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दो करोड़ की ठगी में एक कंपनी का निदेशक गिरफ्तार, शेयर और बांड अवैध तरीके से स्थानांतरित करने का आरोप
Tue, 23 Feb 2021 10:25 PM IST
सुशील कुमार कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: सुशील कुमार कुमार
Updated Tue, 23 Feb 2021 10:25 PM IST
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दिल्ली पुलिस
- फोटो : delhipolice.nic.in
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने दो करोड़ रुपये की ठगी में सीपीआर कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड के निदेशक को गिरफ्तार किया है। उसपर आरोप है कि उसने लोगों के शेयर और बांड अवैध तरीके से स्थानांतरित कर लिया। आरोपी की पहचान सूरजमल विहार निवासी पवन कुमार गर्ग (61) के रूप में हुई है।
शाखा के संयुक्त आयुक्त डॉक्टर ओपी मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2018 में आईपी एक्सटेंशन निवासी रविंदर गुप्ता ने शाखा में ठगी की शिकायत दर्ज करवाई। जिसमें उसने बताया कि वर्ष 2009-10 में उन्होंने अपने और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम से सीपीसी कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड के माध्यम से डीमैट और ट्रेडिंग खाते खोले थे। कारोबार के दौरान निदेशक पवन ने उसके भतीजों से मेलजोल बढ़ाया और अवैध तरीके से उनके शेयर और बांड को अपने खाते में स्थानांतरित कर उनके रुपये हड़प लिए।
इसके लिए पवन गर्ग ने भतीजों के नाम से जाली डीमैट स्लिप भी तैयार किया। शिकायतकर्ता ने बताया कि उस स्लिप को आरोप ने अवैध शेयर कारोबार के लिए स्टॉक एक्सचेंज में पेश किया। जिससे उन्हें 2.6 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
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पुलिस अधिकारियों को जांच के दौरान पता चला कि पवन गर्ग ने शिकायतकर्ता व उसके परिवार वालों के नाम का शेयर और बांड से रुपये पाने के लिए उसे गिरवी भी रखा था। रुपये शिकायतकर्ता के खातों में नहीं आए। ऐसा करने के लिए निदेशक के पास कोई भी कानूनी अधिकार नहीं था। इस खुलासे के बाद 22 फरवरी को पुलिस ने पवन गर्ग को गिरफ्तार कर लिया। जांच में पता चला कि पवन गर्ग चार्टर्ड अकाउंटेंसी की पढ़ाई कर रखी है। उसने वर्ष 1996 में अपनी कंपनी शुरू की थी। कंपनी में उसके परिवार के सदस्य शामिल थे।
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शाखा के संयुक्त आयुक्त डॉक्टर ओपी मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2018 में आईपी एक्सटेंशन निवासी रविंदर गुप्ता ने शाखा में ठगी की शिकायत दर्ज करवाई। जिसमें उसने बताया कि वर्ष 2009-10 में उन्होंने अपने और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम से सीपीसी कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड के माध्यम से डीमैट और ट्रेडिंग खाते खोले थे। कारोबार के दौरान निदेशक पवन ने उसके भतीजों से मेलजोल बढ़ाया और अवैध तरीके से उनके शेयर और बांड को अपने खाते में स्थानांतरित कर उनके रुपये हड़प लिए।
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इसके लिए पवन गर्ग ने भतीजों के नाम से जाली डीमैट स्लिप भी तैयार किया। शिकायतकर्ता ने बताया कि उस स्लिप को आरोप ने अवैध शेयर कारोबार के लिए स्टॉक एक्सचेंज में पेश किया। जिससे उन्हें 2.6 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
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पुलिस अधिकारियों को जांच के दौरान पता चला कि पवन गर्ग ने शिकायतकर्ता व उसके परिवार वालों के नाम का शेयर और बांड से रुपये पाने के लिए उसे गिरवी भी रखा था। रुपये शिकायतकर्ता के खातों में नहीं आए। ऐसा करने के लिए निदेशक के पास कोई भी कानूनी अधिकार नहीं था। इस खुलासे के बाद 22 फरवरी को पुलिस ने पवन गर्ग को गिरफ्तार कर लिया। जांच में पता चला कि पवन गर्ग चार्टर्ड अकाउंटेंसी की पढ़ाई कर रखी है। उसने वर्ष 1996 में अपनी कंपनी शुरू की थी। कंपनी में उसके परिवार के सदस्य शामिल थे।