खिलाफ हिंदू एडोप्शन एवं मेनटीनेंस अधिनियम 1956 के तहत कानूनी कार्रवाई की आशंका जताई है। अदालत ने केंद्र व सेंट्रल एडोप्शन रिसोर्स अथारिटी (कारा) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि 2016 में किशोर न्याय मॉडल नियमों के लागू होने से पहले, ईसाई माता-पिता द्वारा बच्चे को गोद लेने में सक्षम कोई कानून नहीं था।
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याचिकाकर्ता के वकील द्वारा पेश तर्कों को स्वीकार करते हुए अदालत ने कहा कि ईसाई बच्चे को गोद लेने में सक्षम बनाने के लिए एक तंत्र होना चाहिए। याचिका में अत्यधिक महत्व का मुद्दा उठाया गया है। यह किशोर न्याय (देखभाल और बच्चों की सुरक्षा) मॉडल नियमों के लागू होने से पहले किए गए गोद लेने की प्रक्रिया के संबंध में एक कानूनी मुद्दा है।
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अदालत ने कहा ऐसे मामलों में बच्चे का कल्याण सर्वोपरि है और कारा द्वारा एनओसी रद करने की वैधता की जांच अदालत द्वारा की जानी जरूरी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं, बच्चे, उनके रिश्तेदारों के खिलाफ कोई भी ठोस कार्रवाई न की जाए। अदालत ने मामले की सुनवाई 22 अप्रैल तय की है।
पेश मामले के अनुसार याची ने दिसंबर 2014 को पंजाब के फिरोजपुर जिले में बच्चे को गोद लिया था और कारा से बच्चे का पासपोर्ट बनाने के लिए अनापत्तिपत्र मांगा था। कारा ने उनके आवेदन को खारिज कर उनके व गोद लेने की प्रक्रिया में सहायता करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का नोटिस जारी कर दिया। वर्तमान में बच्चा व उसे गोद लेने वाले माता-पिता केरल में रह रहे हैं।

फिरोजपुर अदालत ने भी गोद प्रक्रिया को गलत ठहराया था। याची के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि बच्चे केे गोद लेने के बाद पंजीकरण करवाया गया था। ऐसे में उसे गैरकानूनी नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि बच्चा उनके मुवक्किलों के साथ खुशी से रह रहा है।
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