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महंगाई की मार : खाद्य तेलों के दाम सातवें आसमान पर, रसोई के बजट पर वार
Sun, 09 May 2021 04:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 09 May 2021 04:55 AM IST
सार
- कोरोना काल में चीन ने खाद्य तेल का भाव भी बिगाड़ा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तेजी
- जून-जुलाई से फसल बेहतर होने पर ही भाव मंदा होगा
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edible oil
- फोटो : PTI
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विस्तार
कोरोना काल में महंगाई एक बार फिर सातवें आसमान पर है। इसमें भी रोजमर्रा की जरूरतों में शामिल खाद्य तेल के भाव तो चढ़ते जा रहे है। ना केवल सरसों तेल बल्कि सोयाबीन, पाम ऑयल, राइस ऑयल, तिल का तेल, सन फ्लॉवर समेत सभी वेजिटेबल तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है। ऐसे में देशी सरसों तेल भी पीछे नहीं है। खुदरा भाव की बात करें तो 150-170 रुपये प्रति लिटर से कम कोई भी खाद्य तेल नहीं है।
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घर की रसोई हो या रेस्टोरेंट, ढाबा। खाना पकाने के लिए सबसे जरूरी खाद्य तेल की कीमत में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। पेट्रोल की कीमत में जिस तरह आग लगी हुई है उससे सब्जियों व दाल में तड़का लगाना भी महंगा साबित हो रहा है। इसके पीछे मुख्य वजह है अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी है और चीन का भंडारण। जून-जुलाई से फसल बेहतर होने पर ही भाव मंदा होगा।
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चीन कर रहा है खाद्य तेल को स्टोर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेल की कीमत में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। चीन लगातार वेजिटेबल ऑयल को अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीद कर स्टोर कर रहा है। दिल्ली में जहां रोज 15 सौ टन की खपत है तो भारत में पूरे साल में दो सौ लाख टन की खपत होती है। इसमें डेढ़ सौ लाख टन आयात किया जाता है। यानी भारत में खपत होने वाला खाद्य तेल 75 प्रतिशत विदेशों से आता है।
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पिछले छह महीने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। मलयेशिया, इंडोनेशिया से पाम व पामोलिव रिफाइंड आता है। अर्जेंटीना व अमेरिका से सोयाबीन का तेल आता है। वहां फसल खराब होने की वजह से भाव बढ़े हुए हैं। बाहर से आने वाले सब खाद्य तेलों के भाव तेज हैं तो सरसों तेल में भी तेजी आना स्वाभाविक है। भारत के किसानों को सरसों की उपज का उचित दाम मिल पा रहा है। जून-जुलाई में तेल के भाव कम होने की उम्मीद है।
- हेमंत कुमार गुप्ता, महामंत्री दिल्ली वेजिटेबल ऑयल ट्रेडर्स एसोसिएशन
रसोई से आई आवाज...
एक तरफ जहां कोरोना जानलेवा बना हुआ है तो वहीं महंगाई भी दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है। स्वास्थ्य के लिए तेल जरूर कम इस्तेमाल करना चाहिए लेकिन इसके बिना सब्जियां स्वादहीन हो जाएंगी। इस दौरान रुचिकर खाना भी आवश्यक है।
- प्रीति सिंह, गृहणी
रसोई का बजट इन दिनों बिगड़ा हुआ है। खाद्य तेल की कीमत तो ऐसे बढ़ रही है जैसे पट्रोल की कीमत। हर दिन दुकान पर एक नया भाव सुनने को मिलता है। जहां सरसों तेल की दिनोंदिन महंगाई बढ़ रही है तो इसके साथ ही वेजिटेबल ऑयल की कीमत पिछले छह महीने से कम नहीं हो रही है।
- मधुलिका गुप्ता
कोरोना काल में एक तरफ लोगों का रोजगार खत्म हो रहा है तो दूसरी तरफ महंगाई दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। कम से कम रोजमर्रा की चीजों के भाव में वृद्धि नहीं होनी चाहिए। एक गृहणी के लिए रसोई का बजट संभालना मुश्किल हो रहा है। रसोई गैस की कीमत के साथ खाद्य पदार्थों में बेतहाशा वृद्िध हो रही है। दुकान पर जब जाओ तो भाव दो-पांच रुपये बढ़े ही मिलते हैं।
- पूजा सिंह, गृहणी