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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi Traffic Police Over Rs 84 crore PUC fines issued during GRAP checks from Oct 14 to Nov 18

ग्रैप में दिल्ली ट्रैफिक पुलिस का एक्शन: करीब एक महीने में काटे 84.98 करोड़ का चालान, PUC उल्लंघन पर जुर्माना

Sat, 22 Nov 2025 03:32 PM IST
राहुल तिवारी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: राहुल तिवारी Updated Sat, 22 Nov 2025 03:32 PM IST
सार

दिल्ली में ग्रैप के पहले दो चरणों के दौरान पीयूसी नियम तोड़ने पर 84 हजार से ज्यादा चालान काटे गए। पश्चिमी रेंज में सबसे अधिक कार्रवाई हुई। कुल जुर्माना 84 करोड़ रुपये से अधिक पहुंचा।
 

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Delhi Traffic Police Over Rs 84 crore PUC fines issued during GRAP checks from Oct 14 to Nov 18
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस (फाइल फोटो) - फोटो : एएनआई

विस्तार

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने ग्रैप के पहले और दूसरे चरण के दौरान 14 अक्तूबर से 18 नवम्बर के बीच पीयूसी प्रमाणपत्र उल्लंघन पर 84.98 करोड़ रुपये से अधिक के चालान जारी किए। अधिकारियों के अनुसार इस अवधि में कुल 84,981 चालान काटे गए, जिनमें प्रत्येक पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।

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आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पश्चिमी रेंज ने सबसे ज्यादा 22867 पीयूसी चालान जारी किए। इसके बाद दक्षिणी रेंज में 20554 और नयी दिल्ली रेंज में 13423 चालान दर्ज हुए। पूर्वी रेंज में 12441, उत्तरी रेंज में 10211 और मध्य रेंज में 5485 चालान जारी किए गए।
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पूर्वी रेंज में पूर्वी दिल्ली, उत्तर पूर्वी दिल्ली और शाहदरा शामिल हैं। नयी दिल्ली रेंज में नयी दिल्ली और दक्षिण पश्चिम दिल्ली के कुछ हिस्से आते हैं। उत्तर दिल्ली और मध्य दिल्ली मध्य रेंज में, जबकि रोहिणी, आउटर नॉर्थ और नॉर्थ वेस्ट दिल्ली उत्तरी रेंज में शामिल हैं। पश्चिमी रेंज में पश्चिम दिल्ली, द्वारका और आउटर दिल्ली आते हैं। दक्षिणी रेंज में दक्षिण दिल्ली और दक्षिण पश्चिम दिल्ली शामिल हैं।
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पुलिस ने 2030 ऐसे वाहनों का भी चालान किया जो धुआं छोड़ते पाए गए। इनमें से 1197 चालान दक्षिणी रेंज, 751 पश्चिमी रेंज और 82 नयी दिल्ली रेंज में जारी हुए। पूर्वी, मध्य और उत्तरी रेंज में ऐसे कोई मामले दर्ज नहीं हुए। अधिकारियों के अनुसार धुआं छोड़ने वाले अधिकतर वाहन बड़े कैरियर थे जो शहर के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों से गुजरते हैं। इस अवधि में दक्षिणी रेंज में एक ओवरएज वाहन को भी जब्त किया गया।

निर्माण और ध्वस्तीकरण सामग्री को ढके बिना ले जाने पर कुल 446 चालान जारी किए गए। दक्षिणी रेंज में 257, पश्चिमी रेंज में 126, पूर्वी रेंज में 27, उत्तरी रेंज में 19 और नयी दिल्ली रेंज में 17 चालान दर्ज हुए। मध्य रेंज में एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ। दिल्ली से होकर न गुजरने वाले 4708 ट्रकों को ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे की ओर मोड़ा गया ताकि शहर में अतिरिक्त प्रदूषण न बढ़े। इनमें पश्चिमी रेंज में 1980, दक्षिणी रेंज में 1722, उत्तरी रेंज में 641, पूर्वी रेंज में 266 और नयी दिल्ली रेंज में 99 ट्रक शामिल रहे। मध्य रेंज में कोई मोड़ नहीं किया गया।

इसी अवधि में ट्रैफिक पुलिस ने 703 भीड़भाड़ वाले पॉइंट्स को भी खाली कराया। दक्षिणी रेंज ने 392, पश्चिमी रेंज ने 303, पूर्वी रेंज ने पांच और उत्तरी रेंज ने तीन स्थानों पर भीड़ कम की। नयी दिल्ली और मध्य रेंज से कोई भीड़भाड़ रिपोर्ट नहीं हुई। ग्रैप नियमों के तहत पुलिस ने दिल्ली की सीमाओं पर 5910 अंतरराज्यीय बसों की जांच की। इनमें पूर्वी रेंज में 2164, पश्चिमी रेंज में 1285, दक्षिणी रेंज में 1205, नयी दिल्ली रेंज में 945 और उत्तरी रेंज में 311 जांचें हुईं। मध्य रेंज में कोई जांच नहीं हुई।

कुल 5538 अंतरराज्यीय बसों को दिल्ली में प्रवेश की अनुमति दी गई। इनमें 2005 पूर्वी रेंज, 1258 पश्चिमी रेंज, 1046 दक्षिणी रेंज, 926 नयी दिल्ली रेंज और 303 उत्तरी रेंज में अनुमति दी गई। ग्रैप मानकों पर खरा न उतरने के कारण 442 अंतरराज्यीय बसों को रोका गया। इनमें पूर्वी और दक्षिणी रेंज में 159-159, नयी दिल्ली रेंज में 89, पश्चिमी रेंज में 27 और उत्तरी रेंज में 8 बसें शामिल रहीं।

जब वायु गुणवत्ता एक निश्चित स्तर से नीचे गिरती है तो ग्रैप लागू किया जाता है। इसके तहत चार श्रेणियों में प्रतिबंध लगाए जाते हैं। पहला चरण खराब, दूसरा बहुत खराब, तीसरा गंभीर और चौथा अत्यंत गंभीर के लिए होता है। यह स्तर दिल्ली एनसीआर के एयर क्वालिटी इंडेक्स के आधार पर तय होते हैं। पहले और दूसरे चरण में पानी का छिड़काव, मैकेनिकल स्वीपिंग, पार्किंग शुल्क बढ़ाना, डीजल जेनरेटर सेटों की सख्त जांच और लोगों को सार्वजनिक परिवहन के उपयोग तथा धूल फैलाने वाले निर्माण कार्य कम करने जैसी सलाहें शामिल हैं।


तीसरे चरण में निर्माण और ध्वस्तीकरण कार्य रोक दिए जाते हैं, गैर सीएनजी और गैर इलेक्ट्रिक अंतरराज्यीय बसों पर रोक लगाई जाती है, बीएस तीन पेट्रोल और बीएस चार डीजल कारों पर प्रतिबंध लगाया जाता है और मेट्रो सेवाओं में बढ़ोतरी की जाती है। चौथे चरण में गैर आवश्यक ट्रकों का प्रवेश रोका जाता है, दसवीं तक के स्कूल बंद कर दिए जाते हैं, कार्यालयों में उपस्थिति सीमित की जाती है, बीएस छह से कम डीजल मालवाहक वाहनों की आवाजाही रोकी जाती है और शहर में केवल आवश्यक आने-जाने की अनुमति होती है।

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