Delhi News : मशरूम किसान पप्पन गहलोत ने की आत्महत्या, लॉकडाउन में मजदूरों को फ्लाइट से घर भेज आए थे चर्चा में
Delhi News: दिल्ली पुलिस को शाम 5 बजे के आसपास सूचना मिली थी कि अलीपुर के शिव मंदिर में एक व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली है। पुलिस मौके पर पहुंची तो पता चला कि जिस व्यक्ति ने आत्महत्या की है उसका नाम पप्पन गहलोत है और वह तिग्गीपुर का रहने वालाहै।
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कोरोना महामारी के दौरान अपने कर्मचारियों को फ्लाइट से पटना भेजने वाले मशरूम किसान पप्पन गहलोत ने आत्महत्या कर ली है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार दिल्ली पुलिस को शाम 5 बजे के आसपास सूचना मिली थी कि अलीपुर के शिव मंदिर में एक व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली है। पुलिस मौके पर पहुंची तो पता चला कि जिस व्यक्ति ने आत्महत्या की है उसका नाम पप्पन गहलोत है और वह तिग्गीपुर का रहने वाला है।
Pappan used to visit the Shiv temple in front of his house daily. Today, a priest saw him hanging on the ceiling fan. A recovered suicide note stated the reason as some disease. Family doesn't suspect anyone. Further inquest proceedings to be done accordingly: Delhi Police (2/3)
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— ANI (@ANI) August 23, 2022
बताया गया कि पप्पन हर रोज अपने घर के सामने वाले शिव मंदिर में जाया करता था। मंगलवार को पुजारी ने देखा कि वह पंखे से लटका हुआ है। उसके पास से जो सुसाइड नोट मिला है उसमें किसी बीमारी के बारे में लिखा है। परिवार ने किसी पर संदेह नहीं जताया है।
दिल्ली के बख्तावरपुर इलाके के तिग्गीपुर के किसान पप्पन सिंह गहलोत कोरोना के दौरान सुर्खियों में आए थे। पप्पन ने बिहार के 10 प्रवासी मजदूरों को दिल्ली में दो माह तक अपने पास रखा। यात्री विमान सेवाएं शुरू होने के बाद इंडिगो की फ्लाइट से उन्हे पटना भेजा।
समस्तीपुर के खानपुर के श्रीपुर गाहर और आसपास के गांव के करीब 50 मजदूर उस दौरान पप्पन सिंह गहलोत के यहां मशरूम की खेती कर रहे थे। लॉकडाउन के कारण ये मजदूर दिल्ली में फंस गए थे। तब गहलोत ने मजदरों के लिए खाने-पीने का इंतजाम किया और उनके परिवार को पैसा भी भेजा। इसके बाद विमान सेवा शुरू होते ही, उन्होंने सभी 10 मजदूरों नवीन राम, महेश राम, अर्जुन राम, लखींद्र राम, प्रवीण राम, चंदेश्वर राम, अमरजीत राम, जीवठ राम, दिनेश राम और जितेंद्र राम को दिल्ली से पटना भेजने के लिए फ्लाइट की टिकट दी और घर भिजवाया।
गहलोत ने प्रति टिकट के लिए 6800 रुपये की रकम चुकाई। एक मजदूर ने बताया कि गहलोत ने पटना से घर पहुंचने के लिए हर प्रवासी को 3-3 हजार रुपये भी दिए थे।