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दिल्ली: ई-बस के ट्रायल में नहीं कोई चूक, 35 बसों का बेड़ा एक माह में सड़कों पर उतरेगा
Fri, 04 Feb 2022 10:51 AM IST
शाहरुख खान
सर्वेश कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
सर्वेश कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 04 Feb 2022 10:51 AM IST
सार
मार्च के पहले सप्ताह में करीब 35 ई-बसों का बेड़ा दिल्ली की सड़कों पर उतरेगा। इसके बाद धीरे-धीरे ई-बसों की संख्या बढ़ती रहेगी। उम्मीद है कि अप्रैल आखिर तक 300 ई-बसें दिल्ली में चलने लगेंगी।
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ई-बस का ट्रायल सफल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली की पहली इलेक्ट्रिक बस ने पंद्रह दिन में करीब 4,000 किलोमीटर का सफर तय कर लिया है। इस दौरान बस चलाने में कोई तकनीकी अड़चन नहीं आई है। अब सरकार दूसरी कंपनी की एक ई-बस भी इसी महीने सड़क पर उतारने जा रही है।
इसका भी करीब एक महीने तक ट्रायल होगा। वहीं, मार्च के पहले सप्ताह में करीब 35 ई-बसों का बेड़ा दिल्ली की सड़कों पर उतरेगा। इसके बाद धीरे-धीरे ई-बसों की संख्या बढ़ती रहेगी। उम्मीद है कि अप्रैल आखिर तक 300 ई-बसें दिल्ली में चलने लगेंगी।
दरअसल, ट्रायल करने के लिए दिल्ली सरकार ने 17 जनवरी को पहली ई-बस चलाई थी। अधिकारियों का मानना है कि अभी तक इसका ट्रायल सफल रहा है। इसमें कोई भी तकनीकी अड़चन नहीं आई है। वहीं, यात्री भी इसे पसंद कर रहे हैं। कोई इस बस की तुलना मेट्रो से कर रहा है तो सीसीटीवी, पैनिक बटन, दिव्यांगों के लिए रैंप की सुविधा से खुश है।
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इसका किराया भी मेट्रो से कम है। मेट्रो और ई-बस, दोनों बिजली से चलती है। एक ट्रैक पर तो दूसरी सड़क पर चलती है। अधिकारी बताते हैं कि आने वाले दिनों में ई-बसों का बेड़ा बढ़ने जा रहा है। मार्च के पहले सप्ताह में दिल्ली की सड़कों पर 35 नई ई-बसें सड़क पर यात्रियों की सुविधा के लिए उतार दी जाएंगी।
जल्द ही एक और कंपनी की ई बस यात्री सेवा के लिए उतारी जाएगी। दोनों कंपनियों के बसों के ट्रायल के बाद अप्रैल तक दिल्ली में 300 बसें उतारने का दिल्ली सरकार का सरकार का लक्ष्य है।
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इसका भी करीब एक महीने तक ट्रायल होगा। वहीं, मार्च के पहले सप्ताह में करीब 35 ई-बसों का बेड़ा दिल्ली की सड़कों पर उतरेगा। इसके बाद धीरे-धीरे ई-बसों की संख्या बढ़ती रहेगी। उम्मीद है कि अप्रैल आखिर तक 300 ई-बसें दिल्ली में चलने लगेंगी।
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दरअसल, ट्रायल करने के लिए दिल्ली सरकार ने 17 जनवरी को पहली ई-बस चलाई थी। अधिकारियों का मानना है कि अभी तक इसका ट्रायल सफल रहा है। इसमें कोई भी तकनीकी अड़चन नहीं आई है। वहीं, यात्री भी इसे पसंद कर रहे हैं। कोई इस बस की तुलना मेट्रो से कर रहा है तो सीसीटीवी, पैनिक बटन, दिव्यांगों के लिए रैंप की सुविधा से खुश है।
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इसका किराया भी मेट्रो से कम है। मेट्रो और ई-बस, दोनों बिजली से चलती है। एक ट्रैक पर तो दूसरी सड़क पर चलती है। अधिकारी बताते हैं कि आने वाले दिनों में ई-बसों का बेड़ा बढ़ने जा रहा है। मार्च के पहले सप्ताह में दिल्ली की सड़कों पर 35 नई ई-बसें सड़क पर यात्रियों की सुविधा के लिए उतार दी जाएंगी।
जल्द ही एक और कंपनी की ई बस यात्री सेवा के लिए उतारी जाएगी। दोनों कंपनियों के बसों के ट्रायल के बाद अप्रैल तक दिल्ली में 300 बसें उतारने का दिल्ली सरकार का सरकार का लक्ष्य है।
सर्कुलर रूट पर दौड़ रही पहली ई बस
आईपी डिपो से चलकर सर्कुलर सेवा ई-44 रूट पर इलेक्ट्रिक बस आईटीओ, तिलक मार्ग, मंडी हाउस, बाराखंभा रोड, कनॉट प्लेस, जनपथ, राजेश पायलट मार्ग, पृथ्वी राज रोड, अरबिंदो मार्ग, एम्स, रिंग रोड, साउथ एक्सटेंशन, आश्रम, भोगल, जंगपुरा, इंडिया गेट, उच्च न्यायालय, प्रगति मैदान और आईपी डिपो में समाप्त हो जाती है। रात आठ बजे तक यह बस आठ फेरे लगा रही है।
4000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक कर चुकी पहली ई बस
दिल्ली की पहली इलेक्ट्रिक बस अब तक 4000 किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर चुकी है। 17 जनवरी को दिल्ली के आईपी डिपो से जेबीएम की पहली इलेक्ट्रिक बस को सर्कुलर रूट पर चलाया गया। इसके बाद से रोजाना दो शिफ्ट में यह बस आठ चक्कर लगा रही है। औसतन रोजाना करीब 220 किलोमीटर की दूरी बस तय कर रही है। दूसरी ई बस जल्द ही इसी महीने सड़क पर उतारे जाने की योजना है।
