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डीयू के कॉलेजों में दिव्यांगों के लिए लिफ्ट, रैंप व अन्य सुविधाओं का अभाव
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नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सुविधाओं का अभाव है। कॉलेजों में ना ही चलने-फिरने के लिए टैक्टाइल फ्लोरिंग है ना रैंप, लिफ्ट, ब्रेल चिन्ह, ब्रेल प्रिंटर की व्यवस्था है। इसके साथ ही कंप्यूटर, लैपटॉप, ध्वनि संकेत रैलिंग, रिसोर्स रूम व रेस्ट रूम और व्हील चेयर की व्यवस्था की गई है। आम आदमी पार्टी के शिक्षक संगठन दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन (डीटीए) प्रभारी डॉ हंसराज सुमन ने कुलपति प्रो पीसी जोशी को पत्र लिखा है।
डॉ सुमन का कहना है कि डीयू में लगभग दो हजार विद्यार्थी, तीन सौ शिक्षक व दो सौ कर्मचारी दिव्यांग हैं। डीयू के एक दर्जन कॉलेजों जिसमें कई नामी कॉलेज हैं वहां दिव्यांगों के लिए सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। कुछ दिव्यांग शिक्षकों व विद्यार्थियों ने डीटीए को अपनी समस्याओं से अवगत कराया है। कुछ कॉलेजों को छोड़कर अन्य कॉलेजों में आज तक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हुई है। जबकि कॉलेज बिल्डिंग रख-रखाव के नाम पर यूजीसी से ग्रांट लेते हैं।
उन्होंने डीयू वीसी को पत्र लिखकर मांग की है कि प्रत्येक कॉलेज में रैंप, लिफ्ट, ब्रेल चिन्ह, ध्वनि संकेत, व्हील चेयर, कंप्यूटर लैपटाप, शिक्षकों के लिए रिसोर्स रूम, छात्रों के लिए रेस्ट रूम और विशेष रूप से निर्मित शौचालय बनवाए जाएं। जो कॉलेज सुविधाएं उपलब्ध ना करा सकें उनकी ग्रांट बंद करने के निर्देश दिए जाएं।
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वहीं कोविड-19 की समाप्ति पर यदि कॉलेज आकर दाखिले हों तो दिव्यांगों के लिए व्यवस्था भूतल पर की जाए। भूतल पर ही एक विशेष कक्ष बनाया जाए जिससे दिव्यांग वहां आसानी से आ जा सकें। दिव्यांग छात्रों के एडमिशन के समय कॉलेजों द्वारा विशेष वालंटियर की व्यवस्था हो जो छात्रों को सही जगह पहुंचा सकें।
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डॉ सुमन का कहना है कि डीयू में लगभग दो हजार विद्यार्थी, तीन सौ शिक्षक व दो सौ कर्मचारी दिव्यांग हैं। डीयू के एक दर्जन कॉलेजों जिसमें कई नामी कॉलेज हैं वहां दिव्यांगों के लिए सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। कुछ दिव्यांग शिक्षकों व विद्यार्थियों ने डीटीए को अपनी समस्याओं से अवगत कराया है। कुछ कॉलेजों को छोड़कर अन्य कॉलेजों में आज तक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हुई है। जबकि कॉलेज बिल्डिंग रख-रखाव के नाम पर यूजीसी से ग्रांट लेते हैं।
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उन्होंने डीयू वीसी को पत्र लिखकर मांग की है कि प्रत्येक कॉलेज में रैंप, लिफ्ट, ब्रेल चिन्ह, ध्वनि संकेत, व्हील चेयर, कंप्यूटर लैपटाप, शिक्षकों के लिए रिसोर्स रूम, छात्रों के लिए रेस्ट रूम और विशेष रूप से निर्मित शौचालय बनवाए जाएं। जो कॉलेज सुविधाएं उपलब्ध ना करा सकें उनकी ग्रांट बंद करने के निर्देश दिए जाएं।
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वहीं कोविड-19 की समाप्ति पर यदि कॉलेज आकर दाखिले हों तो दिव्यांगों के लिए व्यवस्था भूतल पर की जाए। भूतल पर ही एक विशेष कक्ष बनाया जाए जिससे दिव्यांग वहां आसानी से आ जा सकें। दिव्यांग छात्रों के एडमिशन के समय कॉलेजों द्वारा विशेष वालंटियर की व्यवस्था हो जो छात्रों को सही जगह पहुंचा सकें।