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लॉकडाउन में किराया माफी को लेकर छात्रों का हल्लाबोल, सोशल मीडिया पर मिला अनुराग कश्यप का साथ

Fri, 17 Apr 2020 11:28 PM IST
Trainee Trainee अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Trainee Trainee Updated Fri, 17 Apr 2020 11:28 PM IST
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Hashtag no rent for students campaign on Twitter director Anurag Kashyap comes on support
सोशल मीडिया - फोटो : ट्विटर

कोरोना के खिलाफ छिड़ी जंग को जीतने के लिए सभी काम धंधे ठप पड़े हैं। ऐसे वक्त में गरीब व मध्यम वर्गीय परिवारों के बेरोजगार छात्रों के लिए लॉकडाउन विपदा से कम नहीं है। जो छात्र अपने घर से दूर शहर में किराये के कमरों में रहकर नौकरी ढूंढ रहे हैं, उनमें से कइयों के लिए अपने कमरे का किराया भर पाना संभव नहीं है।

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ऐसे में युवा-हल्लाबोल आंदोलन ने ट्विटर पर हैस टैग नो रेंट फॉर स्टूडेंट्स मुहिम की शुरुआत की है। जिसको देश भर के छात्रों का जोरदार समर्थन मिल रहा है। इस मुहिम में छात्रों के अलावा शिक्षकों, पत्रकारों, कलाकारों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया है।
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यह मुहिम ट्विटर पर 25 हजार से भी ज्यादा ट्वीट्स के साथ दो बार ट्रेंड कर चुकी है। छात्रों, बेरोजगार युवाओं और उनके प्रति संवेदना रखने वाले हजारों नागरिकों ने किराया माफी की मांग का समर्थन किया है।
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ट्विटर पर सशक्त रूप से सक्रिय रहने वाले बॉलीवुड के जानेमाने डायरेक्टर प्रोड्यूसर अनुराग कश्यप और रेडियो जॉकी शायमा ने भी छात्रों की इस मुहिम का समर्थन किया है। इसके अलावा इस मुहिम के लिए जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर 9810408888 पर लगातार छात्रों के कॉल आ रहे हैं।

ट्विटर पर चल रहा कैम्पेन

ट्विटर पर सफल कैम्पेन चलाने के अलावा युवा-हल्लाबोल ने चेंज डॉट ओआरजी के माध्यम से एक ऑनलाइन पेटिशन की शुरुआत भी की है। इस मुहिम की शुरुआत करने वाले रजत यादव ने बताया कि अब तक ढाई हजार से ज्यादा लोगों ने पेटिशन पर हस्ताक्षर कर दिया है।

युवा-हल्लाबोल का नेतृत्व कर रहे अनुपम ने कहा है कि केंद्र सरकार जल्द से जल्द सभी राज्यों और जिला प्रशासनों को आदेश दे कि ऐसे व्यथित छात्रों का किराया तुरंत माफ किया जाए।

उन्होंने याद दिलाया कि गृह मंत्रालय ने 29 मार्च के एक आदेश में पहले ही कहा है कि कोई भी मकान मालिक अपने किरायेदार को लॉकडाउन के दौरान निकाल नहीं सकता है।

इसका मतलब ये हुआ कि असमर्थ किरायेदार अगर पैसे न दे पाएं तो भी मकान मालिक उन्हें निकाल नहीं सकता। ऐसे में अगर स्पष्ट शब्दों में किराया माफी का आदेश नहीं आता तो मकान मालिक और किरायेदार के बीच असमंजस और कई मामलों में झड़प की स्थिति बन सकती है।

अनुपम ने ये भी कहा कि केंद्र सरकार चाहे तो एक रेंट माफी फंड बना सकती है। जिससे उन छोटे मकान मालिकों को भी मदद दी जा सकेगी, जिनके लिए मकान का किराया ही उनके गुजारे का एक मात्र साधन है। 

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