टिकट का किराया मेट्रो की तुलना में करीब 50 फीसदी
यात्रियों के लिए बसों का सफर इसलिए भी अधिक लोकप्रिय होने लगा है, क्योंकि तमाम आधुनिक सुविधाओं के बावजूद डीटीसी की एसी बसों के किराया चुकाकर मेट्रो जैसी सुविधा मिलेगी। ई-44 रूट पर ई बस कुल 27 किलोमीटर की दूरी में एक फेरा लगाती है। बस में इसके लिए किराया 25 रुपये है जबकि मेट्रो में किराया तकरीबन दोगुना। अगर 50 रुपये का दौनिक पास है तो डीटीसी की ई बस में भी आप सफर कर सकते हैं।
डिपो में ई बसों के लिए होगी चार्जिंग की सुविधा
चार्जिंग के लिए बस डिपो में ही सुविधा है। एक बार चार्ज करने के बाद बस अमूमन 80 से 100 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है। कई बार ट्रैफिक जाम के कारण बस के डिपो में लौटने पर दोबारा चार्ज किया जाता है। बसों के पहुंचने से पहले रोहिणी सेक्टर-37, राजघाट, मुंडेला कलां सहित दूसरे डिपो में भी चार्जिंग की सुविधा तैयार की जा रही है।
4000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक कर चुकी पहली ई बस
दिल्ली की पहली इलेक्ट्रिक बस अब तक 4000 किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर चुकी है। 17 जनवरी को दिल्ली के आईपी डिपो से जेबीएम की पहली इलेक्ट्रिक बस को सर्कुलर रूट पर चलाया गया। इसके बाद से रोजाना दो शिफ्ट में यह बस आठ चक्कर लगा रही है। औसतन रोजाना करीब 220 किलोमीटर की दूरी बस तय कर रही है। दूसरी ई बस जल्द ही इसी महीने सड़क पर उतारे जाने की योजना है।
टिकट का किराया मेट्रो की तुलना में करीब 50 फीसदी
यात्रियों के लिए बसों का सफर इसलिए भी अधिक लोकप्रिय होने लगा है, क्योंकि तमाम आधुनिक सुविधाओं के बावजूद डीटीसी की एसी बसों के किराया चुकाकर मेट्रो जैसी सुविधा मिलेगी। ई-44 रूट पर ई बस कुल 27 किलोमीटर की दूरी में एक फेरा लगाती है। बस में इसके लिए किराया 25 रुपये है जबकि मेट्रो में किराया तकरीबन दोगुना। अगर 50 रुपये का दौनिक पास है तो डीटीसी की ई बस में भी आप सफर कर सकते हैं।
डिपो में ई बसों के लिए होगी चार्जिंग की सुविधा
चार्जिंग के लिए बस डिपो में ही सुविधा है। एक बार चार्ज करने के बाद बस अमूमन 80 से 100 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है। कई बार ट्रैफिक जाम के कारण बस के डिपो में लौटने पर दोबारा चार्ज किया जाता है। बसों के पहुंचने से पहले रोहिणी सेक्टर-37, राजघाट, मुंडेला कलां सहित दूसरे डिपो में भी चार्जिंग की सुविधा तैयार की जा रही है।
किसी यात्री ने नहीं की अब तक कोई शिकायत
चालक विक्रम और तिलक राज ने ई बस यात्रा के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि अब तक किसी भी यात्री ने बस में किसी तरह की परेशानी की शिकायत नहीं की है। आकस्मिक परिस्थिति में कभी भी यात्री पैनिक बटन का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से सीधे तौर पर जुड़े होने की वजह से जरूरत के वक्त में यात्रियों को पुलिस, फायर सहित दूसरे विभागों की तरफ से भी सुविधा मुहैया की जाएंगी। जेबीएम के एक अधिकारी ने बताया कि इलेक्ट्रिक बस, कमोबेश मेट्रो जैसी है। न तो शोर और न ही धुआं। मेट्रो में ओवरहेड वायर से बिजली की आपूर्ति की जाती है तो बैटरी से ई बसें चलती हैं।
स्टॉप पर बसों के लिए नहीं करना होगा अधिक इंतजार
अगले साल तक दिल्ली के परिवहन बेड़े में 2000 से अधिक ई बसें होंगी। इससे न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी बल्कि बसों की कमी के कारण स्टॉप पर अधिक इंतजार भी नहीं करना होगा। पहली ई बस फिलहाल ट्रायल के तौर पर चल रही है और यात्रियों से मिलने वाली प्रतिक्रिया के आधार पर बसें आएंगी। बसों में स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल होने से प्रदूषण नहीं होगा तो यात्रियों की सहूलियतें भी काफी बढ़ जाएंगी।
स्टॉप पर बसों के लिए नहीं करना होगा अधिक इंतजार
अगले साल तक दिल्ली के परिवहन बेड़े में 2000 से अधिक ई बसें होंगी। इससे न केवल यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी बल्कि बसों की कमी के कारण स्टॉप पर अधिक इंतजार भी नहीं करना होगा। पहली ई बस फिलहाल ट्रायल के तौर पर चल रही है और यात्रियों से मिलने वाली प्रतिक्रिया के आधार पर बसें आएंगी। बसों में स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल होने से प्रदूषण नहीं होगा तो यात्रियों की सहूलियतें भी काफी बढ़ जाएंगी।