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फर्जी दस्तावेज पर क्रेडिट कार्ड बनवा बैंकों से फर्जीवाड़ा, चार दंपती गिरफ्तार

Sun, 08 Nov 2020 01:15 AM IST
नोएडा ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: नोएडा ब्यूरो Updated Sun, 08 Nov 2020 01:15 AM IST
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Four couple arrested in credit card fraud
फर्जीवाड़े का सामान... - फोटो : amar ujala

आर्थिक अपराध शाखा ने फर्जी नाम और पते पर क्रेडिट कार्ड बनाकर बैंकों को करोड़ों का नुकसान पहुंचाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। मामले में चार दंपती को गिरफ्तार किया गया है। आठों आरोपी अलग-अलग नाम से फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र बनवाकर 13 बैंकों में खाते खोलकर ठगी कर रहे थे। इनके कब्जे से 63 क्रेडिट कार्ड, 83 चेक बुक, दो स्वैप मशीन और 15 मोबाइल फोन, 14 लाख रुपये और लाखों के आभूषण बरामद हुए हैं। जांच में पता चला है कि आठों के बैंक खातों में करीब 50 लाख रुपये जमा हैं। आरोपी एक वर्ष से ठगी कर रहे थे। उन्होंने करोड़ों की प्रॉपर्टी खरीद रखी है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। आरोपियों की पहचान मनीष क्षत्रिय व उसकी पत्नी, अजय क्षत्रिय व उसकी पत्नी, कंवल राज व उसकी पत्नी और अरुण शर्मा व उसकी पत्नी के रूप में हुई। जांच में पता चला कि मनीष गिरोह का सरगना है।

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शाखा के संयुक्त आयुक्त ओ पी मिश्रा ने बताया कि सिटी बैंक की ओर से मामले की शिकायत की गई थी। बैंक के ऑडिट के दौरान ऐसे 36 ग्राहकों की पहचान की गई जो खाता खोलकर बैंक के क्रेडिट कार्ड से जमकर खरीदारी करने के बाद पैसे जमा नहीं कर रहे थे। बैंक के अधिकारियों ने इन पते पर जांच की तो सभी गायब मिले, या फिर कई के नाम और पते गलत मिले। कुछ अन्य बैंक से भी इस तरह की शिकायत पुलिस को मिली। एसआई नवीन दहिया के नेतृत्व में पुलिस टीम ने जांच शुरू की।
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तफ्तीश में पता चला कि आरोपियों ने बैंक में खाता खोलने के लिए अलग-अलग पहचान पत्रों का इस्तेमाल किया है। साथ ही एक ही व्यक्ति कई पतों पर अपना खाता खुलवाया था। आरोपियों ने अपने पहचान पत्र में हुलिया बदलकर फोटो खींचवाया था। किसी में दाढ़ी थी तो किसी में क्लीन सेव था। साथ ही आरोपियों ने अपने दस्तावेजों में फर्जी उपनाम, जन्म तिथि और माता-पिता का नाम गलत लिखवा रखा था। पुलिस ने तकनीकी जांच करते हुए शुक्रवर को चारों दंपती को रानीबाग इलाके से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस गिरोह के अन्य बदमाशों की तलाश में जुटी है।
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कंपनी में घाटा होने के बाद करने लगा फर्जीवाड़ा
गिरोह के सरगना मनीष ने पिता के साथ बिजली की स्विच बनाने की फैक्टरी खोली थी। वर्ष 2012-13 में कंपनी को भारी घाटा का सामना करना पड़ा। उसके बाद मनीष ने फर्जीवाड़ा करना शुरू कर दिया। रवि सचदेवा और उमेश की मदद से फर्जी पैन कार्ड, आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र बनवाने लगा। बाद में उसने फर्जी दस्तावेज के आधार पर बैंकों में खाते खुलवा लिए। बैंक से मिले क्रेडिट कार्ड से अपने पास मौजूद स्वैप मशीन से पैसे निकाल लेता था और फिर बैंक को बताता था कि पैसे क्रेडिट नहीं हुए। जिसके एवज में बैंक उन्हें पैसे देता था। इसके अलावा वह कार्ड से जमकर खरीदारी भी करता था। साथ ही क्रेडिट कार्ड पर बैंक से लोन भी ले लेता था। लेकिन बैंक को पैसे वापस नहीं करता था। जांच में यह बात सामने आई है कि सभी आरोपी एक दूसरे के जानकार हैं।

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